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उत्तराखंड विधानसभा से बर्खास्त किए गए 228 कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, कोर्ट ने स्पीकर के फैसले को सही माना


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उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त किए गए 228 कर्मचारियों को आज नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के इन कर्मचारियों को हटाने के बाद यह सभी हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट में न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने विधानसभा सचिवालय से हटाए गए कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी थी। एकलपीठ ने विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई में उनकी बर्खास्तगी के आदेश पर अग्रिम सुनवाई तक रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ये कर्मचारी अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। इस आदेश के खिलाफ सरकार डबल बैंच में गई थी। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को सही माना है। गौरतलब है कि विधानसभा सचिवालय में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा की गई 150 और प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा की गई 78 तदर्थ नियुक्तियों को विधासनभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी की सिफारिश पर शासन ने रद कर दिया था, जिसके बाद इन कर्मचरियों को नौकरी से हटा दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ ये कर्मचारी हाईकोर्ट गए। विधानसभा से बर्खास्त किए गए कर्मचारी हाईकोर्ट से बड़ी उम्मीद लगाए हुए थे। लेकिन गुरुवार को उन्हें निराशा हाथ लगी। बता दें कि करीब 5 महीने पहले उत्तराखंड विधानसभा में बैकडोर से की गई भर्तियों को लेकर राज्य में सियासी माहौल को गर्माया हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत तमाम नेताओं ने इन भर्तियों पर सवाल उठाए थे। इस मामले की गूंज दिल्ली तक भी सुनाई दी। जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में बैकडोर से की गई भर्तियों की विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी से जांच करके कार्रवाई करने की अपील की थी। करीब 1 महीने की जांच के बाद स्पीकर खंडूड़ी ने इन कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था ।

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