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बिहार दिवस विशेष: 112 साल के बिहार ने देखे कई अनोखे रंग, अनेक मुश्किलों के बावजूद भी देश विदेश में बनाई एक अलग पहचान

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आज बिहार अपने 110 साल की सालगिरह मना रहा है। आज हीं के दिन यानी 22 मार्च 1912 में बंगाल प्रोविंस से अलग होने के बाद बिहार अस्तित्व में आया और एक अलग स्वतंत्र राज्य बना। आजादी की जंग से लेकर आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम तक बिहार ने पिछले 110 सालों में देश दुनिया के कई रंग देखे हैं। बिहार का हर क्षेत्र में एक अलग ही बोलबाला रहा है। वीर हो या विद्वान, नेता हो या अभिनेता, कोई दिहाड़ी मजदूर हो या आईपीएस आईपीएस ऑफिसर बिहार के लोग हर क्षेत्र में अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।

बिहार की मिट्टी में राजनीति की एक अलग खुशबू है। यहाँ राजनीति की चर्चा गली नुक्कड़ हो या चलती ट्रेन, चाय की टपरी हो या पान की छोटी दुकान हर ओर सुनाई देती है। और सुनाई दे भी क्यों नहीं? बिहार ने भारत को पहला राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद दिया, जिन्होंने पहले राष्ट्रपति बनने के साथ-साथ भारत के संविधान को बनाने में एक बहुत बड़ी भूमिका भी निभाई। दूसरी बड़ी छवि हैं बिहार के जगजीवन राम या कहिए बाबू जगजीवन राम। बिहार के इस कद्दावर नेता का दबदबा सिर्फ़ बिहार की राजनीति पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर रहा है। आज भी इन्हें देश का सबसे बड़ा दलित नेता माना जाता है। भारत की राजनीति में इनका कद इतना ऊंचा रहा कि इनके कारण सरकारें बनती भी थीं और गिर भी जाया करती थीं। कभी ये प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ डटे भी रहे तो कभी इनके ही कारण इंदिरा गांधी की सरकार भी गिर गई।
बिहार की एक और बड़ी छवि में जयप्रकाश नारायण का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा है जिन्होंने कई बड़े आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पढ़ के आने के बाद जयप्रकाश नारायण भारत की राजनीति में काफी सक्रिय रहे और इन्हें आंदोलनों का जनक भी कहा जाता है। जेपी ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर कई बड़े आंदोलन किए। जेपी के आंदोलन की गूंज इतनी ऊंची थी उस समय की सबसे ताकतवर नेता इंदिरा गांधी को भी उनके शासन से हिला दिया था। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन जे.पी आंदोलन से ही बिहार के कई बड़े और दिग्गज नेता, जो आज की राजनीति में काफी सक्रिय हैं वो उभरकर सामने आए हैं जिनमें से एक वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव भी हैं।
इसके अलावा बिहार के कई बड़े नेता राज्य और देश की राजनीति में सक्रिय हैं।

बिहार की अन्य विशेषताएँ:

बिहार के क्षेत्रफल:
बिहार भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है, जिसकी राजधानी पटना है।बिहार का क्षेत्रफल कुल 36,357 वर्गमील है। यह जनसंख्या की दृष्टि से भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्रदेश है जबकि क्षेत्रफल की दृष्टि से 12 वां है। बिहार के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखण्ड, पूर्व में पश्चिम बंगाल, और पश्चिम में उत्तर प्रदेश स्थित है।

बिहार की बोली:
वैसे तो हिंदी और उर्दू बिहार की दो राजभाषाएं हैं। लेकिन इसके बाद बिहार के मिथिलांचल में बोली जाने वाली मैथिली भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है। इसके अलावा बिहार में भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका बोली जाने वाली अन्य प्रमुख भाषाओं और बोलियों में शामिल है।

प्रसिद्ध व्यंजन:
बिहार का प्रसिद्ध भोजन में लिट्टी चोखा आज देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी जायके की वजह से मशहूर है। इसे गेहूँ और सत्तू को मसालों के साथ, गोल तीखे गोले बनाकर उपलों और कोयला पर बनाया जाता है और घी में डुबा कर बनाया जाता है। और चोखा आग पकाई गई आलू, बैगन, टमाटर को मैश करके तैयार किया जाता है, इसमें मसाले और कटा हुआ प्याज, लहसुन, अदरक तेल नमक आदि मिलाकर बनाया जाता है। इसके अलावा मनेर के लड्डू, गया के तिलकुट, सिलाव का खाजा भी बिहार के प्रसिद्ध व्यंजनों में से एक है।

बिहार की प्रसिद्ध पर्यटक स्थल:नालंदा विश्वविद्यालय –
भारत का सबसे पुराना विश्वविद्यालय, नालंदा बिहार में स्थित है। यहाँ अंतिम और सबसे प्रसिद्ध जैन तीर्थंकर, महावीर ने यहां 14 मानसून सीजन बिताए थे। कहा जाता है कि बुद्ध ने नालंदा में आम के बाग के पास भाषण दिया था। इस शिक्षा केंद्र की ख्याति इस हद तक थी कि प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने यहां का दौरा किया और यहां कम से कम वो दो साल तक रहे। यहाँ तक कि, इस स्थान की महिमा ऐसी कि एक अन्य प्रसिद्ध चीनी यात्री, आई-त्सिंग नालंदा में लगभग 10 वर्षों तक रहे।

बोधगया:
बिहार में सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक बोधगया है। बोधगया बौद्ध धर्म के लिए एक पारगमन बिंदु है। बोधगया में ही महाबोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

वैशाली:
वैशाली अंतिम जैन तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्धि है। ऐसा माना जाता है कि महावीर का जन्म और पालन-पोषण छठी शताब्दी ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के कुंडलग्राम में हुआ था। यहाँ ,अवशेष स्तूप, कुटागरशाला विहार, राज्याभिषेक टैंक, विश्व शांति शिवालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संग्रहालय, बावन पोखर मंदिर, कुंडलपुर, राजा विशाल का गढ़, चौमुखी महादेव यहां के प्रमुख आकर्षण स्थल हैं।

राजगीर:
बिहार के धार्मिक और घूमने वाले स्थलों की सूची में शामिल राजगीर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपने प्राकृतिक परिवेश और बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिंदू धर्म में आध्यात्मिक महत्व के लिए लोकप्रिय है। राजगीर “देवताओं के निवास” में जाने जाना वाला शहर है जो लगभग 3000 साल पुराना है। राजगीर को दो खंडों में वर्गीकृत किया गया है – एक मगध राजा अजातशत्रु द्वारा स्थापित किया गया है और दूसरा पूरी तरह से 7 राजसी पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

शेरशाह सूरी का मकबरा: सासाराम

बिहार के सासाराम में शेर शाह सूरी का मकबरा भारत के सबसे प्रभावशाली मकबरों में से एक माना जाता है। इसे दूसरे “भारत के ताजमहल” के रूप में जाना जाता है। यह दिवंगत सम्राट शेर शाह सूरी को समर्पित एक विशाल मकबरा है। इस मकबरे का निर्माण 1540 और 1545 के बीच पूरा हुआ था और पूरी संरचना को आज तक खूबसूरती से संरक्षित किया गया है। यह वास्तुकला की इंडो-इस्लामिक शैली का एक सुंदर नमूना है जो लाल पत्थर से बना है जिसके आगे के भाग पर जटिल नक्काशी है। मकबरा 122 फीट ऊंचा है और इसमें सुंदर गुंबद, मेहराब, स्तंभ, मीनार, छतरियां और बहुत कुछ है।

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