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दिल्ली सरकार का एक और विभाग जांच के दायरे में, एसीबी करेगा जांच

Delhi: ACB to probe graft charges against PWD officials
Delhi: ACB to probe graft charges against PWD officials
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नई दिल्ली, 20 जून। सरकारी जांच एजेंसियों का इस वक़्त दिल्ली सरकार में मंत्री और केजरीवाल सरकार के अंतर्गत आने वाले विभाग पर लगातार नजरें बनी हुई है। एक-एक करके दिल्ली सरकार में मंत्री और उनके विभाग जांच के अंतर्गत आते जा रहे हैं। अभी दिल्ली में जांच एजेंसी सतेंद्र जैन की पूछताछ कर ही रही है कि अब एक नई मुसीबत केजरीवाल सरकार के सामने पीडब्ल्यूडी को लेकर आ गई है।

पीडब्ल्यूडी विभाग के ऊपर आरोप है कि कोविड के दौरान पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली में अस्थाई रूप से सात अस्पतालों का निर्माण किया था,जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि इनके निर्माण में 1256 करोड़ रुपये लगे थे जो कि भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। इसकी शिकायत जब उपराज्यपाल से की गई तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच एंटीकरप्शन जांच एजेंसी से कराने की मंजूरी दे दी है। उपराज्यपाल के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन और वर्तमान इंजीनियर के खिलाफ जांच करेगी।

कोरोना के दौरान पीडब्ल्यूडी ने जीटीबी अस्पताल, सरिता विहार, रघुवीर नगर, शालीमार बाग, किराड़ी, सुलतानपुरी और चाचा नेहरू अस्पताल गीता कॉलोनी में अस्थाई रूप से अस्पताल का निर्माण करवाया था। खुद पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि किसी ऊपरी दबाव में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर शशिकांत के रिटायरमेंट वाले दिन ही सैम इंडिया नाम की कम्पनी को अस्पताल निर्माण का कार्य सौप दिया। इस काम में स्ट्रक्चरल ट्यूब के दाम बढ़ने के नाम पर अस्पताल का पूरे लागत मूल्य में टेंडर नियमों को ताख पर रखकर पूरे 40 फिसदी की वृद्धि कर दी गई। आरोप तो यह भी है कि अस्थाई अस्पताल बनाने की परियोजना की मंजूरी बाद में दी गई थी लेकिन पीडब्ल्यूडी ने टेंडर पहले ही फ्लोट कर दिया।

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