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Chaitra Navratri 2022: कल से चैत्र नवरात्रि के साथ नव संवत्सर भी होगा शुरू, अलग-अलग नामों से मनाया जाता है यह पर्व
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Chaitra Navratri 2022: कल से चैत्र नवरात्रि के साथ नव संवत्सर भी होगा शुरू, अलग-अलग नामों से मनाया जाता है यह पर्व

Chaitra Navratri 2022 JOIN OUR WHATSAPP GROUP आज विक्रम संवत 2078 का आखिरी दिन है। एक बाद 2079 शुरू हो जाएगा। भारतीय संस्कृति और हिंदू शास्त्रों के हिसाब से कल का दिन धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष से नवरात्रि की शुरुआत होती है। वहीं साथ ही हिंदू नववर्ष भी शुरू हो रहा है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन को हिंदू संवत्सर या फिर विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है। सोशल मीडिया पर इस बार हिंदू नव संवत्सर को लेकर 2 दिन पहले ही बधाई संदेश शुरू हो गए हैं। अलग-अलग प्रदेशों में इसे अलग तरीके से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इस दिन को उगादी, पंजाब में बैसाखी और सिंधी चेती चंडी के नाम से मनाते हैं। इस बार हिंदू नव वर्ष की शुरुआत 2 अप्रैल शनिवार से हो रही है । चैत्र नवरात्रि को लेकर देशभर के देवी मंदिरों को खूब सजाया गया ह...
मैसूर और कुल्लू का दशहरा रहा है आकर्षण का केंद्र, देश-दुनिया से हजारों लोग पहुंचते हैं देखने
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मैसूर और कुल्लू का दशहरा रहा है आकर्षण का केंद्र, देश-दुनिया से हजारों लोग पहुंचते हैं देखने

Dussehra in Mysore देश में दशहरा पर्व की रौनक छाई हुई है। सभी लोग शाम को होने वाले दशहरा उत्सव की तैयारी में जुटे हैं। मैदानों और पार्कों में रावण के पुतले दहन करने के लिए तान दिए गए हैं। देशवासी विजयदशमी के उल्लास में सराबोर हैं। आज बात करते हैं भारत में उन जगहों की जहां का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है। ‌ देश के कई शहरों में यह आयोजन किया जाता है। लेकिन कई राज्यों में दशहरा पर्व देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। इन जगहों पर दशहरा बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है और यहां की रौनक बिल्कुल अलग होती है। अब जानते हैं कि भारत की किन जगहों पर सबसे बड़ा दशहरा मनाया जाता है। पहले बात करेंगे कर्नाटक के शहर में मैसूर की। मैसूर का दशहरा मैसूर में दशहरे का त्योहार कई दिनों तक मनाया जाता है। यहां का दशहरा दुनिया भर में प्रसिद्ध है। दशहरा को कर्नाटक का प्रादेशिक त्योहार भी माना जाता है। यहां नवरात्रि...
Happy Navratri 2021: नवरात्रि के साथ झूमा बाजार, सुख-समृद्धि और कारोबार की दृष्टि से आई ‘मंगल घड़ी’
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Happy Navratri 2021: नवरात्रि के साथ झूमा बाजार, सुख-समृद्धि और कारोबार की दृष्टि से आई ‘मंगल घड़ी’

इंतजार खत्म। त्योहारों का सीजन शुरू। ऐसी शुभ घड़ी जिसमें भक्ति की उपासना का महापर्व, उत्सव के साथ खरीदारी और नया काम शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्त भी है। कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका फिर उसके बाद 15 दिनों के श्राद्ध पक्ष में शांत बैठे लाखों लोग नए बिजनेस और अन्य नई प्लानिंग के साथ 'श्रीगणेश' करने के लिए आज तैयार हैं। देशभर के बाजारों में भी 'चकाचौंध' बढ़ गई है। ठेल (रेहड़ी) वालों से लेकर बड़े दुकानदारों के चेहरों पर रौनक छा गई है। आज से करीब एक महीने तक मुनाफा, कारोबार और कमाई की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी ने अपने-अपने हिसाब से तैयारी कर रखी है। आम हो या खास, कोई भी इस त्योहारी सीजन का 'मौका' गंवाना नहीं चाहते हैं। आज 7 अक्टूबर, गुरुवार है। देश में आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने से भक्ति का उत्सव भी शुरू हो गया है। जिसे मां दुर्गा उत्सव भी कहा जाता है।मं...
Dussehra (Vijayadashami) Special: इस बार दशहरा उत्सव और रावण के पुतला दहन पर नहीं दिखाई देगी चहल-पहल
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Dussehra (Vijayadashami) Special: इस बार दशहरा उत्सव और रावण के पुतला दहन पर नहीं दिखाई देगी चहल-पहल

Dussehra (Vijayadashami) Special विजय दशमी या दशहरा उत्सव आते ही रावण के घमंड और अहंकार याद आते हैं । वह रावण जिसने मरते दम तक अपना अहंकार कम नहीं किया । जब-जब रावण का नाम लिए आता है तब बुराई पर अच्छाई की जीत याद आती है । लेकिन इस बार देश में कोरोना महामारी सबसे बड़ी अभिशाप बन गई है । 'इस महामारी ने देश ही नहीं पूरे विश्व भर में लोगों का जीवन फीका कर दिया है । कोरोना संक्रमण काल में लोग डर-डर कर जिंदगी जी रहे हैं । आठ महीने पहले शुरू हुई दहशत आज भी जारी है । लोगों को अभी भी इंतजार है जिंदगी कब पटरी पर लौटेगी' । खैर यह तो दैवीय आपदा है । अब बात करेंगे विजयदशमी यानी दशहरा उत्सव की । आज यानी शनिवार को शारदीय नवरात्रि समापन की ओर बढ़ रही है, लेकिन दशहरा उत्सव की रौनक देशभर में दिखाई नहीं पड़ रही । कोरोना की वजह से लोगों में इस बार रावण को जलाने या जलते हुए देखने में कोई उत्साह नजर नहीं आ र...
Navratri 2020 Special: आज करें अष्टमी और नवमी की हवन पूजा (नवरात्रि विशेष )
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Navratri 2020 Special: आज करें अष्टमी और नवमी की हवन पूजा (नवरात्रि विशेष )

Durga Ashtami 2020 Maa Mahagauri Puja आज शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी दोनों दिनों के संयोग एक साथ हैं। अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा की जाती है। मां का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से पुकारते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मां महागौरी ने कठिन तप कर गौर वर्ण प्राप्त किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां महागौरी भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं और उनके बिगड़े कामों को पूरा करती हैं। महागौरी की आराधना से सोमचक्रजाग्रत होता है। इससे असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। समस्त पापों का नाश होता है। सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हर मनोकामना पूर्ण होती है।भोग:आज के दिन महागौरी को नारियल का भोग लगाने की पंरपरा है। भोग लगाने के बाद नारियल को या तो ब्राह्मण को दे दें अन्यथा प्रशाद रूप में वितरण कर दें। मंत्र:श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रम...
Navratri 2020 Special: नवरात्रि का सातवां दिन, मां कालरात्रि की करें पूजा(नवरात्रि विशेष)
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Navratri 2020 Special: नवरात्रि का सातवां दिन, मां कालरात्रि की करें पूजा(नवरात्रि विशेष)

Seventh Day navratri worship maa kalratri आज नवरात्रि का सप्तम दिन हैं ।आज मां दुर्गाजी का सप्तम् स्वरूप मां कालरात्रि देवी की पूजा की जाती है। दुर्गा मां की पूजा का सातवां दिन नवरात्रि के दिनों में काफी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। मां कालरात्रि को सदैव शुभ फल देने के कारण शुभंकरी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है। मां के इस स्वरूप को वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां कालरात्रि की कृपा से भक्त हमेशा भयमुक्त रहता है, उसे अग्नि, जल, शत्रु आदि किसी का भी भय नहीं होता। पौराणिक कथाओं में मां कालरात्रि को काली का ही रूप माना जाता है। काली मां इस कलियुग मे प्रत्यक्ष फल देने वाली हैं। काली, भैरव तथा हनुमान जी ही ऐसे देवी व देवता हैं, जो शीघ्र ही जागृत होकर भक्त को मनोवांछित फल देते हैं। काली के नाम व रूप अनेक हैं। किन्तु लो...
Navratri 2020 Special: नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यानी की करें पूजा ( नवरात्रि विशेष )
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Navratri 2020 Special: नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यानी की करें पूजा ( नवरात्रि विशेष )

Navratri 2020 Special Maa katyayani puja vidhi sixth day of navratra आज शारदीय नवरात्रि का छठा द‍िन है। आज मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा करते हैं। दुर्गा सप्तशती में मध्य चरित्र जिस महिषासुर का उल्लेख मिलता है उसका वध करने वाली देवी मां कात्यायनी ही हैं। इसलिए इन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जानते हैं। देवी के इस स्‍वरूप की पूजा से कन्याओं को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है तथा विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं। माता कात्यायनी की उपासना से साधक इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं। माता हर हाल में भक्तों की कामना पूरी करती है। पौराणिक कथाओं में देवी कात्यायनी के ऋषि कात्यायन बड़े भक्त थें ,इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने इनके घर पुत्री रूप में प्रकट होने का वरदान ...
Navratri 2020 Special: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की करें पूजा (नवरात्रि विशेष)
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Navratri 2020 Special: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की करें पूजा (नवरात्रि विशेष)

Navratri 2020 Special kushmanda puja mantra-aarti आज नवरात्री का चौथा दिन हैं।आज के दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्माण्डा की पूजा अर्चना की जाती है। मां कूष्माण्डा की 8 भुजाएं हैं, इसलिए इनको अष्टभुजा भी कहा जाता है। ये अपनी भुजाओं में कमल, कमंडल, अमृत कलश, धनुष, बाण, चक्र और गदा धारण करती हैं। वहीं, एक भुजा में माला भी धारण करती हैं और सिंह की सवारी करती हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।मां कुष्मांडा की विधि विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि मां कुष्मांडा संसार को अनेक कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन लाल रंग के फूलों से पूजा करने की परंपरा है,क्योंकि मां कुष्मांडा को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय हैं।मां कुष्मांडा की कथा:पौराणिक कथाओं के अनुसार मां कुष्मांडा का अर...
Navratri 2020 Special: नवरात्रि तृतीय दिन, मां चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) की करें पूजा (नवरात्रि विशेष)
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Navratri 2020 Special: नवरात्रि तृतीय दिन, मां चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) की करें पूजा (नवरात्रि विशेष)

Navratri 2020 Special Worship Maa Chandraghanta आज नवरात्रि का तीसरा दिन है। आज के दिन दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन मां की उपासना की जाती है मान्यताओं के अनुसार आज के दिन अगर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाए तो उनकी कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। साथ ही दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है। दुर्गा मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र मौजूद है। यही कारण है कि मां के इस स्वरूप को चंद्रघंटा कहा जाता है।मां चंद्रघंटा ने असुरों के साथ युद्ध में अपने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इनके पूजन से साधक को तीसरे मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त हो जाती हैं। सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इससे स्पष्टता, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने की योग्यता जैसे मणियों सरीखे गु...