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राष्ट्रीय आम दिवस: अपने अलग-अलग स्वाद से मैंगो बना लोगों का पसंदीदा फल, जानें इसका इतिहास और खूबियां

आज हम एक ऐसे फल की बात करने जा रहे हैं जो भारत समेत कई देशों के लोगों का पसंदीदा है। इस फल का भारत में हर साल गर्मियों के मौसम में लोगों को बेसब्री से इंतजार भी रहता है। चाहे यह पका हो या कच्चा दोनों का स्वाद लोगों को खूब भाता है। यह कई व्यंजन बनाने में भी काम आता है। इसलिए यह लोगों की पसंदीदा फल की सूची में सबसे ऊपर है। इस समय भी बाजारों में यह ठेलों, दुकानों पर अपनी रौनक बढ़ा रहा है। वैसे इस फल का सीजन अब आखिरी चरण में है। जी हां हम बात कर रहे हैं आम यानी मैंगो की। इस फल के लिए आज खास दिन है। हर साल 22 जुलाई को ‘राष्ट्रीय आम दिवस’ या ‘मैंगो दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आम का प्रचार-प्रसार करने के साथ इसकी प्रजातियों के बारे में भी लोगों को जागरूक करना है। ग्रीष्मकाल में आम का फल सबसे अधिक लोगों की पसंद है। मैंगो शेक, स्मूधी, मैंगो केक, मैंगो आइसक्रीम, जैसे अनेक व्यंजन हैं जो आम प्रेमियों द्वारा पसंद किए जाते हैं । आइए बात को आगे बढ़ाते हैं और फलों के राजा की कुछ और जानकारी देते हैं। बता दें कि हमारे देश मे यह दिवस कब से मनाया जाता है इसका इतिहास और उत्पत्ति अज्ञात है लेकिन जैसा कि आम के बारे मे ऊपर चर्चा की गई है, उसके पीछे एक समृद्ध इतिहास है। भारत में 5 हजार साल पहले आम की खेती की जाती है। यह भारत के लोकगीतों और धार्मिक समारोहों से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। क्या आप जानते हैं कि आम का मैंगो नाम जो अंग्रेजी और स्पैनिश भाषी देशों में बोला जाना जाता है, वह मलयम ‘मन्ना’ से लिया गया है। पुर्तगाली 1498 में मसाला व्यापार के लिए केरल आए तो उन्होने मन्ना को मंगा के रूप में उच्चार किया और आगे जाकर मेंगो हुआ। आम के पेड़ लगभग 1700 में ब्राजील में लगाये गए थे और लगभग 1740 में यह वेस्टइंडीज तक पहुंच गया। दुनिया मे सबसे अधिक इस रसदार फल की खेती ठंढ से मुक्त उष्णकटिबंधीय जलवायु में की जाती है।

देश में आम की दो सौ से अधिक प्रजातियां उगाई जाती है

National Mango Day

यहां हम आपको यह भी जानकारी दे दें कि केरल में कन्नूर जिले के कन्नपुरम को ‘स्वदेशी मैंगो हेरिटेज एरिया’ घोषित किया गया है। कन्नपुरम आम की विभिन्न देशी किस्मों का घर है। इस पंचायत विस्तार में आम की 200 से अधिक किस्मे उगाई जाती हैं। केरल के कन्नूर जिले में आम प्रेमी मई के प्रथम सप्ताह में फल पर दावत के लिए मिलन समारोह आयोजित करते हैं। इसके अलावा राजधानी दिल्ली और लखनऊ समेत कई शहरों में आम महोत्सव भी आयोजित किए जाते हैं। इसमें आम की किस्में प्रदर्शित की जाती हैं, साथ ही आम के जानकार किसान, व्यापारी और आम के शौकीन लोग आते हैं, स्पर्धाएं आयोजित की जातीं हैं। वैसे तो हर राज्यों के आमों की अलग खूबियां होती हैं। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के आमों की बहुत डिमांड रहती है। लखनऊ के पास स्थित छोटा कस्बा मलिहाबाद है। यहां के आमों को ‘मलीहाबादी आम’ बोला जाता है जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ऐसे ही इलाहाबाद और बनारस के आमों का अपना अलग अंदाज है। भारत में आम की कई किस्में उगाई जाती हैं, जिसमें दशहरी, लंगड़ा, चौसा, फजली, बम्बई ग्रीन, बम्बई, अलफ़ॉन्ज़ो, बैंगन पल्ली, हिम सागर, केशर, किशन भोग, मलगोवा, नीलम, सुर्वन रेखा, वनराज, जरदालू शमिल हैं। इसके अलावा, आम की नई किस्मों में मल्लिका, आम्रपाली, रत्ना, अर्का अरुण, अर्मा पुनीत, अर्का अनमोल और दशहरी-41 शामिल है। इसके अलावा भी कई स्थानीय स्तर पर भी आम की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। आइए राष्ट्रीय आम दिवस पर हम भी फलों के राजा की खूबियों के बारे में रूबरू हों।

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