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जोशीमठ में दरकते मकानों-दीवारों से लोगों में दहशत, धार्मिक-ऐतिहासिक शहर को बचाने की जारी जद्दोजहद

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पिछले 4 दिनों से उत्तराखंड का ऐतिहासिक धार्मिक शहर जोशीमठ में दहशत छाई हुई है। जोशीमठ में लगातार हो रहे धंसाव से मकानों, दीवारों, जमीन और सड़कें चटक गई हैं। जिस वजह से जोशीमठ में हजारों लोग डर के साए में जी रहे हैं। ‌ इस धार्मिक और ऐतिहासिक शहर को राज्य सरकार की ओर से बचाने की जद्दोजहद जारी है। इसी को लेकर शुक्रवार देर शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून में हाई लेवल की मीटिंग की थी। इसके बाद आज सुबह सीएम धामी हालातों का जायजा लेने जोशीमठ पहुंचे। यहां उन्होंने मकानों और दीवारों में आई दरारों को देखा और संबंधित अधिकारियों से बात भी की। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।सीएम धामी ने कहा कि पानी के रिसाव से काफी घरों में दरारें आई हैं, हमारा प्रयास यही है कि सभी को सुरक्षित किया जाए, लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। साथ ही भू-धंसाव के कारणों का पता लगाया जा रहा है। हालात काबू में करने के लिए जरूरी प्रयास उठाए जा रहे हैं। सीएम धामी ने आगे कहा कि हमारा प्रयास सभी को सुरक्षित बनाना है, आवश्यक व्यवस्था के लिए तैयारी की गई है। हमारा पहला काम लोगों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाना है। काम कर रहे भूवैज्ञानिक, इसरो के साथ गुवाहाटी और आईआईटी रुड़की की टीम भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थान पर एक बड़ा अस्थायी पुनर्वास केंद्र बनाया जाए। ताकि जोशीमठ शहर के लोगों को वहां पर शिफ्ट कराया जा सके बैठक में सीएम धामी को अधिकारियों की तरफ से जानकारी दी गई है कि जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र में 600 से ज्यादा घरों में दरारें आई हैं। इसके अलावा अभी तक 38 परिवारों को अस्थाई रूप से सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया गया है। क्षेत्र में कई इलाकों में लगातार दरारें बढ़ रही है। ऐसे में जल्द ही बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। बेघर हुए परिवारों को चार हजार रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा, ताकि वो किराए पर सुरक्षित स्थानों में रह सकें। बता दें कि केंद्र सरकार भी जोशीमठ के हालातों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। शुक्रवार शाम को भूस्खलन की जद में आने से जोशीमठ के सिंहधार वार्ड में भगवती मंदिर धराशायी हो गया। पिछले कुछ दिनों से जोशीमठ के कई इलाकों में लैंडस्लाइड और दरकती दीवारों की वजह से लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। जो अपने घर में रह रहे हैं, उन लोगों को पूरी रात नींद नहीं आ रही। जिनके घरों में दरारें आ चुकीं हैं या जमीन का हिस्सा धंस गया है, वो लोग अपना आशियाना छोड़कर पलायन कर चुके हैं। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जोशीमठ मामले में 6 सदस्यी कमेटी भी गठित की है। ‌जोशीमठ में दरकती सड़कें मकानें और दीवारों को लेकर लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। इसके साथ जोशीमठ का मामला मीडिया और सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड हो रहा है। जोशीमठ पिछले कई दिनों से उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में चर्चा में बना हुआ है। अब आइए जान लेते हैं ऐतिहासिक और धार्मिक शहर जोशीमठ के बारे में।

आदि शंकराचार्य से जुड़ा हुआ यह ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल जोशीमठ–

बता दें कि जोशीमठ उत्तराखंड के चमोली जिले में आता है। यह लगभग 25,000 की आबादी वाला शहर है। पिछले कई दिनों से जोशीमठ के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 287 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बद्रीनाथ धाम जाते समय जोशीमठ मुख्य मार्ग पर स्थित है। ‌ जोशीमठ में भी कई प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल हैं। बता दें कि जोशीमठ एक पवित्र शहर है जो उत्‍तराखंड के चमोली जिले में समुद्र स्‍तर से 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है । यह शहर बर्फ से ढंकी हिमालय पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है। यह स्‍थल हिंदू धर्म के लोगों के लिए प्रतिष्ठित जगह है और यहां कई मंदिर भी स्‍थापित हैं । यहां 7वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ और बद्रीनाथ मंदिर तथा देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की । आदि-शंकराचार्य के बसाए चार मठों में से जोशीमठ एक है। जाड़े के समय इस शहर में बद्रीनाथ की गद्दी विराजित होती है, यहां हिंदू धर्म के लिखित वेद अथर्ववेद का पाठ पवित्र माना जाता है । इस शहर को पूर्व काल में कार्तिकेयपुर के नाम से जाना जाता था । जोशीमठ में एक प्राचीन पेड विराजित है, जिसे “कल्‍पवृक्ष” के नाम से जाना जाता हैं, जो देश का सबसे पुराना पेड़ माना जाता है । स्‍थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 1200 पुराने इस वृक्ष के नीचे आदि गुरु शंकराचार्य ने घोर तपस्‍या की थी । कल्‍पवृक्ष की परिधि 21.5 मीटर की है । नरसिंह मंदिर, जोशीमठ का अन्‍य लोकप्रिय मंदिर है, जो हिंदूओं के भगवान नरसिंह को समर्पित है। जोशीमठ शहर के आस-पास घूमने योग्य स्थानों में औली, उत्तराखंड का मुख्य स्की रिसॉर्ट शामिल है। बद्रीनाथ, औली तथा नीति घाटी के सान्निध्य के कारण जोशीमठ एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया है । जोशीमठ में सबसे प्रसिद्ध मंदिर नरसिंह मंदिर है। इसके बारे में कहा जाता है कि बद्रीनाथ यात्रा तब तक पूरी तरह से नहीं देखी गई, जब तक नरसिंह मंदिर के दर्शन न किए जाएं। जोशीमठ में नरसिंह मंदिर उतना ही पुराना और मंदिर है, वासुदेव मंदिर, जो भगवान कृष्ण का मंदिर है। इसकी सातवीं शताब्दी में कत्यूरी राजाओं ने बनवाया था। मंदिर में भगवान विष्णु के चतुर्भुज अवतार की मूर्ति है। उनके हाथों में शंख, गदा, चक्र और पद्यम है लेकिन ये क्रम के अनुसार नहीं है बल्कि उस समय के राजाओं ने इसे बदल दिया था। कहा जाता है कि राजा को सपना आया था कि ऐसा करने से उनकी स्थिति और प्रजा सुरक्षित रहेगी। ये मंदिर आज की तुलना में पहले बहुत बड़ा था।इन जगहों के अलावा जोशीमठ में ही हिम और स्कीइंग के लिए सबसे प्रसिद्ध औली भी दृश्य है। सर्दियों में बर्फ देखने के लिए टूरिस्ट औली चिचे आते हैं। समुद्र तल से तीन हजार मीटर के प्रोफाइल औली में स्थित है। जोशीमठ से औली 16 किलोमीटर दूर है। जोशीमठ से औली जाने के तीन रास्ते हैं रोपवे, सड़क मार्ग और पैदल रास्ता।
जोशीमठ पहुंचने के लिए आप हिमालय की तलहटी पर बसे ऋषिकेश से अगर शुरुआत करें तो, गंगा नदी के साथ-साथ सर्पीली सड़क से होते देवप्रयाग तक पहुंचें। यहां संगम पर, भागीरथी का आप छोड़ें और अलखनंदा आपको रुद्रप्रयाग तक ले गए। वहां मंदिर नदी से मुलाकात कर आप फिर अलखनंदा के साथ कर्णप्रयाग से होते हैं नंदप्रयाग, और फिर कुल मिलाकर सौ किलोमीटर की दूरी कर, जोशीमठ पहुंचेंगे। अब तक आप 6150 फुट की लंबाई पर पहुंच चुके हैं। वनस्पतियों की बर्फीली पहाड़ियों को आप करीब से देख सकते हैं और आप बेशुमार खूबसूरती से भरपूर जोशीमठ में हैं। जोशीमठ से कई मार्गों का रास्ता भी होकर गुजरता है।

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