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Jehanabad district judge gave 10 thousand rupees from his pocket to the brahmin in debt

बिहार के जहानाबाद की लोक अदालत में कर्ज से परेशान बुजुर्ग का पैसा जज ने खुद ही चुकाया

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शनिवार को बिहार के जहानाबाद में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने एक मिसाल पेश की। आमतौर पर जज को फैसले और न्याय दिलाने के लिए जाना जाता है। लेकिन जहानाबाद में एक जज ने एक बुजुर्ग की स्वयं मदद की। आइए जानते हैं पूरा मामला । बता दें कि बिहार के जहानाबाद की लोक अदालत में कर्ज न चुका पाने से परेशान एक बुजुर्ग फूट-फूटकर रोए तो जिला जज ने उनका कर्ज चुका दिया। बुजुर्ग ने अपनी बेटी की शादी के लिए 18 साल पहले कर्ज लिया था। इसे चुका नहीं पाने के कारण बैंक ने वसूली का नोटिस दिया था। शनिवार को बुजुर्ग लोक अदालत में ऋण समझौता के लिए पहुंचे तो बैंक ने ऋण के 18 हजार 600 रुपये लौटाने को कहा। बुजुर्ग ने कहा कि मैं बेटी की शादी में काफी कर्ज में डूब गया हूं। किसी तरह पांच हजार रुपये का इंतजाम करके लाया हूं। यह लेकर मुझे कर्ज मुक्त कर दीजिए। यह कह कर बुजुर्ग फफक-फफककर रोने लगे। बुजुर्ग की व्यथा सुन जज राकेश कुमार को दया आ गई। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि बुजुर्ग का कर्ज मैं स्वयं दूंगा। उन्होंने दस हजार रुपये देकर राजेंद्र तिवारी का कर्ज चुकता कर दिया। बाकी के तीन हजार छह सौ पंडित जी के गांव के ही एक ग्रामीण ने दिए। जिला जज राकेश कुमार सिंह की इस दरियादिली की हर किसी ने प्रशंसा की। कोर्ट से बाहर निकले राजेंद्र तिवारी ने बताया कि हमने बेटी की शादी के लिए कर्जा लिया था। इसका 18 हजार रुपये बाकी था। आज जज साहब ने मेरी मदद की तो कर्जा चुक गया। जज साहब ने 10 हजार रुपये दिए। मेरे साथ आए लड़के ने तीन हजार और मैंने 5 हजार रुपये दिए।

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