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केजरीवाल पर एक और भ्रष्टाचार का आरोप, अब मामला शिक्षा के क्षेत्र में आकर फंस गया है।

BJP Alleges Corruption in Construction of Classrooms
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केजरीवाल सरकार और आम आदमी पार्टी इस समय दिल्ली में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के लिए सड़कों पर है। पिछले दस दिनों से लगातार आरोप और घोटालों की बात चल रही है। भाजपा का आरोप है कि भ्रष्टाटार की सीरीज केजरीवाल दिल्ली में चला रहे हैं। आज प्रेसवार्ता कर भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कई आरोप लगा दिए। चुकी अभी हाल ही में जब केजरीवाल सरकार पर नई आबकारी नीति के तहत करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप भाजपा लगा रही थी तो केजरीवाल ने कहा था कि न्यूयार्क के सबसे बड़े अखबार में दिल्ली की बेहतरीन शिक्षा की तारीफ हुई है, जो भाजपा को बर्दास्त नहीं हो रहा है। इसलिए वे अनाप-शनाप बातें कर रही है।

शिक्षा की बात करते-करते भाजपा ने एक खुलासा किया है। दरअसल, भाजपा द्वारा 25 जुलाई 2019 को स्कूलों में बने कमरों के पीछे भ्रष्टाचार की जांच के लिए सीवीसी को पत्र लिखकर इसकी जांच की मांग की गई थी। जिसके बाद सीवीसी ने 17 फरवरी 2020 को केजरीवाल सरकार के पास कार्रवाई से परिचय कराने के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन सरकार उसे बिना कोई जवाब दिए 30 महीनों तक दबाए रखी। इस बात की जिक्र खुद सीवीसी की रिपोर्ट में की गई। ‘बब्बर ऑफ बब्बर’ नाम के आर्किटेक्ट जो सत्येन्द्र जैन के बेहद करीबी हैं, को यह पूरी जिम्मेदारी दी गई थी कि वह स्कूलों में कमरे बनवाएं।

अब स्कूलों में कमरे बनें या नहीं या फिर जो बनें उसमें कितने करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया, इन सभी सवालों का जवाब सीवीसी की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि स्कूलों में कमरे बनाने के लिए 989 करोड़ रुपये सैंक्शन किया गया था, 860 करोड़ रुपये के टेंडर अमाउंट दिया गया और खर्च कर डाले 1315 करोड़ रुपये। केजरीवाल ने स्कूलों में बनाए गए टॉयलेट को भी कमरों में गिनती कर पेमेंट करवा दिया। जबकि उसमें भी झूठ बोला कि कुल 6133 टॉयलेट बनाए गए हैं, लेकिन जांच के बाद उनकी संख्या सिर्फ 4027 निकली।

शिक्षा की बात उस समय हुआ जब उपराज्यपाल ने केजरीवाल की भ्रष्ट राजनीति की पोल खोलते हुए 47 फाइलों को वापस कर दिया क्योंकि उसमें केजरीवाल के हस्ताक्षर ही नहीं थे। उपराज्यपाल ने भी कहा कि आखिर केजरीवाल अपनी जिम्मेदारियों से कब तक बचेंगे। सीवीसी के बार-बार पूछे जाने पर भी केजरीवाल सरकार ने आर्किटेक्ट के बारे में बताने से इंकार करती रही। कक्षा बनाने के लिए केजरीवाल सरकार ने 194 स्कूल की पहचान की थी जिसमें से 53 स्कूलों में कोई काम ही नहीं हुआ, लेकिन टेंडर का पैसा 860 करोड़ से बढ़कर 1315 करोड़ रुपये हो गया।

आरोप तो यह भी है कि नजफगढ़ के एक स्कूल में 40 बच्चे ही हैं लेकिन वहां 12 कमरे बनाने की बात पेपर में दिखाए गए। जबकि नियम कहता है कि एक कमरे बनवाने के लिए कम से कम 50 बच्चों का होना जरुरी है। ऐसे में 12 कमनों के लिए कम से कम 600 बच्चों की जरुरत होगी लेकिन नजफगढ़ में सिर्फ और सिर्फ 40 बच्चे ही हैं।

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