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Pawan Hans Helicopter: एकमात्र सरकारी हेलीकॉप्टर पवन हंस का सरकार ने किया सौदा, अब इस कंपनी के पास कमान

Pawan Hans Helicopter
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केंद्र सरकार अब देश ने एकमात्र सरकारी हेलीकॉप्टर पवन हंस का सौदा करने जा रही है। भारत में पवन हंस हेलीकॉप्टर इतना लोकप्रिय है उतना ही दुर्घटना भी होने के लिए विख्यात है। पवन हंस हेलीकॉप्टर चुनाव में राजनीतिक दलों के नेताओं की रैलियों साथ ही धार्मिक स्थलों जैसे वैष्णो देवी, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्राओं के लिए भी तीर्थ यात्रियों में लोकप्रिय है। लेकिन पिछले 20 वर्षों में हेलीकॉप्टर दुर्घटना के कई मामले सामने आए हैं। ‌ इसमें कई यात्रियों की जान भी चली गई है। ‌ लगातार घाटे में चल रहे पवन हंस हेलीकॉप्टर को अब केंद्र सरकार ने बेचने का फैसला किया है। ‌ सरकार ने पवनहंस लिमिटेड को 211.14 करोड़ रुपए में स्टार-9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हाथों बेच दिया है। पवनहंस कंपनी पर 230 करोड़ रुपए का कर्ज भी है। सरकार पवनहंस के हेलिकॉप्टरों की संख्या बढ़ाकर सर्विस में सुधार करना चाहती थी, लेकिन सरकार ऐसा करने में विफल रही। यह कंपनी हेलिकॉप्टर सर्विस देने के अलावा अभी ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट जैसे प्रोग्राम को भी संचालित करती है। पवन हंस सरकारी कंपनी थी। इसमें सरकार की हिस्सेदारी 51% थी। इसके साथ ही सरकारी कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस (ओएनजीसी) की 49% हिस्सेदारी थी । सरकार ने अपनी पूरी 51% हिस्सेदारी बेच दी है। बता दें कि पवन हंस को 15 अक्टूबर 1985 को रजिस्टर किया गया था। इस कंपनी को सरकार और उसकी ही एक कंपनी ओएनजीसी ने मिलकर शुरू किया था। शुरुआत में इसमें 78% से ज्यादा हिस्सेदारी सरकार के पास थी। कुछ साल पहले ही सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51% की थी, जिसके बाद इसमें ओएनजीसी की हिस्सेदारी बढ़कर 49% पर पहुंच गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 तक पवन हंस के बेड़े में 43 हेलीकॉप्टर थे। ये कंपनी हेलीकॉप्टर सर्विस मुहैया कराने का काम करती है। ये कंपनी अक्सर फायदे में रहती थी, लेकिन 2018-19 में इसे 72.42 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। अपने 37 साल की सर्विस के दौरान पवन हंस हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं को लेकर भी चर्चा में रही है। कंपनी अपनी वेबसाइट पर सुरक्षा को एक फ्लाइट ऑपरेशन का अहम हिस्सा बताती है, लेकिन इसका रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। जुलाई 1988 में पहली बार पवन हंस का हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुआ था। वैष्णो देवी में हुए उस हादसे में दो पायलट समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पवन हंस से जुड़ी 20 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में 91 लोगों की मौत हो चुकी है।
2011 में पवन हंस की हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा 31 लोगों की मौत हुई थी। इसमें अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की मौत भी शामिल है।

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