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भाजपा नेता को फीफा में भी आतंकवादी मंच दिखने लगा है!

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फीफा वर्ल्ड कप चल रहा है। इस बीच फीफा को एक बड़ा बयान आया है गोवा इकाई के प्रवक्ता सैवियो रोड्रिग्स द्वारा। सैवियो के बयान में यह साफ कहा गया है कि भारत सरकार और भारतीय फुटबाल संघ फीफा विश्व कप का बहिष्कार करने की बात कही है। अब यह सब बाते भाजपा प्रवक्ता क्यों कह रहे हैं, उसे भी जान लीजिए। दरअसल फीफा द्वारा भारत की ओर से भगोड़ा घोषित विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को आमंत्रित किया गया था जिसके बाद से इस तरह के उपदेश भाजपा प्रवक्ता देने लगे हैं।

सैवियों रोड्रिग्स ने अपने बयान में कहा कि जाकिर नाइक भारतीय कानून की नज़रों में एक भगोड़ा है। धन सोधन गतिविधियों और भड़काऊ भाषण देने वाले जाकिर नाइक आंतकवादियों का हमदर्द है। जिस इंसान को ओसामा का खुलेआम समर्थन प्राप्त है वह कैसे किसी इवेंट द्वारा आमंत्रित किया जा सकता है। इसी लॉजिक के साथ केंद्र सरकार, भारतीय फुटबॉल संघ, कतर में रह रहे भारतीयों और फीफा विश्व कप के लिए अरब देश की यात्रा की योजना बना रहे फुटबॉल प्रेमियों से इस खेल स्पर्धा का बहिष्कार करने का आग्रह किया

आपको बता दें कि फीफा वर्ल्ड कप दुनिया का सबसे देखा और पसंद किया जाने वाला खेल है। फुटबाल के चाहने वालों कीसंख्या इतनी अधिक है जो इस महाकुभ की महत्ता को और बढ़ाते हैं। इसी को ध्यान में रखकर इसकी लोकप्रियता और डिमांड बढी है।

उन्होंने कहा कि न सिर्फ भारत के लोगों को, बल्कि आतंकवाद से पीड़ित अन्य देशों के लोगों को भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए फीफा विश्वकप का बहिष्कार करना चाहिए। इस पूरे मामले में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ कतर की यात्रा पर गए थे। आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति धनखड़ ने 20 नवंबर को इस कार्यक्रम में भाग लिया और अगले दिन कतर से निकल गए थे। उन्होंने कतर में उन भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात की थी जिन्होंने कतर में फुटबॉल स्टेडियम बनाए थे।

जाकिर को लेकर उठे विवाद के बाद अब कतर के अधिकारियों ने भी अपना बयान जारी किया है। अधिकारियों ने कहा कि जाकिर नाइक दोहा के निजी दौरे पर हो सकते हैं। कतर सरकार ने भारतीय वार्ताकारों को बताया कि पूरा जाकिर नाइक विवाद अन्य देशों की ओर से रचा गया था और कतर के खिलाफ एक बड़े दुष्प्रचार अभियान के हिस्से के रूप में था। 2016 में भारत छोड़ दूसरे मलेशिया गया जाकिर नाइक मार्च 2022 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) को UAPA के तहत एक गैरकानूनी संघ घोषित किया और इसे पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।

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