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एक बार फिर से यमुना सफाई बना चुनावी मुद्दा, केजरीवाल के वायदें पर भाजपा की प्रतिक्रिया

यमुना सफाई, ऐसा लगता है चुनाव का पर्यायवाची बन चुका है। जब भी दिल्ली में चुनाव की सुगबुगाहट होती है, चुनाव के मायने बदलकर यमुना सफाई हो जाता है। एक बार फिर ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। केजरीवाल ने फिर से ट्वीट कर यमुना सफाई की बात को छेड़ दिया है। इसके बाद ही एक बार फिर से राजनीति शुरु हो गई है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक बार फिर से छठ पूजा और चुनाव आते ही केजरीवाल अपना पुराना राग अलापना शुरु कर दिया है। उन्हें एक बार फिर से यमुना मां की सफाई की याद आने लगी है। केजरीवाल साल 2014 से लेकर अब तक अनगिनत बार यमुना मां की सफाई को लेकर घोषणाएं चुके हैं, लेकिन यमुना मां की स्थिति पहले से भी ज्यादा बदतर होती जा रही है और अरविंद केजरीवाल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

आदेश गुप्ता ने कहा कि यमुना लगभग 80 फीसदी प्रदूषित दिल्ली में होती हैं। जबकि यमुना का सिर्फ 2 फीसदी हिस्सा ही दिल्ली के अंदर से होकर गुजरता है। हरियाणा से प्रवेश करते वक्त यमुना पूरी तरह साफ होती है लेकिन दिल्ली से जब होकर गुजरती है तो यह 80 फीसदी प्रदूषित हो जाती है। अगर यमुना नदी को देखा जाए तो उसमें भारी मात्रा में सफेद झाग नजर आते हैं। वह कुछ और नहीं बल्कि पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ने की वजह से बनने वाले झाग हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने साल 2020 तक केजरीवाल सरकार को यमुना की सफाई के लिए 673 करोड़ रुपये दिए, लेकिन केजरीवाल ने यमुना को थेम्स की जगह नाला बनाकर छोड़ दिया है।

आदेश गुप्ता ने कहा कि एसटीपी प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 2409 करोड़ रुपये को अपनी राजनीतिक पर्यटन में पानी की तरह बहा दिए और आज जब छठ पूजा नजदीक आया है और चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है तो केजरीवाल फिर से यमुना साफ करने की बात करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि 26 सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट में से 16 एसटीपी प्लांट पूरी तरह से फेल हैं जबकि 22 बड़े ड्रेन में से 14 ऐसे ड्रेन हैं जिससे 60 से 70 फीसदी गंदा पानी सीधा यमुना में जाता है और प्रदूषण होता लेकिन उसको रोकने के लिए केजरीवाल ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अब पूरा मामला शुरु हुआ केजरीवाल के एक ट्वीट से। ट्वीट कर केजरीवाल ने लिखा यमुना के घाटों पर पहले की तरह छठ पूजा मनायी जायेगी। सभी अधिकारियों को आदेश दिये गये हैं कि यमुना प्रदूषित ना हो, ये सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रबंध किए जाएँगे। जबकि पहले की बात करे यानि ठीक पिछले साल की तो केजरीवाल सरकार ने छठ पूजा पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी लेकिन जब पूर्वांचल वासियों की ओर से इस बारे में विरोध किया गया तो सरकार ने छठ पूजा मनाने की अनुमति दी।

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