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लॉक डाउन

लॉक डाउन
DW Editorial

लॉक डाउन

चिड़ियों चहचहाहट ने मेरी आंखें खोल दी ,जाने कब शाम के साढ़े छह बज गए और पता भी ना चला या फिर इतने दिनों बाद जो सकून कि नींद थी उस से उठने का दिल ही ना हुआ।आज लॉकडाउन का पांचवां दिन था ,सुबह से शाम तक कुछ मिला ही नहीं काम करने को।जाने इतने मशीन से कब बन गए थे हम। सुबह से शाम तक भाग दौड़ के इतने आदि बन गए थे कि खुद के लिए अपने परिवार के साथ बिताने के लिए मिला समय भी बोझिल सा गुजरने लगा, शायद आदतन हम मजबूर थे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और भाग दौड़ पर।खैर सोचा चाय बनाई जाए खुद के लिए ,पानी गरम करने को गैस पर चढ़ा कर खुद को ऑनलाइन किया ताकि बोर ना हो जाऊ, नेट के बिना ना रहने की आदत को ठहरी।नोटिफिकेशंस की टन टन टन की आवाज ,ने खबर देखने के लिए मजबूर कर दिया था। ऐ न आई, आज तक,दैनिक जागरण ,दैनिक भास्कर सारे ऑनलाईन एप्प के नोटिफिकेशंस आने सुरू हो गए। दरअसल पेशे से नई पत्रकार हूं ,और खबरों पर...
Lockdown 3.0 : Lockdown impact on Indian Economy – India lockdown extended for two more weeks – लॉक डाउन और आर्थिक मंदी ….
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Lockdown 3.0 : Lockdown impact on Indian Economy – India lockdown extended for two more weeks – लॉक डाउन और आर्थिक मंदी ….

कल यानी 3 मई को लॉक डाउन का दूसरा चरण भी समाप्त होने वाला है और तीसरी बार 14 दिनों की लॉक डाउन का तीसरा चरण भी शुरू होने वाला है। लेकिन क्या आपको पता है लगातार 40 दिनों से चल रहे लॉक डाउन की वज़ह से आज पूरे देश में नकदी कि समस्या सबसे ज्यादा सामने आ रही है। एक सर्वे के दौरान यह पता लगाया गया था कि भारत में कई अकाउंट धारक अपने पीएफ अकाउंट से पैसे निकाल रहें हैं। इसके साथ साथ देखा जा रहा है कि कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड्स कि लिमिट्स भी कम कर रहें हैं क्यों कि उनका मानना है कि अगर नगदी कि समस्या रही तो लोग कार्ड का पेमेंट समय पर नहीं कर पाएंगे। ऐसा नहीं कि यह पहली बार हुआ है जब आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट घटाई गई है, क्यों की आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट आपकी आमदनी और क्रेडिट हिस्ट्री पर निर्भर करती है । लेकिन इस बार जिस तरह से COVID 19 का असर भारत  पर ही नहीं पूरे विश्व पर है तो बैंकें और भी...