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सिसोदिया के लिए जारी लुक आउट सर्कुलर क्या होता है और क्या इसमें गिरफ्तारी तय है, जान लीजिए

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सीबीआई छापेमारी करने पहुँची थी दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर और इसके अलावा 21 अन्य ठिकानों पर भी। इस रेड में सिसोदिया और उनके परिवार ने पूरा सहयोग दिया और साथ ही सिसोदिया ने इस बात की भी जानकारी दी कि सीबीआई के जितने ऑफिसर्स थे वे सभी बहुत ही हम्बल और अच्छे व्यवहार के थे। ये सब हो ही रह था कि आज सिसोदिया का ट्वीट में भाषा बदला और उन्होंने लिखा कि

आपकी सारी रेड फैल हो गयी, कुछ नहीं मिला, एक पैसे की हेरा फेरी नहीं मिली, अब आपने लुक आउट नोटिस जारी किया है कि मनीष सिसोदिया मिल नहीं रहा। ये क्या नौटंकी है मोदी जी?
मैं खुलेआम दिल्ली में घूम रहा हूँ, बताइए कहाँ आना है? आपको मैं मिल नहीं रहा?


सिसोदिया के इस ट्वीट से कई सारी खामियां और जानकारियों का अभाव नज़र आता है। इसलिए इनके ट्वीट पर टिपण्णी करने की जगह पहले समझना होगा कि आखिर लुक आउट सर्कुलर यानी LOC है क्या? लुक आउट सर्कुलर यानी LOC को लुक आउट नोटिस के नाम से भी जाना जाता है। लुक आउट सर्कुलर किसी भी व्यक्ति को विदेश यात्रा करने से रोकता है। न कि देश या शहर में। इस नोटिस के जारी होने के बाद आरोपी के देश छोड़कर जाने पर पाबंदी लग जाती है।

लुक आउट नोटिस का इस्तेमाल इंटरनेशनल बॉर्डर जैसे- एयरपोर्ट, समुद्री क्षेत्र और बंदरगाहों पर इमिग्रेशन जांच के लिए किया जाता है। लुक आउट नोटिस जारी होने का मतलब है कि इमिग्रेशन अफसर ऐसे व्यक्ति को एयरपोर्ट पर ही रोक सकते हैं। या उन्हें हिरासत में ले सकते हैं।पुलिस कुछ मामलों में देश के बाहर किसी व्यक्ति के जाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। ऐसा तब होता है जब वह व्यक्ति संदिग्ध हो और इस बात की आशंका हो कि वह जांच में शामिल होने से बचना चाह रहा है। अब सवाल यह है कि इसे जारी कौन करता है?


लुक आउट नोटिस को ऑथोराइज्ड ऑफिसर ही जारी कर सकता है। डिप्टी सेक्रेटरी से नीचे का अफसर इसे जारी नहीं कर सकता। किसी राज्य में जॉइंट सेक्रेटरी से पद के नीचे का अधिकारी इसे नहीं जारी कर सकता है। किसी जिले का कलेक्टर या SP, CBI या ED जैसी जांच और सिक्योरिटी एजेंसियों के डेजिगनेटेड अफसर के साथ ही इंटरपोल के डेजिगनेटेड अफसर भी इसे जारी कर सकते हैं। सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस और मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में एडिशनल डायरेक्टर रैंक से नीचे का अधिकारी इसे नहीं जारी कर सकता है। इसके अलावा 2018 के पहले सरकारी बैंक के प्रमुखों को यह अधिकार नहीं था लेकिन फिर उन्हें यह दे दिया गया ताकि वे सीधे विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की मांग कर सकते हैं। यानी सरकारी बैंक के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ रैंक के अफसर इसकी मांग कर सकते हैं।


अब ऐसा नहीं है कि अगर किसी एक व्यक्ति विशेष पर इसे लागू कर दिया गया तो यह आजीवन उस व्यक्ति पर चलेगा बल्कि लुक आउट नोटिस को सिर्फ उसी अधिकारी के रिक्वेस्ट पर ही संशोधित या वापस लिया जा सकता है जिसकी रिक्वेस्ट पर इसे जारी किया गया था। लेकिन फिर इसमें एक अड़चन आने लगी यानी प्रतिशोध वाली बातें होने लगी। जिसके बाद इसके नियम में बदलाव किया गया और फिर लुक आउट नोटिस को कोर्ट में चैलेंज करने की बात भी पारित की गई। यानी कोर्ट इसे रद्द भी कर सकता है और आरोपी को राहत दे सकता है। अब सबसे अहम सवाल कि क्या LOC के जारी होते ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है?


इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। मतलब यह जरूरी नहीं है। लुक आउट नोटिस कई प्रकार का होता है। अक्सर यह सिर्फ आरोपी को देश से बाहर यात्रा करने से रोकने या देश में आने से रोकने के लिए जारी किया जाता है। इसका मकसद ऐसे अपराधियाें के बारे में कंसर्न्ड जांच एजेंसियों को संबंधित अपराधी के बारे में सूचना देने से होता है। इसके अलावा इसमें आरोपी व्यक्ति को स्थानीय पुलिस हिरासत में भी ले सकती है और कई मामलों में यह गिरफ्तारी भी हो सकती है।


इसलिए अगर बात सिसोदिया की ट्वीट की करें तो ट्वीट के जरिये जो समझाने की कोशिश सिसोदिया कर रहे हैं वह गलत है। क्योंकि उन्हें सिर्फ विदेश जाने की मनाही है न कि देश में घूमने की। उनपर सिर्फ आरोप है और वह भ्रष्टाचार का इसलिए उन्हें गिरफ्तार करने की भी प्रशासन जल्दबाजी नहीं दिखाने वाला। राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी कह रहे हैं कि मनीष सिसोदिया जो दिल्ली के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा दे रहे हैं। सरकारी स्कूलों में वातानुकूलित कमरे बनवाए, स्वीमिंग पूल बनवाए, हॉकी के ग्राउंड बनवाए हैं। पिछले पांच वर्षों में इंटर का परिणाम प्राइवेट स्कूलों से बेहतर रहा है। उन मनीष सिसोदिया को नरेंद्र मोदी की सरकार ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। उन्होंने पूछा है कि सरकार द्वारा लुकआउट नोटिस किस कारण से जारी की गई, लुकआउट नोटिस जारी करने के पीछे की वजह है?

संजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार को इतनी हताशा कि 14 घंटे छापा मरवाए मनीष सिसोदिया के घर पर। सारी जांच करा ली कोई संपत्ति नहीं मिली, कोई रुपये की बरामदगी नहीं हुई, और कोई संपत्ति से जुड़ा कागज नहीं मिला। देश के 31 ठिकनों पर छापामारी की। अब मोदी जी के पास बताने के लिए कुछ नहीं है। आरोप लगाया है कि कुछ नहीं मिला तो सरकार ने ड्रामा रचने के लिए मनीष सिसोदिया के खिलाफ लुकआउट नोटिसा जारी कर दिया है। संजय सिंह ने कहा कि लुकआउट नोटिस उसके खिलाफ जारी किया जाता है जो व्यक्ति भगौड़ा हो, जो जांच में सहयोग न करता हो और जिसके भागने की संभावना हो।

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