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तो क्या रोहित शर्मा के कप्तान बनने के बाद टीम इंडिया की फिटनेस और फील्डिंग दोनों का लेवल कम हुआ है

Indian cricket team fitness level
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रोहित शर्मा की कप्तानी में फिलहाल टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में होने वाली टी20 वर्ल्ड कप के लिए पहुँच गई है। लेकिन फिलहाल टीम इंडिया के साथ कई समस्या है। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए इंडिया में टी20 सीरीज से उम्मीद लगाई जा रही थी कि टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप की बची हुई तैयारियां पूरी कर लेगा लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि ये दोनों सीरीज ने टीम इंडिया के कई सवालों का एक गुब्बारा छोड़ दिया है जिसका हल शायद टीम इंडिया ढूंढ नहीं पा रही है और यह फिलहाल टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी समस्या है।

टीम के पास अभी फिलहाल सबसे बड़ी समस्या है खिलाड़ियों का फिटनेस और फील्डिंग का स्तर। फील्डिंग को लेकर तो टीम इंडिया अब ट्रोल होती जा रही है। शिखर धवन की अगुवाई में चल रहे साउथ अफ्रीका के खिलाफ़ टीम इंडिया के पहले वनडे मैच में खिलाड़ी लगातार कैच छोड़ रहे थे और बॉल बॉय के फील्ड के बाहर शानदार कैच पकड़ने के बाद सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के खिलाड़ियों को काफी ट्रोल किया गया। लेकिन फिलहाल यहां समस्या रोहित शर्मा की टीम को भी है। आखिर जिस स्तर का फील्डिंग है उसके हिसाब से टीम इंडिया से वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद कैसे किया जा सकता है।

अब अगर बात करें टीम इंडिया की फील्डिंग की तो टीम इंडिया ने हाल ही में कई मैच खराब फील्डिंग के कारण गंवाए हैं. एशिया कप 2022 में भी फाइनल में नहीं पहुंच पाने का यह एक अहम कारण रहा था। एशिया कप के सुपर-4 मुकाबलों में भारत ने पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ कुछ अहम कैच टपकाए थे। यही सिलसिला अभी भी जारी है। इस साल टी20 इंटरनेशनल में भारतीय टीम फील्डिंग के मामले में दूसरी सबसे खराब टीम रही। इस साल भारत ने T20 में 25% कैच ड्रॉप किए। इस मामले में पाकिस्तान भी भारत से बेहतर स्थिति में है। पाक टीम ने 22% कैच ड्रॉप किए। एकमात्र श्रीलंका की फील्डिंग भारत से खराब रही, जिसने लगभग 26% कैच छोड़े।

इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि टीम इंडिया ने इस साल कुल 40 कैच छोड़े हैं। इसका क्या कारण क्या हो सकता है? इस सवाल आ जवाब कई सारे हैं लेकिन उसका सबसे प्रमुख कारण है रोहित शर्मा के कप्तान बनते ही यो यो टेस्ट को हटाया जाना। रोहित शर्मा के कप्तान बनने के बाद यो यो टेस्ट को खत्म करने के बाद ऐसा लगा मानो अब फिटनेस पर कोई किसी का ध्यान नहीं है। और इसका रिजल्ट भी दिखने लगा है। भारत के पास अच्छे गन फील्डर का नहीं होना और टीम में तीन-तीन विकेटकीपर्स का खेलना खराब फील्डिंग की अहम वजहें हैं। अब हमारी टीम में गन (फुर्तिले) फील्डर नहीं है. सुरेश रैना, युवराज सिंह, रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी टीम में नहीं हैं। अब हम ‘वाउ- क्या फील्डर है’ जैसे शब्द तो सुन ही नहीं पाते हैं।

अमन पांडेय

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