सोमवार, जून 27Digitalwomen.news

सावित्री वट पूजा आज, जाने इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

Happy Vat Savitri Vrat 2022
JOIN OUR WHATSAPP GROUP

आज वट सावित्री की पूजा का पावन व्रत है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत के मौके सोमवारी अमावस्या के साथ-साथ शनि जयंती भी है। ज्योतिषों के मुताबिक ऐसा संयोग 30 साल बाद बन रहा है। इसके साथ ही सोमवारी अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग व सुकर्मा योग भी बन रहा है। शनि जयंती के साथ सुबह 7:12 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होकर 31 मई सुबह 5:08 मिनट तक रहेगा।

आज लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव को दूर करने के लिए लोग शनि जयंती का व्रत भी रख रहे हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार आज के दिन किए गए दान-पुण्य का कई गुना फल मिलता है।

वट सावित्री पूजा का महत्व:
वट सावित्री व्रत पूजा हर साल ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत रख वट वृक्ष की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं इस दिन वट सावित्री व्रत रख कर विधि विधान से पूजा करती हैं। उन्हें अखंड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है और इस दिन व्रत रहने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ के लिए व्रत रखती हैं। वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा, परिक्रमा करके पति के जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने और रक्षा सूत्र बांधने से पति की आयु लंबी होता है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।

मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवता वास करते हैं। इसलिए वृक्ष की पूजा करने से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। वहीं बरगद के वृक्ष पर हर वक्त माता लक्ष्मी का निवास होता है। इतना ही नहीं बरगद के पेड़ से लटकती हुई जड़ों को सावित्री के रूप में माना गया है। कहा जाता है कि मार्कंडेय ऋषि को भगवान कृष्ण ने बरगद के पत्ते पर ही दर्शन दिया था। ऐसी मान्यता है कि इसलिए बरगद के वृक्ष की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्ति होती है।

वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त:

तिथि- 30 मई, 2022, सोमवार

अमावस्या तिथि प्रारंभ- 29 मई, 2022, दोपहर 02:54 बजे से

अमावस्या तिथि का समापन- 30 मई, 2022, सांय 04:59 बजे

पूजा विधि:

वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान करने के बाद वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रख कर विधि विधान से पूजा करें। इसके बाद वट वृक्ष पर जल चढ़ाएं। साथ ही कच्चे सूते से वट के वृक्ष में सात बार परिक्रमा करते हुए बांध दें। अब महिलाएं सावित्री-सत्यवान के प्रतिमा के सामने रोली, अक्षत, भीगे चने, कलावा, फूल, फल अर्पित करें।

वट सावित्री के दिन दान पुण्य का है खास महत्व:

सावित्री व्रत पूजा के दिन दान पुण्य का भी खास महत्व है। कई जगहों पर इस दिन सास को बायना देने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि इस दिन सास को खाना, फल, कपड़े आदि का दान करना बहुत शुभ होता है। इसके अलावा अपने से किसी भी बड़े को भी दान किया जाता है। हाथ का पंखा, खरबूज और आम का दान के लिए इस्तेमाल होता है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: