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Delhi: रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, दिल्ली में लगे 26 एसटीपी प्लांट्स में से 16 हैं बेकार

16 of 26 sewage plants in Delhi do not meet standards: Study
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नई दिल्ली, 13 अगस्त। एसटीपी प्लांट जो पानी को शुद्धिकरण के लिए काम आता है। दिल्ली में भी केजरीवाल सरकार दिल्ली में 26 सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) के होने का दावा करती है। लेकिन इसको लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी डीपीसीसी की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया कि 26 एसटीपी प्लांट में से सोलह वर्तमान में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। जून 2022 में एकत्र किए गए नमूनों का विश्लेषण के बाद इस बात का खुलासा हुआ।

जो एसटीपी जो वांछित पाए गए, उनमें कोरोनेशन पिलर एसटीपी, कोंडली एसटीपी और नया केशोपुर प्लांट सहित अन्य प्लांट का शामिल हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षण किए गए सात अलग-अलग मापदंडों में से अधिकांश संयंत्र टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (TSS), बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), डिसॉल्व्ड फॉस्फेट, केमिकल ऑक्सीजन डिमांड और अमोनिकल नाइट्रोजन मापदंडों के मानकों को पूरा करने में विफल रहे।

दिल्ली जल बोर्ड द्वारा संचालित इन एसटीपी से पानी या तो यमुना में छोड़ा जाता है या जल निकायों को पुनर्जीवित करने के लिए उपयोग किया जाता है। उपचारित पानी में जहरीले तत्वों से यमुना प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। DPCC जुलाई 2019 से हर महीने दिल्ली के STPs पर डेटा एकत्र कर रहा है। और फिलहाल जो डेटा है वो 9 जून से 15 जून के बीच नमूने एकत्र किए गए है। इस रिपोर्ट को सरकार के यहां सौंप दी जाती है जिससे वे इस पर ध्यान दें और सुधार के रूप में कोई उचित कदम उठाए लेकिन आज तक इसपर सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया। रिपोर्ट मे निलोठी, नजफगढ़ और नए कोंडली एसटीपी को सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला पाया गया, जो प्रत्येक पैरामीटर के लिए निर्धारित मानकों को 2-6 गुना तक खराब है।

मानकों के अनुसार, TSS और BOD का स्तर 10 mg/l या उससे कम होना चाहिए, COD 50 mg/l या उससे कम होना चाहिए और अमोनिकल नाइट्रोजन और पफॉस्फेट क्रमशः 5 mg/l और 2 mg/l से कम होना चाहिए। इसके अलावा, डीपीसीसी पानी के पीएच रीडिंग (6.5-9.0) के साथ आउटलेट रीडिंग में तेल/ग्रीस सामग्री (10 मिलीग्राम/ली या उससे कम) की भी जांच करता है। उदाहरण के लिए, निलोठी में, आउटलेट रीडिंग ने 10 मिलीग्राम/ली के मानक, 132 मिलीग्राम/ली की सीओडी एकाग्रता और 8.9 मिलीग्राम/ली और 7.2 के अमोनिकल नाइट्रोजन और भंग फॉस्फेट रीडिंग की तुलना में टीएसएस एकाग्रता 60 मिलीग्राम/ली दिखाया। क्रमशः मिलीग्राम / एल। नजफगढ़ में उपचार के बाद बीओडी का स्तर 38 मिलीग्राम/लीटर और सीओडी का स्तर 108 मिलीग्राम/लीटर था। कोंडली में, उपचार के बाद टीएसएस रीडिंग 82 मिलीग्राम/लीटर थी, जो मानक सीमा से लगभग आठ गुना अधिक थी।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि बोर्ड द्वारा संचालित संयंत्रों को 1975 और 2011 के बीच उनके निर्माण के समय निर्धारित पुराने मापदंडों के अनुसार डिजाइन किया गया है। उनके बीओडी/टीएसएस मानक 20/30 और 30/50 मिलीग्राम/लीटर हैं। अब, डीपीसीसी ने बीओडी और टीएसएस के लिए कड़े मानदंड निर्धारित किए हैं जिसके लिए डीजेबी अपने मौजूदा एसटीपी को पांच पैकेजों में अपग्रेड कर रहा है। दो पैकेजों के उन्नयन के लिए आशय पत्र पहले ही दिया जा चुका है और एक तिहाई को आगामी बोर्ड बैठक में मंजूरी दी जाएगी। सभी मौजूदा एसटीपी को 18-24 महीनों के भीतर अपग्रेड किया जाएगा। दिल्ली सरकार अभी तक इस ने रिपोर्ट निष्कर्षों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

इसी पर सवाल खड़े करते हुए भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि हम इसको लेकर खुद ग्राउंड लेवल पर जाएंगे और सिटीपी प्लांट को विजिट करेंगे। इसके बाद सीएम केजरीवाल के आवास पर धरना देंगे ताकि केजरीवाल सरकार दिल्ली की जनता को प्रदूषित और बदबूदार पानी परोसना बन्द करें।

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