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Government extends AFSPA in Nagaland for six more months

नागालैंड में अगले 6 महीने तक आफ़स्पा कानून लागू

Government extends AFSPA in Nagaland for six more months

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागालैंड में अगले 6 महीने तक आफ़स्पा कानून लागू कर दिया है। मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफ़िकेशन में कहा गया है कि,‘’केंद्र सरकार की राय है कि पूरे नगालैंड राज्य का क्षेत्र एक अशांत और ख़तरनाक स्थिति में है, यहाँ नागरिकों की सहायता के लिए सशस्त्र बलों का उपयोग आवश्यक है।‘’

इसमें कहा गया है कि अधिनियम की धारा 4 के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, “केंद्र सरकार 30 दिसंबर,2021 से पूरे नगालैंड राज्य को छह महीने की अवधि के लिए’अशांत क्षेत्र’ घोषित करती है। “

बता दें की इस महीने की शुरुआत में नगालैंड के मोन ज़िले में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 13 आम लोगों की मौत हो गई थी, इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री नेफ़ियू रियो ने आर्म्ड फ़ोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट को हटाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि नगालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित करते हुए ये एक्ट लागू किया गया था,लेकिन फ़िलहाल नगालैंड में संघर्ष विराम की स्थिति है और वहां शांति बनी हुई है। इसलिए यह कानून हटाया जाना चाहिए।

क्या है आफ़स्पा (AFSPA) कानून ?

पूर्वोत्तर में बढ़ते अलगाववाद और हिंसा की समस्या को देखते हुए और सेना को कार्रवाई में मदद के लिए 11 सितंबर 1958 को आर्म्ड फ़ोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट यानी आफ़स्पा को पारित किया गया था। इसके बाद आतंकवाद से निपटने के लिए इस कानून को 1990 में जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया था। आफ़स्पा क़ानून कहीं भी तब लगाया जाता है जब उस क्षेत्र को केंद्र सरकार या राज्य सरकार अशांत घोषित कर देती है।

इसके लिए संविधान में प्रावधान किया गया है और संविधान में अशांत क्षेत्र क़ानून यानी डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट मौजूद है जिसके अंतर्गत किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किया जाता है।

जिस क्षेत्र को अशांत घोषित कर दिया जाता है वहां पर ही आफ़स्पा क़ानून लगाया जाता है और इस क़ानून के लागू होने के बाद ही वहां सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं।
ये कानून राज्य सरकार की ओर से राज्य को अशांत घोषित करने पर लगता है लेकिन ये कानून हटेगा या नहीं इसे तय करने में राज्यपाल की भूमिका अहम होती है, चूंकि राज्यपाल केंद्र सरकार की ओर तय किए जाते हैं ऐसे में ये क़ानून किसी राज्य में लागू रहेगा या हटेगा इसका फ़ैसला काफ़ी हद तक केंद्र सरकार के पास ही रहता है।

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