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Mamata Banerjee to take oath as CM on May 5

ममता बनर्जी चुनी गई विधायक दल की नेता, 5 मई को लेंगी मुख्यमंत्री की शपथ

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी तीसरी बार जीत हासिल करने के बाद आज TMC मीटिंग में सभी की सर्वसम्मति से ममता बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना गया है। जिसके बाद सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी 5 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। मुख्यमंत्री के शपथ के अलावा अन्य मंत्रियों का शपथ ग्रहण 6 मई को होगा। वहीं शपथ समारोह को लेकर टीएमसी की ओर से यह कहा गया है कि कोरोना का देखते हुए शपथ समारोह एकदम साधारण रूप से मनाया जाएगा।

ममता एक मजबूत नेता के तौर पर उभर कर सामने आईं हैं—

बंगाल में टीएमसी की जीत के बाद ममता बनर्जी देश की राजनीति में एक मजबूत नेता के तौर पर उभर के सामने आई हैं । सभी ‘विपक्षी दलों के नेताओं ने ममता को इस जीत पर बधाई दी है’ । एनसीपी नेता शरद पवार, कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता संजय निरुपम और भाजपा के वरिष्ठ नेता और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी दीदी को इस जीत पर शुभकामनाएं दी। वहीं अपनी जीत से गदगद ममता बनर्जी ने शाम को बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की । इस दौरान वे बिना व्हीलचेयर के नजर आईं। बता दें कि उन्हें 10 मार्च को चुनाव प्रचार के दौरान चोट लग गई थी। इसके बाद से ममता प्लास्टर में ही प्रचार कर रही थीं। अब उन्हें ठीक देखकर भाजपा का कहना है कि यह चोट सिर्फ एक नाटक था। तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद ममता ने कहा कि मुझे पहले से ही ‘डबल सेंचुरी’ की उम्मीद थी। मैंने 221 सीटों का लक्ष्य तय किया था। दीदी ने कहा कि ये बंगाल के लोगों को बचाने की जीत है, ये बंगाल के लोगों की जीत है। उन्होंने कहा कि ‘खेला होबे और जय बांग्ला’, दोनों ने बहुत काम किया है। तृणमूल के राज्य सभा सांसद ने नतीजों के बाद ट्वीट कर भाजपा पर तंज कसा है। इस पोस्ट में उन्होंने एक सूत्र का जिक्र किया है। इसमें एक तरफ भाजपा के साथ, सीबीआई, ईडी, चुनाव आयोग, मीडिया, पैसे और दलबदलुओं का जिक्र किया है। दूसरी ओर ब्रायन ने कहा कि इन सब पर ममता, तृणमूल कार्यकर्ताओं और बंगाल की जनता भारी पड़ी है। सही मायने में भाजपा की अधिक आक्रामकता भरे बयान ही उसे सत्ता से दूर ले गई। इन बयानों को भुनाने में टीएमसी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। सहानुभूति कार्ड काम आया और यह ममता के पक्ष में गया। इसी का परिणाम है कि लगातार तीसरी बार ममता बंगाल की सत्ता पर काबिज होने पर कामयाबी हासिल की है।

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