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मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मुंडका में आगजनी में मृतको को 10-10 लाख रुपये देने का किया ऐलान

लगता है कि दिल्ली का अग्निकांड से पुराना नाता रहा है- रामवीर सिंह बिधूड़ी

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दिल्ली के मुंडिका में जिस तरह से आग के चपेट में पूरी की पूरी 4 मंजिला बिल्डिंग आ गई और जब तक लोग कुछ सोचते तब तक 27 लोग आग में झूलस चुके थे। आग इमारत की पहली मंजिल से लगनी शुरू हुई, जहां सीसीटीवी कैमरा और राउटर निर्माता कंपनी का कार्यालय था। आग बुझाने के काम में 30 से अधिक दमकल वाहनों को लगाया गया था। पुलिस ने कंपनी के मालिक हरीश गोयल और वरुण गोयल को हिरासत में ले लिया गया है और इमारत के मालिक की पहचान मनीष लाकरा के रूप में हुई है। लेकिन इस मामले में अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरु हो चुका है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल मुंडका पहुंचे। लेकिन सवाल उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर इतना बड़ा हादसा जिसकी सूचना सिर्फ दिल्ली ही नहीं पूरे देश को मिल चुकी थी, उसके 19 घंटा बीतने के बाद केजरीवाल घटना स्थल पर क्यों पहुंचे। फिलहाल वहां सीएम केजरीवाल ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही सभी घायलों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे। सीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और कहा कि जो भी मामले में दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और जख्मी लोगों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।
इस पूरे मामले में भाजपा ने दिल्ली सरकार से सवाल किया है कि आखिर हर साल मुंडका जैसी घटना होती है, लेकिन केजरीवाल सरकार को फर्क क्यों नहीं पड़ता है। सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि घटना की सूचना 4.40 बजे दे दी गई थी लेकिन वहां मौजूद लोगों का कहना है कि फायर ब्रिगेड एक घंटा देरी से आई। यही नहीं पुलिस को रेस्क्यू ऑपरेशन स्थानीय लोगों की मदद से चलाना पड़ा। जब तक फायर ब्रिगेड आई, आग भयंकर रूप धारण कर चुकी थी। फायर ब्रिगेड के पास आग में फंसे लोगों को निकालने के लिए पर्याप्त हाईड्रोलिक क्रेन भी नहीं थीं। फायर की हाइ राइज बिल्डिंग तक पहुंचने वाली क्रेन भी नहीं पहुंची।

नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने आज प्रेसवार्ता कर केजरीवाल के फायर ब्रिगेड पर सवाल उठाते हुए कहा कि केजरीवाल बताए कि क्या इस बिल्डिंग के पास फायर क्लीयरेंस था। अगर नहीं था तो फायर विभाग ने इस बिल्डिंग के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई क्यों नहीं की थी? क्या कोई नोटिस जारी किया था। इस बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था। आग लगने पर लोगों को निकालने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। उन्होंने केजरीवाल से मांग की कि आगजनी में जितने लोगों का निधन हुआ है, उनके परिजनों को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दें।

आज शाम पांच बजे मौके पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी भी पहुंचेंगे और घायल लोगों से मिलेंगे साथ ही मृतकों के परिजनों में मुलाकात करेंगे। सुबह से ही क्षेत्रिय सांसद हंसराज हंस घटना स्थल पर ही मौजूद हैं और सभी घायलों का इलाज हो सके, इसका पूरा इंतजाम करने में लगे हुए हैं।

मुंडका अग्निकांड के बाद चर्चाएं शुरु हो गई है कि इससे पहले भी कई सारी घटनाएं हुई हैं जिसमें कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी और कितने घायल अवस्था में अभी भी जी रहे हैं। आगजनी की घटना से दिल्ली का पुराना नाता रहा है। सिर्फ साल 2018 से लेकर अब तक आग लगने से लगभग 80 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। 26 अक्टूबर 2021 को सीमापुरी में आग लगने 4 लोगों की मौत हो गई थी 8 दिसंबर 2019 को रानी झांसी रॉड अनाज मंडी में फैक्ट्री में आग लगने से 43 लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे में 50 लोग घायल भी हुए थे। 12 फरवरी 2019 को करोलबाग के अर्पित होटल में आग लगने से 17 लोगों की जान चली गई थी। साथ ही इस हादसे में 35 लोग भी घायल हुए थे। 21 जनवरी 2018 को बवाना में पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से 17 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में 10 महिलाएं भी थीं। 20 नवंबर 2011 को नंद नगरी में किन्नरों के सम्मेलन में आग लगने से 14 किन्नरों की जान चली गई थी। साथ ही इस हादसे में 40 किन्नर झुलस गए थे।

दिल्ली की दो सबसे भयंकर आगजनी घटनाएं 31 मई 1999 लालकुआं के एक रासायनिक बाजार में आग लगने से 57 लोगों की जहां मौत हो गई थी, वहीं 27 लोग घायल भी हुए थे जबकि 13 जून 1997 को दक्षिण दिल्ली के उपहार सिनेमा में आग लगने से 59 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही इस हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे, ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

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