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उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज करेंगे नई जनसंख्या नीति का विमोचन

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्य में उप्र जनसंख्या नीति 2021-30 का शुभारंभ करेंगे। इसी के साथ प्रदेश में परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने के लिए जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े की गतिविधियां भी शुरू हो जाएंगी। इसके बाद अब उत्तर प्रदेश में जिन लोगों के दो से ज्यादा बच्चे होंगे, उन्हे कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है। मसलन ऐसे लोग सरकारी नौकरी के आवेदन के लिए अपात्र माने जाएंगे, नौकरी में हैं तो कुछ लाभों से वंचित हो जाएंगे। न तो स्थानीय निकाय चुनाव लड़ सकेंगे और न ही किसी तरह की सब्सिडी मिलेगी। ये प्रावधान उप्र जनसंख्या विधेयक 2021 के मसौदे में किए गए हैं।  

इस मौके पर सीएम योगी 11 बीएसएल-02 आटीपीसीआर लैब और सीएचसी-पीएचसी एप का भी शुभारंभ करेंगे।

मिली जानकारी के अनुसार कोरोना महामारी की जांच के लिए प्रदेश के 11 जिलों अमेठी, औरेया, बुलंदशहर, बिजनौर, मऊ, महोबा, कासगंज, देवरिया, कुशीनगर, सोनभद्र, सिद्धार्थ नगर में आरटीपीसीआर लैब विकसित की गई हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग में कुल 22 आरटीपीसीआर लैब पहले से चल रही है। इससे जनमानस को जिलों में कोविड-19 जांच की रिपोर्ट मिल जाएगी। 

इसके अलावा जनसंख्या स्थिरिता पखवाड़े के शुभारंभ के मौके पर नवविवाहितों को शगुन किट भी बांटी जाएगी। जिससे उन्हें परिवार नियोजन के साधनों को प्रोत्साहित किया जा सके। इस मौके पर विश्व जनसंख्या दिवस और जनसंख्या नीति के दृष्टिगत परिवार नियोजन की महत्ता पर बनाई गई एक फिल्म भी दिखाई जाएगी।

बता दें की उत्तर प्रदेश में जनसंख्या विधेयक 2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। राज्य विधि आयोग जल्द ही इसे अंतिम रूप देने के बाद राज्य सरकार को सौंपने वाली है। इसके तहत जिनके पास दो से ज्यादा बच्चे होंगे, वे न तो सरकारी नौकरी कर पाएंगे और न ही चुनाव लड़ पाएंगे। आपको बता दें कि आयोग ने ड्राफ्ट को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है, साथ ही 19 जुलाई तक जनता से राय मांगी है।

दो से ज्यादा बच्चे होने पर नुकसान
उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग के प्रस्ताव के मुताबिक, दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता सरकारी नौकरी का आवेदन नहीं कर पाएंगे। प्रमोशन का मौका भी नहीं मिल पाएगा। 77 सरकारी योजनाओं व अनुदान का लाभ भी नहीं मिलेगा। साथ ही स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ने समेत कई तरह के प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। 

इसके लागू होने पर एक साल के अंदर सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा। इसके अलावा स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ पत्र देना पड़ेगा। वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। कानून लागू होते वक्त उनके दो ही बच्चे हैं, शपथ पत्र देने के बाद अगर तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने का प्रस्ताव है साथ ही चुनाव ना लड़ने का प्रस्ताव भी देना होगा। वहीं, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन और बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। 

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