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मोरबी केबल ब्रिज दुर्घटना में घायल हुए लोगों से पीएम मोदी आज करेंगे मुलाकात, जानें क्या है इस ब्रिज का इतिहास

PM Narendra Modi to visit Morbi today
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गुजरात के मोरबी रविवार को हुए पुल हादसे में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस हादसे में अब तक 134 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकी 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। इस हादसे पर देश हीं नहीं बल्कि विदेश के नेताओं ने भी दुख जताया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज मोरबी जाकर स्थिति का जायजा लेंगे। इस दौरे से पहले पीएम मोदी ने कल अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तीन बजकर 45 मिनट पर हादसे वाली जगह पर पहुंचेंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल व आला अधिकारी भी होंगे। इसके बाद चार बजे वह अस्पताल में घायलों से मिलेंगे।
इस घटना के बाद गुजरात सरकार ने राज्य में एक दिन के राजकीय शोक का एलान किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोरबी पुल हादसे के चलते राज्य में बुधवार (कल) को राजकीय शोक की घोषणा की गई है।

बता दें कि रविवार शाम छठ पूजा के दौरान गुजरात के मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज टूटकर गिरा और कई लोगों के लिए मौत का ‘काल’ बन गया। मोरबी की शान कहलाए जाने वाला केबल ब्रिज 143 साल पुराना था जो रविवार, 30 अक्टूबर 2022 को हादसे का शिकार हुआ।

आपको बता दें कि इस पुल का बेहद पुराना इतिहास है। इस पुल का निर्माण आजादी से पहले ब्रिटिश शासन काल में किया गया था। मच्छु नदी पर बना यह ब्रिज मोरबी का प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था।

कब बना था मोरबी का केबल ब्रिज?
मोरबी के राजा वाघजी रावजी ने केबल ब्रिज (झूलता हुआ पुल) बनवाया था। जिसका उद्घाटन 1879 में किया गया था। ब्रिटिश इंजीनियरों के द्वारा बनाए गए इस पुल के निर्माण में आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। ब्रिटिश शासन में बना ये ब्रिज अच्छी इंजीनियरिंग का प्रतीक रहा है। राजकोट जिले से 64 किलोमीटर की दूरी पर मच्छु नदी पर बना यह पुल लोगों के आर्कषण का केंद्र था। 765 फुट लंबा और 4 फुट चौड़ा ये पुल एतिहासिक होने के कारण गुजरात टूरिज्म की लिस्ट में भी शामिल किया गया था। इस पुल को ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा बनाए गए इस पुल को उन्‍नत इंजीनियरिंग का जीता जागता नमूना माना जाता था।

मरम्मत के बाद दोबारा खुला था ब्रिज

इस पुल को 5 दिनों पहले ही मरम्मत के बाद लोगों के लिए खोला गया था। ब्रिज के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ओरेवा ग्रुप को दी गई थी। इस ग्रुप ने मार्च 2022 से मार्च 2037 यानी 15 साल के लिए मोरबी नगर पालिका के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया है। बताया जा रहा है कि पुल पर कैपेसिटी से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिसकी वजह से हादसा हुआ।

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