शुक्रवार, अगस्त 19Digitalwomen.news

जिस दिल्ली में केजरीवाल सरकार वर्ल्ड क्लास शिक्षा मॉडल की बात करती है उसी दिल्ली के सबसे पुराने लाइब्रेरी में लगा ताला

Hardayal Library
JOIN OUR WHATSAPP GROUP

दिल्ली का चांदनी चौक, जो कि दिल्ली की एक भीड़-भाड़ इलाका है और इसी इलाके में स्थिति है 1860 में स्थापित हरदयाल मुनिसिपल हैरिटेज पब्लिक लाइब्रेरी। इस लाइब्रेरी को लेकर पिछले दो दिनों से बवाल मचा हुआ है। यह लाइब्रेरी इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसके कर्मचारियों को पिछले 18 महीने से सैलरी नहीं मिली है जिससे कर्मचारी धरने पर हैं।

यह दिल्ली का सबसे पुराना पुस्तकालय है। पुस्तकालय में 1.7 लाख से ज्यादा किताबें, पत्र व पत्रिकाएं हैं, जिनमें से 8,000 दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। यहां रोजाना बड़े-छोटे सैकड़ो अखबार आते हैं। सैकड़ों लोग यहां पढ़ने के लिए आते हैं। कई शोधार्थी ज्ञान की तलाश में यहां आते हैं। यह पुस्तकालय हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है। इसकी 35 अलग शाखाएं हैं, जिनमें से छह दक्षिणी दिल्ली और चार पूर्वी दिल्ली में स्थित हैं। इन्हें चलाने के लिए एमसीडी से पैसा मिलता है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है, जब इसे इसके कर्मचारियों ने ही बंद कर दिया है।

आप विधायक दुर्गेश पाठक ने इस लाइब्रेरी की सचिव पूनम पाराशर पर कई आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पूनम पाराशर ने 10 लोगों की गैर कानूनी रूप से नियुक्ति की गई है। उसके पश्चात इन्हें अस्थायी करके अपने बेटे को स्थाई रुप से रख लिया। जिसके जवाब में पूनम पाराशर का कहना है कि मेरा कार्यकाल 13 सितम्बर, 2021 को हुई और यह नियुक्तियां मेरे कार्यकाल से पहले ही हो चुकी थीं। आप विधायक बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने दुर्गेश पाठक को इस मुद्दे पर बहस खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर मेरा आरोप साबित हो जाएगा तो मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा नहीं तो दुर्गेश पाठक अपनी विधायकी से इस्तीफा दें।

दुर्गेश पाठक ने एक और आरोप लगाया कि पूनम पाराशर ने अपने पति पूर्व विधायक अनिल झा को गवर्निंग बॉडी का आजीवन सदस्य बना दिया है जिसके जवाब मे पूनम पाराशर ने दुर्गेश पाठक को मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान के अनुसार, प्रत्येक वर्ष गवर्निंग बॉडी का चुनाव पाठक सदस्यों में से कराया जायेगा। ऐसे में किसी के आजीवन सदस्यता की बात बिल्कुल तथ्यहीन और झूठी है।
पूनम पाराशर का कहना है कि एमसीडी का पैसा केजरीवाल सरकार द्वारा रोके जाने के कारण कर्मचारियों को पिछले 18 महीनों से सैलरी नहीं मिल पाई है। ऐसे में आज अगर कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो यह सिर्फ केजरीवाल सरकार की लापरवाही का नतीजा है। इतनी ही नहीं उन्होंने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया कि मुफ्त बिजली-पानी की ढ़िंढोरा पीटने वाले केजरीवाल को हमने कई बार पत्र लिखा ताकि लाइब्रेरी का बिजली-पानी का बिल माफ हो सके लेकिन केजरीवाल सरकार ने इस विषय में कोई संज्ञान नहीं ली। आज तक एक भी लाइब्रेरी न बनवा पाई केजरीवाल सरकार आज दिल्ली में स्थिति ऐसी कर दी है कि दिल्ली में 160 साल पुराने लाइब्रेरी में ताला लटकने की नौबत आ गई है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: