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Salary crisis for teachers: दिल्ली के शिक्षकों के पास वेतन के लिए फंड की कमी, शिक्षको के वेतन कटौती नोटिस जारी के बाद मचा हाहाकार

Salary crisis for teachers
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केजरीवाल सरकार और उनकी शिक्षा मॉडल, बोले तो दूसरे देश तक इस बात की चर्चा है कि भारत के एक मुख्यमंत्री ने शिक्षा में कुछ अलग काम किया है। केजरीवाल के अनुसार, सिंगापुर की बैठक से भी उन्हें दिल्ली शिक्षा मॉडल की यूएसपी समझाने के लिए बुलावा आया था लेकिन केंद्र सरकार सिर्फ इसलिए नहीं जाने दी कि कही केजरीवाल की तारीफ ना हो जाए। लेकिन अब जो मामला सामने आया है वह इस पूरे शिक्षा मॉडल की पोल खोल रहा है।

दरअसल, दिल्ली के द्वारका स्थिति दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी ने एक नोटिस जारी किया है। नोटिस कॉलेज के प्रिंसिपल की ओर से जारी किया गया है और इसमें फंड की कमी की बात कही गई है। नोटिस के अनुसार, दिल्ली सरकार के पास फंड की कमी है। इसलिए सहायक प्रोफेसर का 30,000 रुपये और प्रोफेसर का 50,000 रुपये जुलाई महीने का काटा जा रहा है और जैसे ही फंड आ जाएगा ये काटे हुए पैसे भी लौटा दिए जाएंगे।

इस नोटिस के बाद अब विपक्षी पार्टियों का हमला शुरु हो गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की ओर से दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर सवाल खड़े करते हुए कहा गया कि आखिर दिल्ली के शिक्षा फंड कहां लूटा दिया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने भी ट्वीट कर सवाल किया कि

शिक्षा का ढिंढोरा तो खूब पीटते हो आप केजरीवाल जी, आपसे सवाल कुछ भी पूछो जवाब आपका बस शिक्षा मॉडल होगा। ये बताओ कि दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज में शिक्षकों का वेतन क्यों नहीं दे रहे हो? फंड की कमी.. राजनीतिक पर्यटन, प्रचार-प्रसार के लिए तो बहुत पैसा है शिक्षकों के लिए क्यों नही?

राजनीति का शुरु होना स्वाभाविक है। भाजपा के ट्वीट के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने भी ट्वीट कर सवाल दाग दिए। अनिल चौधरी ने ट्वीट कर लिखा,
दिल्ली का सरप्लस रोजगार बजट झूठ का पुलिंदा है क्योंकि केजरीवाल सरकार के सीधे नियंत्रण वाले कॉलेजों को वेतन देने के लिए उनके पास फंड नहीं है।

DUTA अध्यक्ष एके बागची ने बयान जारी कर कहा कि फंड के अभाव में वेतन में देरी हो रही है। दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज समेत 12 कॉलेजों में पिछले 4 साल से शिक्षकों के वेतन में कटौती हो रही है या देरी से पेमेंट हो रहा है। एक साल में हमने 4-6 बार प्रदर्शन किया है। मेडिकल बिल का भुगतान नहीं किया जा रहा है। नॉन-टीजिंग स्टाफ को भी दिक्कत हो रही है। इस कॉलेज को दिल्ली सरकार की ओर से 100 प्रतिशत फंडिग होती है और इसकी स्थापना 1990 में की गई थी।

अभी हाल ही में विदेशी अखबारों में भी केजरीवाल के शिक्षा मॉडल की खबर छपी थी जिसको साक्ष्य बनाकर नई आबकारी नीति को वापस लेने और उसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था तो केजरीवाल के विधायक, प्रवक्ता और अन्य मंत्री सभी उस पेपर की कटिंग को दिखाकर आबकारी नीति पर बोलने की बजाय शिक्षा नीति का गुणगान कर रहे थे लेकिन अब इस नोटिस के बाद केजरीवाल और उनकी सरकार को दूसरे सिरे से सोचने की जरुरत होगी।

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