बुधवार, नवम्बर 30Digitalwomen.news

केजरीवाल सरकार के इशारों पर यमुना में झाग को कम करने के लिए डाले जा रहे केमिकल में कितनी सच्चाई है

Delhi Jal Board sprays chemicals to dissolve toxic foam in Yamuna
JOIN OUR WHATSAPP GROUP

छठ महापर्व सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वांचलवासियों के लिए एक पावन त्योहार के रूप में जाना जाता है लेकिन दिल्ली में इसकी स्थिति पिछले दो-तीन सालों से सवालों के घेरे में रही है। उसका कारण है की हर बात दीपावली के बाद पटाखों के कारण दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है और फिर यमुना की स्थिति हमेशा की तरह बदतर नजर आती है। हालांकि यमुना की स्थिति पूरे साल किसी भी सरकार को नजर नहीं आता चाहे वह एमसीडी हो या फिर केजरीवाल सरकार लेकिन छठ महापर्व चुकी यमुना के किनारे ही मनाने की परंपरा है इसलिए छठ पूजा आते हैं सबसे पहला सवाल यमुना सफाई को लेकर होता है। और जब काम की बात को तो सरकारें एक-दूसरे पर आरोप लगाना शुरु करती है जो कि काफी स्वभाविक है।

पिछले साल छठ पूजा में केजरीवाल ने बैन लगा दिया था लेकिन पूर्वांचलियों के संघर्ष के बाद इसे फिर से ओपन किया गया और एक बार फिर से इस साल भी केजरीवाल सरकार का कहना है कि उन्होंने पूरे यमुना को साफ कर दिया है जिसमें आराम से छठव्रती पूजा कर सकते हैं। अब सरकार के इस दावे की सच्चाई कितनी थी इसका पता लगाने के लिए धरातल पर पहुंचे पूर्वांचल के प्रमुख शहरों में से एक दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी।

मनोज तिवारी ने कालिंदी कुंज छठ घाट यमुना किनारे दौरा किया जहां उन्हें कुछ सनसनीखेज और संदिग्ध चीजें देखने को मिली जिसका वह दावा कर रहे हैं। मनोज तिवारी का दावा है कि जब वे भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह और भाजपा के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा सहित अन्य पदधिकारियों के साथ केजरीवाल के यमुना सफाई के दावों की पड़ताल करने ग्राउंड पर पहुँचे तो वहां अमोनिया फास्फोरस का सफेद झाग तैरता हुआ दिखाई दिया जो कि केजरीवाल सरकार के दावों की पोल खोल रहा था। लेकिन अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा यमुना के झाग को छुपाने के लिए जहरीले केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है ताकि झाग को छिपाया जा सके।

तिवारी ने आरोप लगाया कि लगभग 50000 लीटर जहरीला केमिकल हमने जब्त किया है और पुलिस को इस बारे में शिकायत भी दर्ज करा दिया गया है। केमिकल डालने वालों में जलबोर्ड के अधिकारी और केजरीवाल के अपने लोग थे जिसकी जानकारी वहाँ खड़े लोगों ने दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया को झाग न दिखे इसके लिए केमिकल का इस्तेमाल केजरीवाल सरकार द्वारा कराया जा रहा है। केजरीवाल को जब 8 सालों बाद यमुना प्रदूषण की याद आई है तो वह नेचुरल लैंडफिल साइट देखने चले गए ताकि उनकी नामकियों को ना देखा जा सके। लेकिन जीवन देने का वायदा करके केजरीवाल आज दिल्लीवालों को मौत के मुँह में धकेलने का काम किया है।

इस मामले के सामने आने के बाद भाजपा ने केजरीवाल सरकार को गुजरात के साबरमती फ्रंट रिवर से सिख लेने की नसीहत दे डाली। भाजपा का आरोप है कि पिछले 8 सालों से जिस प्रदूषण का खात्मा करने के लिए सरकार जोर शोर से विज्ञापन कर रही है दरअसल वह सिर्फ दिखावा है क्योंकि प्रदूषण इनके लिए कोई मुद्दा ही नहीं है। 2013 से केजरीवाल सरकार यह दावा करती आ रही है कि वह पांच सालों में यमुना की सफाई कराकर सबको डुबकी लगवाएंगी लेकिन आज 2022 खत्म होने को है और इन आठ सालों में यमुना बद से बदतर हो गई है। आज केजरीवाल प्रदूषण की गम्भीरता को समझते तो महापर्व छठ पूजा के समय वह यमुना किनारे होते ना कि सिर्फ झूठे वायदों के आधार पर अपना प्रचार कर रहे होते।

भाजपा का यह भी आरोप है कि अरविंद केजरीवाल का हर साल एक वीडियो वायरल होता है जिसमें वे कहते हैं कि अगले पांच सालों में यमुना साफ कर दूंगा और आपसब के साथ जाकर उसमें मैं खुद डुबकी लगाऊंगा। लेकिन ये बातें 2013 से चली आ रही है और अभी तक वे कुछ भी नहीं कर पाए हैं। छठ महापर्व के आने से केजरीवाल को पता था कि उनका यमुना सफाई के दावे का पोल एक बार फिर से सबके सामने खुल जाएगा इसलिए उन्होंने लैंडफिल साइट का मुद्दा उठा दिया जबकि एमसीडी ने लगातार उसपर काम कर 60 फिट नीचे करने का अभूतपूर्व कार्य किया है।

हालांकि इस बारे में अभी तक केजरीवाल सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं दिया गया है और ना ही इसका खंडन किया गया है। लेकिन आज से चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुवात होने पर राजनैतिक विचारधारा भी हावी हो चुकी है। यमुना आज भी दिल्लीवासियों के लिए समस्या बनी हुई है जबकि केजरीवाल सरकार चाहे जितने भी दावे कर लें लेकिन सर्वे में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि 80 फीसदी यमुना दिल्ली में एंट्री करते ही प्रदूषित होती है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: