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उत्तराखंड में स्थानीय प्रोडक्ट्स को बढ़ाने के लिए ‘एक जनपद दो उत्पाद योजना’ लागू

Uttarakhand government launches scheme to promote local products

पिछले काफी समय से उत्तराखंड सरकार राज्य के सभी जिलों में स्थानीय उत्पादों को बढ़ाने के लिए तैयारी कर रही थी। आखिरकार आज धामी सरकार ने यह एक जनपद दो उत्पाद (वन डिस्ट्रिक्ट टू प्रोडक्ट्स) योजना को उत्तराखंड में लागू कर दी है। ‌ सोमवार को इसका शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को अब एक जिला दो उत्पाद योजना के तहत देश दुनिया के बाजार में पहचान मिलेगी। उत्पादों का कारोबार बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उद्योग विभाग के चयनित उत्पादों को जिला स्तर पर ही पैकेजिंग, टेस्टिंग, ब्रॉडिंग और लाजिस्टिक की सुविधा मिलेगी। नई तकनीक और डिजाइन के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से स्थानीय उत्पादों पिछड़ रहे थे। इस देखते हुए केंद्र सरकार ने लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देेने के लिए एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की है, लेकिन राज्य में एक जिला में दो उत्पादों को योजना में शामिल किया गया है। राज्य में एक ही जिले में कई तरह से स्थानीय उत्पाद है। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस योजना को लागू करने के पीछे उद्देश्य उत्तराखण्ड के सभी 13 जिलों में वहां के स्थानीय उत्पादों को पहचान के अनुरूप परंपरागत तथा शिल्प उद्योग का विकास करना है।

राज्य में इस योजना के शुरू होने से स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे: सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस योजना से स्थानीय काश्तकारों एवं शिल्पकारों को जहां एक ओर स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे और हर जिले में स्थानीय उत्पाद की विश्वस्तरीय पहचान बन सकेगी। दूसरी ओर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के सचिव, अमित नेगी ने बताया कि अल्मोड़ा में ट्वीड एवं बाल मिठाई, बागेश्वर में ताम्र शिल्प उत्पाद एवं मंडवा बिस्किट, चंपावत में लौह शिल्प उत्पाद एवं हाथ से बने उत्पाद, चमोली में हथकरघा-हस्तशिल्प उत्पाद तथा एरोमेटिक हर्बल उत्पाद, देहरादून में बेकरी उत्पाद एवं मशरूम उत्पादन, हरिद्वार में गुड़ एवं शहद उत्पाद, नैनीताल में ऐपण कला एवं कैंडल क्राफ्ट को योजना के तहत चिन्हित किया गया है । उन्होंने बताया कि इसी प्रकार, पिथौरागढ़ में ऊन के उत्पाद एवं मुनस्यारी राजमा, पौड़ी में हर्बल उत्पाद एवं लकड़ी के फर्नीचर संबंधी उत्पाद, रुद्रप्रयाग में मंदिर कलाकृति हस्तशिल्प एवं प्रसाद सम्बंधी उत्पाद, टिहरी में प्राकृतिक रेशा उत्पाद एवं टिहरी नथ, ऊधमसिंह नगर में मेंथा आयल एवं मूंज घास उत्पाद, उत्तरकाशी में ऊन हस्तशिल्प एवं सेब आधारित उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा ।

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