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असम जीत और पुडुचेरी की बढ़त ने भाजपा का तनाव कम किया, कांग्रेस हुई निराश—

असम में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है । बंगाल चुनाव में मिली हार की भरपाई जरूर असाम ने कुछ हद तक पूरी कर दी है । पहले कहा जा रहा था कि इस राज्य में कांग्रेस को सत्ता मिल सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ । असम में भाजपा की दोबारा सरकार बनना तय है। लेकिन यहां अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि जब चुनाव के बाद हमारा विधानसभा दल गठित होगा, तो इस पर सही समय पर फैसला लिया जाएगा। यानी अभी असमंजस की है । अगर हम बात करें कांग्रेस की तो उसके लिए पांचों राज्यों में चुनाव परिणाम निराशाजनक कहे जाएंगे । राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने असम और केरल में खूब मेहनत की। लेकिन वहां सरकार बनाने में सफल नहीं हो सके। अब गांधी परिवार के लिए कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के लिए कई सवाल पार्टी के ही बगावती नेता ही उठाएंगे । बात अब केरल की। केरल में एक बार फिर एलडीएफ के पक्ष में अपना मत दिया है। मुख्यमंत्री विजयन सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं । यहां भाजपा की बुरी तरह हार हुई है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि केरल की जनता ने एक बार फिर एलडीएफ की सरकार पर भरोसा जताया है और भारी बहुमत से जिताया । उन्होंने आगे कहा कि ये समय जश्न मनाने का नहीं है, बल्कि कोविड के खिलाफ लड़ाई लड़ने का है। ऐसे ही तमिलनाडु में डीएमके के नेता स्टालिन का जादू चल गया । तमिलनाडु में अब तक डीएमके 121 सीटों पर आगे है और यहां के विधानसभा की 234 सीटें हैं और सामान्य बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। दूसरी ओर केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को एक राज्य का फायदा होता नजर आ रहा है। यहां भाजपा और उसके सहयोगी दल के सरकार बनाने के आसार हैं। यहां हम आपको बता दें कि देश में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार वाले प्रदेशों की संख्या 18 हो जाएगी। हालांकि, आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से देखें तो उसे कोई खासा फायदा नहीं होगा, क्योंकि 14 लाख की आबादी और 483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह बेहद छोटा राज्य है। लेकिन सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी को बंगाल की हार आगामी कई दिनों तक परेशान करती रहेगी । इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भाजपा के रणनीतिकारों और दिग्गजों ने इस राज्य को टीएमसी से छीनने के लिए सभी ‘सियासी ब्रह्मास्त्र’ प्रयोग कर लिए थे । दूसरी बात यह भी है कि अब विपक्ष ममता के सहारे भाजपा और पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घेरने के लिए मजबूती के साथ आ खड़ा हुआ है।

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