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पंजाब में इन्हें नहीं मिलेगा मुफ्त बिजली, मान सरकार की नियम और शर्ते आपको अवाक कर देगी

Shocker: Punjab imposes conditions on power subsidy for SC, BC, BPL categories
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नई दिल्ली, 24 जुलाई। देश हित में भले ठीक हो या न हो लेकिन जनता को मुफ्त सुविधाओ का मिलने का दौर शुरू हो चुका है। यह दौर हालांकि पहले भी था लेकिन पहले यह लोगों और राजनीतिक पार्टियों पर पूरी तरह से हावी नहीं था। अब यह प्रचलन बन गया है। दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में भी यह मुफ्त बिजली देने का वायदा किया था। वो भी दो महीने में पूरे 600 यूनिट। अब अपनी इसी योजना का पंजाब सरकार ने विवरण पेश किया है, लेकिन इस सुविधा का लाभ लेने के लिए शर्तों की भरमार लगा दी है। एससी, बीसी, बीपीएल या स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए राइडर्स लगाए गए हैं।

पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने एक सर्कुलर में यह स्पष्ट किया है कि इन चार श्रेणियों में आने वाले ऐसे लोग जो आयकर देते हैं, मंत्रियों या पूर्व मंत्रियों से नाता रखते हैं, जिन्हें 10,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिल रही है, या फिर डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ता या आर्किटेक्ट इसके हकदार नहीं होंगे। पीएसपीसीएल ने घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 600 यूनिट बिजली सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एक स्व-सत्यापित फॉर्म भरने के लिए कहा है।

फॉर्म में कहा गया है कि SC/BC/BPL/स्वतंत्रता सेनानी उपभोक्ता, जो मंत्री हैं या एक ही छत के नीचे रहने वाले उनके रिश्तेदार हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। महापौर या पूर्व महापौर और पूर्व पार्षद भी सब्सिडी के हकदार नहीं होंगे। मतलब ये कि सीधे शब्दों में अगर इसे समझा जाये तो आम जनता जिनको सच में इसकी जरूरत है उसे ही यह मिलने वाला है। इस मुफ्त बिजली देने के पीछे पीएसपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जो बात कही वह सबसे सार्थक है। अधिकारी के अनुसार, सभी उपभोक्ता, चाहे उनकी जाति या वित्तीय पृष्ठभूमि कुछ भी हो हर दो महीने में 600 यूनिट मुफ्त बिजली पाने के पात्र हैं। मतलब ये कि जाति धर्म से ऊपर उठकर आर्थिक आधार पर इसका वितरण किया जाएगा जो कि एक नई राजनीति की शुरुवात है। क्योंकि अभी तक जाति विशेष को ध्यान में रखकर ही अधिकतर योजना बनती रही हैं और उसे लागू किया जाता रहा है।

हालांकि जिस तरह से दिल्ली में लोगों को शिकायत रहती है ठीक उसी तरह इसमें भी एक कमी है और आने वाले समय में उसकी शिकायत भी लोग भगवंत मान सरकार से जरूर करेंगे। नियम के मुताबिक यदि किसी की खपत 600 यूनिट से अधिक है तो उन्हें पूरा बिल देना होगा। हालांकि एससी, बीसी, बीपीएल या स्वतंत्रता सेनानी श्रेणियों के उपभोक्ताओं से केवल 600 यूनिट से अधिक की खपत वाली इकाइयों के लिए शुल्क लिया जाता है।

उपभोक्ताओं की इस श्रेणी के 600-यूनिट की सीमा से अधिक होने के बाद उन्हें अनिवार्य घोषणा करनी होगी। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले पीएसपीसीएल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बिजली सब्सिडी जरूरतमंदों तक पहुंचे और सरकारी विशेष रियायत पाने वाले इसका दुरुपयोग न करें।

दरअसल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा वार्षिक सब्सिडी बिल 4,000 करोड़ रुपये था, लेकिन अब प्रति माह मुफ्त 300 यूनिट की घोषणा के साथ यह बढ़कर 7,200 करोड़ रुपये हो जाएगा। जबकि शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि पीएसपीसीएल अधिसूचना ने सरकार की एक और धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। अकाली दल का कहना है कि इस योजना कि वास्तविकता यह है कि बड़ी संख्या में लोग या तो सरकारी कर्मचारी हैं या पेंशनभोगी या फिर डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट या अन्य पेशेवर हैं। इसलिए पंजाब के अधिकतर लोगों को इसका लाभ नहीं मिलने वाला है।

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