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कोविड टेस्टिंग फर्जीवाड़ा और दरोगा के ट्रांसफर पर तीरथ अपनों से घिरे, कांग्रेस भी मांग रही जवाब

उत्तराखंड में दो मामले इन दिनों मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की ‘गले की फांस’ बन गए हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस इन दोनों घटनाओं को लेकर तीरथ रावत सरकार से ‘जवाब’ मांग रही है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के विधायक और पूर्व सीएम के रवैये से ‘दुविधा’ में हैं। आइए आपको दोनों ही घटनाओं को सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं। ‌ पहला मामला हरिद्वार महाकुंभ के दौरान ‘फर्जी कोविड-19 का है’। दूसरा भाजपा विधायक के मास्क न पहनने पर मसूरी में एक दरोगा ने चालान कर दिया था। बात शुरू करते हैं महाकुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग ‘फर्जीवाड़ा’ से। पिछले कई दिनों से सूबे के ‘मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इस मामले में जवाब और जांच कराने का आश्वासन देते फिर रहे हैं’। तीरथ के बयान के बाद अब इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी आ गए हैं। आपको बता दें कि गुरुवार को ‘मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से जब इस फर्जीवाड़े के बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि यह मामला उनके समय का नहीं है लेकिन फिर भी उन्होंने इसकी जांच बैठा दी है’। तीरथ सिंह ने कहा कि ये मामला बहुत पुराना है, हमें इसकी जानकारी मिली तो मैंने आते ही इस पर जांच कराने के आदेश दिए हैं जो दोषी पाया जाएगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद ‘त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मामला भाजपा सरकार का है, ऐसे में उसे किसी पद पर बैठे व्यक्ति के नाम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि उन्होंने कई आईएएस और पीसीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की थी, तो तीरथ सरकार क्यों नहीं कर सकती’। बता दें की कुंभ मेले में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कोरोना टेस्ट बड़े पैमाने पर किए गए थे। मेला अवधि के दौरान 20 से 40 हजार तक कोरोना टेस्ट प्रतिदिन किए गए। टेस्ट घोटाला करने वाली निजी कंपनी पर आरोप है कि कंपनी ने सरकार से ज्यादा भुगतान पाने के लिए सैंपलिंग की संख्या ज्यादा दिखाई। इसके लिए फर्जी आधार कार्डों पर नेगेटिव रिपोर्ट दी गई। उसके अलावा एक व्यक्ति के एक से अधिक टेस्ट करके भी उन्हें नेगेटिव रिपोर्ट थमा दी गई। मामले का पता तब चला जब प्राइवेट लैब ने पंजाब के एक युवक को कोरोना की रिपोर्ट एसएमएस कर दी थी। युवक न तो हरिद्वार कुंभ मेले में पहुंचा था और न ही उसने कोविड टेस्ट कराया था । बाद में इस युवक ने मामले की शिकायत इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से की । जिसके बाद आईसीएमआर ने जांच के निर्देश जारी किए गए थे। जिसके बाद यह फर्जीवाड़ा सामनेेे आया। दूसरी ओर ‘कांग्रेस का कहना है कि मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके’। दूसरी ओर ‘रुड़की के भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा का चालान काटने वाले दरोगा का ट्रांसफर किए जाने पर उत्तराखंड की सियासत और गर्म हो गई है’। वैसे यह मामला दो-तीन दिन से ही राज्य की सियासत में छाया हुआ था। बता दें कि रुड़की से भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा अपने परिवार के साथ पिछले दिनों मसूरी घूमने पहुंचे थे । यहां मास्क न पहनने को लेकर मसूरी कोतवाली में तैनात सब इंस्पेक्टर नीरज कठैत ने विधायक का चालान काट दिया था। तभी से ‘कांग्रेस पार्टी तीरथ सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे’। इसके साथ दरोगा और विधायक के बीच भी हुई ‘नोकझोंक’ का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में बना हुआ है । वीडियो में विधायक प्रदीप बत्रा चालान के 500 रुपये फेंक रहे थे और दरोगा से बहस कर रहे हैं । बाद में विधायक ने इसकी शिकायत राज्य के डीजीपी अशोक कुमार से कर दी । उसके बाद दरोगा नीरज का कठैत का तबादला मसूरी से ग्रामीण क्षेत्र का कालसी में कर दिया । हालांकि एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि रुटीन प्रक्रिया के तहत ही यह तबादला किया गया है। वहीं कांग्रेस और अन्य समाजसेवी संगठनों ने दरोगा के ट्रांसफर पर ‘आंदोलन छेड़’ दिया है। जिसके बाद से तीरथ रावत सरकार घिर गई है । दूसरी ओर पुलिस का आरोप है कि वे माल रोड पर बिना मास्क लगाए घूम रहे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें मास्क नहीं पहनने पर टोका तो वह उनसे उलझ गए।

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