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दिल्ली विधानसभा:- स्कूल बंद पर हंगामा लेकिन विधायकों की सैलरी बढ़ने पर किसी ने नहीं खोली मुंह

Delhi MLAs salary hiked by 66%

नई दिल्ली, 4 जुलाई। दिल्ली में सोमवार से विधानसभा का दो दिवसीय मानसून सत्र शुरु हो चुका है। जलभराव समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही स्कूल एक बड़ी बहस का हिस्सा रहा। जिसमें नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने केजरीवाल सरकार पर सिर्फ इस साल 31 स्कूल बंद करने का आरोप लगाया जिसके जवाब में मनीष सिसोदिया ने इसे झूठा करार देते हुए कहा कि केजरीवाल सरकार सिर्फ स्कूल खोलने में विश्वास रखती है बंद करने में नहीं। इन्हीं मुद्दों के बीच वेतन भत्तों की जिक्र भी शुरु हो गई। मंत्री कैलाश गहलोत ने सदन में विधायकों, मंत्रियों, चीफ व्हिप, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और ललीडर ऑफ ऑपोजिशन के वेतन भत्ते में बढ़ोतरी का बिल मंत्री कैलाश गहलोत ने पेश किया।

नया प्रस्ताव क्या कहता है?

दिल्ली में विधायकों की सैलरी पहले 12 हज़ार रुपये थे जो अब बढ़ाकर 30 हज़ार रुपये कर दिए गए। सैलरी के बाद भत्तों की बात आती है तो उसमें भी बढ़ोतरी की गई है। सैलरी और सभी भत्ते मिलाकर अब दिल्ली के विधायकों को हर महीने 90 हजार रुपए मिलेंगे जो राशि अबतक 54 हजार रुपए थी। दिल्ली के विधायकों और मंत्रियों के वेतन में अंतिम बार बढ़ोतरी 2011 में हुई थी।

कुल पांच बिल सदन में किए गए पेश

सैलरी में बढ़ोतरी से जुड़े कुल 5 बिल आज सदन में पेश किए गए. इनमें मंत्रियों के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल, सदन के सदस्यों यानी विधायकों के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल, सदन के सदस्यों यानी विधायकों के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल, चीफ व्हिप के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल, विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल और नेता प्रतिपक्ष के वेतन और भत्ते में संसोधन का बिल शामिल हैं।



साल 2011 में दिल्ली विधानसभा के सदस्यों और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद केजरीवाल सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल यानि 2015 में ही केंद्र को वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तब वो मंजूर नहीं हुआ। इसके बाद जब केंद्र सरकार से सुझाव मिलने के बाद दिल्ली विधानसभा ने दोबारा वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा तो सरकार ने उसको मंजूरी दे दी। इस मौके पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि 1993 में जब दिल्ली विधानसभा का गठन हुआ था, तब से लेकर 2011 तक 18 साल में 5 बार सैलेरी बढ़ी यानी हर साढ़े तीन साल में विधायकों की सैलरी बढ़ी। अब 11 साल बाद सैलरी बढ़ रही है।

दिल्ली के विधायकों की तुलना देश के अन्य राज्यों राज्यों विधायकों से करें तो सैलरी में काफी अंतर मिलेगा। भारत में तेलंगाना पहला ऐसा राज्य है जहां विधायकों की सैलरी सबसे ज्यादा है। विधायकों को भत्तों को मिलाकर हर महीने 2.50 लाख रुपये सैलरी मिलती है जबकि सैलरी उन्हें सिर्फ 20 हज़ार रुपये ही मिलती हैं। लेकिन भत्तों के तौर पर हर महीने 2,30,000 रुपये मिलते हैं। दूसरे नंबर पर आता है उत्तराखंड जहां के विधायकों को हर महीने सैलरी और भत्ता मिलाकर 1.98 लाख रुपये मिलते हैं। इसके बाद हिमाचल में 1.90 लाख , हरियाणा में 1.55 लाख , बिहार में 1.30 हजार, राजस्थान में 1.42 लाख रुपये, आंध्र में 1,25,000 रुपये, गुजरात में 1,05,000 और उत्तर प्रदेश में 95,000 रुपये विधायकों को भत्ता और सैलरी मिलाकर दी जाती है। जबकि सबसे कम सैलरी त्रिपुरा में विधायकों को मिलती है। यहां हर महीने 48 हजार रुपये सैलरी और भत्ता मिलाकर दी जाती है।

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