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आईएएस बनने का ख़्वाब लेकर ‘बिहार’ में जन्म लेने वाले बच्चे बड़े होते ही लाचार और बेबस व्यवस्था के सामने घुटने टेक देते हैं

Sonu sood get admission done for the viral kid of bihar sonu
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सोनू सूद की ‘अदालत’ में बिहार के सोनू की फरियाद सुन ली गई है।

एक 11 साल का बच्चा जब पूरे गांव के लिए ‘सर’ बन जाये तो क्या होगा? एक 11 साल का बच्चा जब अचानक सोशल मीडिया पर अपनी काबिलियत के बल पर वायरल होकर स्टार बन जाये तो क्या होगा? वही 11 साल का बच्चा जब गांव के 50 से अधिक गरीब बच्चों के शिक्षा का सहारा बन जाये तो क्या होगा? ये सभी सवाल आज बिहार के नालंदा जिले के पासवान बस्ती का रहने वाला सोनू नाम के लड़के को लेकर उठ रहा है। एक ऐसा लड़का जो मात्र 11 वर्ष की उम्र में आईएएस (IAS) बनने का ख़्वाब सजाए हुए है लेकिन बिहार की लचर शिक्षा व्यवस्था उसके इस सपने को पूरा होने में एक रोड़ा बन सकती है, इसका आभास उसे अभी से होने लगा है। इसलिए यह बच्चा राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने दोनों हाथ जोड़कर अपनी भलाई और ज़िंदगी में कुछ बनने की गुहार लगाता नज़र आने लगता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने बच्चे ने जब गिड़गिड़ाते हुए कहा कि हमारा पापा हमें पढ़ने नहीं देता है। रोज शराब पीकर हमें मरता है। हमें पढ़ने की कुछ व्यवस्था कर दीजिए। सोनू की यह पीड़ा सिर्फ उसकी अपनी आपबीती बयां नहीं कर रही थी बल्कि वह नीतीश सरकार की शराब बंदी की सच्चाई भी उजागर कर रही थी। अब ऐसे निर्भीक बच्चे को कोई पागल कह दे तो यह बिहार के लिए एक बेहद शर्मनाक बात है। एक तरफ सोनू अपने भविष्य उज्ज्वल करने की गुहार लगा रहा था तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल के नेता अपनी पल्लू सीधा करने और उस बच्चे के ऊपर राजनीतिक रंग छोड़ने की कोशिश करने लगे। जिसको जैसे सम्भव हुआ सोनू से सम्पर्क करने लगा। कोई फोन से वीडियो कॉल पर तो कोई उसके घर पहुँचने लगा।

राजद नेता तेज प्रताप यादव ने वीडियो कॉल पर सोनू से बात कर कहा कि जब हम बिहार सरकार में आएंगे और जब तुम आईएएस बन जाना तो मेरे लिए काम करना जिसपर सोनू का जवाब सुनकर एक बार तेजप्रताप भी दंग रह गए। सोनू का कहना था कि वह किसी के अंडर में काम न करने के लिए आईएएस बनना चाहता है। जब तक तेज प्रताप यादव की बातें सभी के जेहन में पहुचती उससे पहले ही सोनू के गांव में पप्पू यादव ने एंट्री ले ली। गरीबी, पिछड़ेपन और सरकारी तंत्रों पर सवाल खड़ा करते हुए पप्पू यादव ने बच्चे के हाथ में 50, 000 रुपये की एक गड्डी थमा डाली।

सवाल यह है कि क्या 50 हजार रुपये उस बच्चे की जिंदगी बना सकती है या क्या उस बच्चे ने इसी के लिए नीतीश कुमार के सामने गुहार लगाई थी? फोन पर बातें करना, पैसे देना, बड़ी-बड़ी बातें करना और मीडिया की नजरों में आने के लिए उस बच्चे ने सब कुछ नहीं किया बल्कि उसका भविष्य अंधकारमय न हो जाये और उसका सपना उसी नालंदा जिले के किसी गाँव की गलियों में दम ना तोड़ दे इसके लिए उसने नीतीश कुमार तक पहुँचने की हिम्मत जुटाई थी। मगर लोगों ने सिर्फ उसकी पढ़ाई की चिंता कर सब कुछ किया।

इस बीच एक ट्वीटर यूजर्स को एक्टर सोनू सूद की याद आई और उसने टैग करते हूए इस बच्चे की आवाज सोनू सूद तक पहुँचाने का काम किया फिर क्या था अभिनेता सोनू सूद ने ट्वीट का सिर्फ रिप्लाई ही नहीं दिया बल्कि बिहार के इस 11 साल के बच्चे की जिंदगी भर की पढ़ाई और उसमें आने वाली खर्च की जिम्मेदारी भी उठा ली। सोनू सूद ने ट्वीट करते हुए लिखा,

सोनू ने सोनू की सुन ली भाई…स्कूल का बस्ता बांधिए…आपकी पूरी शिक्षा और हॉस्टल की व्यवस्था हो गयी है

Sonu Sood’s Tweet

साथ ही अभिनेता सोनू सूद ने एक निजी विद्यालय का नाम भी लिखा है जिसमें उन्होंने सोनू का नामांकन करवाया है। सोनू सूद के इस सराहनीय कार्य के बाद ट्वीटर पर लोग उनकी तारीफ करने लगे। जिसके बाद एक यूजर्स ने लिखा कि ये होते हैं बड़े दिल वाले…. नेता तो सिर्फ फोन काटते हैं… जिसका जवाब देते हुए सोनू सूद ने कहा कि

बड़ा आदमी बनेगा अपना सोनू

इस पूरे प्रकरण के बाद नीतीश कुमार की सुशासन नीति जगजाहिर हो चुकी है। क्योंकि बात आज सिर्फ एक सोनू की नहीं है बल्कि ऐसे कई सोनू बिहार में जन्म लेते हैं कई सारे अरमान और सपनों के साथ लेकिन बिहार की लचर और जर्जर होती जा रही व्यवस्था के सामने घुटने टेक देते हैं।

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