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फॉरेस्ट डे विशेष: विकास की रफ्तार में हम जंगलों को भी खो रहे हैं, अभी भी समय, संभल जाइए

International day of forests: losing the world’s forests, collaborative effort to help save our forests
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अगर हम पिछले दो दशक से अब तक बात करें तो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में विकास की रफ्तार बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। ‌ जिसमें यातायात, संचार व्यवस्था और नई तकनीक ने पूरी दुनिया को आधुनिक रूप दे दिया है। इस विकास की दौड़ में आज कई प्राकृतिक हमसे बिछड़ भी रही हैं। ‌इसमें सबसे मुख्य है हरियाली। अभी भी वक्त है अगर न संभलें तो आने वाले समय में हम लोग ऑक्सीजन के लिए भी तरस जाएंगे। अगर देश की बात करें तो आज हरियाली का तेजी के साथ कटान हो रहा है या गायब हो रही है। इसका जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि हम लोग हैं। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आपको जंगलों को ढूंढना पड़ेगा। 21 मार्च को हर साल दुनिया अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (फॉरेस्ट डे) बनाती है। ‌ यह दिन सभी तरह के वनों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन देशों को वनों और पेड़ों से संबंधित गतिविधियों का आयोजन करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाता है। इन गतिविधियों में वृक्षारोपण अभियान भी शामिल हैं। वन दिवस को लेकर हर साल कौन कोई थीम रखी जाती है । बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 28 नवंबर 2012 को एक प्रस्ताव पारित करते हुए प्रतिवर्ष 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के लिए थीम को जंगलों पर सहयोगात्मक भागीदारी द्वारा चुना जाता है। इस वर्ष विश्व वानिकी दिवस 2022 की थीम ‘वन और सतत उत्पादन और खपत’ है। पूरे विश्व में वन भूमि पर सबसे अधिक जैविक रूप से विविध पारिस्थितिक तंत्र पाया जाता है और जानवरों पौधों और कीड़ों के 80 प्रतिशत से अधिक प्रजातियों को समायोजित करते हैं। वन पृथ्वी की सतह के 30 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं और लाखों प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं। वे स्वच्छ हवा और पानी के स्त्रोत हैं और निश्चित रूप से जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विश्व भर में लगभग 1.6 बिलियन लोग भोजन आश्रय ऊर्जा दवाओं और आय के लिए सीधे वनों पर निर्भर हैं।

विश्व भर में हम हर साल 10 मिलियन हेक्टेयर जंगल खत्म होते जा रहे हैं–

आज पूरी दुनिया विकास के मुहाने पर है। लेकिन इसके साथ हमसे जंगल भी दूर होते जा रहे हैं। ‌दुनिया हर साल 10 मिलियन हेक्टेयर जंगलों को खो रही है जो कि वनों पर आश्रित रहने वाले समुदाय पर एक बड़ा खतरा उत्पन्न करती है और मानवता के सामने एक मुख्य समस्या है। अगर अपने देश भारत में वन और वृक्षों का आवरण अब 8,09,537 वर्ग किलोमीटर है। कुल वनावरण 7,13,789 वर्ग किलो मीटर, (भौगोलिक क्षेत्र का 21.71 प्रतिशत) और वृक्षों का आवरण 95,748 वर्ग किलो मीटर (भौगोलिक क्षेत्र का 2.91 प्रतिशत) है। जो कि विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। भारत में लो फारेस्ट एरिया के मुख्य कारण नगरीकरण, कृषि क्षेत्र के विस्तार के लिए जंगलों का साफ करना, वनों का कुछ क्षेत्र विकास परियोजनाओं की भेंट चढ़ जाना, औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी का उपयोग जंगलों में लगने वाली आग के कारण भी वनों का नुक़सान होता है जिसके कारण सोइल इरोजन होता है, आकस्मिक बाढ़ आती हैं, वाटर साइकल में व्यवधान आता है, और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। जंगलों को बचाने हमारी भी जिम्मेदारी है हम लोग जागरूक रहें।

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