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स्थापना दिवस आज बाबा नीब करौरी की तपोस्थली कैंची धाम में हर साल देश-विदेश से लाखों भक्त पहुंचते हैं

Uttarakhand : kainchi dham foundation day
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उत्तराखंड में एक स्थान ऐसा भी है जहां हर साल
देश-विदेश से लाखों भक्त पहुंचते हैं। लेकिन पिछले 2 सालों से कोरोना वायरस की वजह से यहां स्थापना दिवस नहीं मनाया गया। यह स्थान है कुमायूं के नैनीताल के पास में स्थित कैंची धाम। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह आश्रम धर्मावलंबियों के बीच कैंची धाम के रूप में लोकप्रिय है। मंदिर में बाबा नीब करौरी महाराज की तपोस्थली है। बाबा हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे। उनको मानने वाले उन्हें हनुमान जी का ही अवतार मानते हैं। कैंची धाम बाबा नीब करौरी के आश्रम की वजह से जाना जाता है। हर साल यहां 15 जून को धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला कैंची धाम के स्थापना दिवस को लेकर आयोजित होता है। इस बार 58वां स्थापना दिवस धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। ‌मेले में भाग लेने के लिए देश विदेश के एक लाख से अधिक श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचे हुए हैं। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में ब्राह्मण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा ने उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीब करौरी में कठिन तप करके स्वयं सिद्धि हासिल की। यही कारण हैं कि देश और दुनिया भर से लोग यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस धाम में किस्मत बदलने वाले बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा,फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकेरबर्ग और एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स भी बाबा के मुरीद रहे हैं। जॉब्स और जुकरबर्ग कैंची धाम आए थे। एप्पल के प्रोडक्ट का लोगो, वह भी बाबा के द्वारा ही दिया गया है। कैंची धाम में कई साल तक बाबा रहे। आखिरी में नीब करौरी बाबा ने महासमाधि के लिए वृंदावन को चुना। 11 सितंबर को बाबा ने वृंदावन में महासमाधि ली।

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