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दिल्ली की राजेन्द्र नगर विधानसभा सीट पर किसकी दांव है सबसे मजबूत

Analysis of voting patterns in Delhi Assembly election with special attention to Rajinder Nagar Bypoll
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नई दिल्ली, 10 जून। चुनाव का दौर चल रहा है। दिल्ली की राजेन्द्र नगर में राघव चड्ढा के राज्यसभा पहुँचने के बाद खाली हुई सीट पर राजनीतिक पार्टीयां अपनी-अपनी दांवे चल रही है। लेकिन सवाल है कि चुनाव से पहले हर एक पार्टी जितने का दांवा तो करती है, पर इसकी हकीकत कुछ और होती है। वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर यह कहा जाए कि राजेन्द्र नगर उपचुनाव में भाजपा के राजेश भाटिया और आम आदमी पार्टी के दुर्गेश पाठक के बीच सीधी टक्कर है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हालांकि कांग्रेस ने भी वहां की क्षेत्रीय नेत्री के रूप में पहचान रखने वाली प्रेम लता को अपना उम्मीदवार बनाया है। 23 जून को होने वाले चुनाव में पार्टियों द्वारा प्रचार अपने चरम पर है।

कौन लोग तय करते हैं राजेन्द्र नगर में अपना विधायक?

राजेन्द्र नगर में अगर देखा जाए तो पंजाबी और पूर्वांचवासी अधिकतर है। 40 फिसदी पंजाबी एवं सिख समुदाय और 25 प्रतिशत पूर्वांचवासी ही मिलकर उम्मीदवार की जीत तय कर देते हैं। कहा जाता है कि जिस पार्टी की पकड़ इन दो वर्गों के बीच है वह जितने में कामयाब होगी। पिछले 27 सालों के चुनावी परिणाम का इतिहास देखकर यह कह सकते है कि पहले यहां बीजेपी का दबदबा हुआ करता था लेकिन साल 2008 के बाद इस सीट का परिसीमन हुआ। इसके बाद पूर्वांचलियों की संख्या बढ़ने के बाद बीजेपी का दबदबा कम हुआ है। पिछले दो बार से इस सीट से आम आदमी पार्टी ही जीत रही है।

1993 से लेकर 2020 तक इस विधानसभा सीट पर 7 बार चुनाव हुए हैं। इसमें से चार बार बीजेपी ने जीत हासिल की है। 1993 में पहली बार बीजेपी के पूरनचंद त्यागी ने कांग्रेसी उम्मीदवार ब्रह्म यादव को हराया था। दूसरी बार 1998 में बीजेपी के पूरनचंद त्यागी ने कांग्रेस छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले ब्रह्म यादव को फिर से हराया था। 2008 में पहली बार कांग्रेस के रमाकांत गोस्वामी ने बीजेपी की आशा योगी को हराया था। साल 2013 में बीजेपी के आरपी सिंह ने पहली बार चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार विजेंद्र गर्ग को हराया। दो साल बाद ही हुए चुनाव में विजेंद्र गर्ग ने बीजेपी के आरपी सिंह को पटखनी देते हुए अपनी हार का बदला लिया। 2020 में आम आदमी पार्टी ने फिर यह सीट अपने नाम कर ली। लेकिन इस बार का चुनाव थोड़ा अलग होने वाला है। भाजपा के लिए जहां यह साख बचाने की बात है तो वही आम आदमी पार्टी के सामने मजबूत दावेदार भी है।

आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दुर्गेश पाठक की बात करें तो दुर्गेश पाठक गोरखपुर से चलकर सिविल सर्विस की तैयारी करने दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुँचे और साल 2011 में हुए जनांदोलन में अन्ना एंड कम्पनी के साथ कूद पड़े। फिर उनकी सबसे बड़ी पहचान साल 2015 विधानसभा चुनाव में हुई जब उन्हें 35 सीटों का प्रभारी बनाया गया और आम आदमी पार्टी उस 35 सीटों में से 34 सीट जितने में कामयाब हुई। विधानसभा जीतने के बाद दुर्गेश पाठक को साल 2017 तक पंजाब का प्रभारी बनाया गया। 34 वर्षीय दुर्गेश पाठक के खिलाफ एक मानहानि का केस भी है और वे साल 2020 में हुए चुनाव में करावल नगर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं जहां उन्हें भाजपा नेता मोहन सिंह बिष्ट से हार का सामना करना पड़ा था। दुर्गेश ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है।

भाजपा उम्मीदवार राजेश भाटिया पूर्व में पार्षद रह चुके हैं। वे दिल्ली भाजपा के महामंत्री भी थे। राजेंद्र नगर इकाई में युवा मोर्चा के पदाधिकारी के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले भाटिया उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान अपने समर्पित कार्यों से पार्टी नेतृत्व को प्रभावित किया। जिससे उन्हें करोल बाग जिले का अध्यक्ष भी बनाया गया। अपने कार्यों से अपनी पहचान बनाने वाले राजेश भटिया पंजाबी समुदाय से हैं इसलिए उन्हें इसका फायदा मिल सक्तज़ है।

58 वर्षीय ​कांग्रेस उम्मीदवार प्रेम लता जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखती हैं। वह इसी विधानसभा क्षेत्र के दसघरा गांव की रहने वाली हैं। प्रेम लता पूसा वार्ड से निगम पार्षद रह चुकी हैं। स्थानीय मुद्दों की जानकारी होने के साथ ही जमीनी स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन मजबूत है। 7वी तक पढ़ाई करने वाली प्रेम लता पेशे से समाज सेवी हैं। निर्वाचन आयोग के पास दाखिल हलफनामे के अनुसार प्रेम लता के खिलाफ किसी भी तरह का कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

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