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सरकारों के बिना किसी तैयारी के वैक्सीनेशन का तीसरा चरण शुरू किया गया—

भारत दुनिया का दूसरा बड़ा आबादी वाला देश है। यहां हर काम राज्य सरकार हो या केंद्र को करने से पहले सोचना पड़ता है । लेकिन देश में वैक्सीनेशन का तीसरा चरण बिना तैयारियों के ही शुरू करने का एलान कर दिया गया । सही मायने में भारत में वैक्सीन की कमी है । कई राज्यों में पहले भी टीका समय से न पहुंच पाने की शिकायतें आई थी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन सिंह लगातार वैक्सीन का भंडार होने पर आए दिन बयान दे रहे हैं । ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये ही खड़ा हो रहा है कि अगर देश में वैक्सीन मौजूद नहीं है, राज्यों के पास कोई स्टॉक नहीं है, तो फिर क्या बिना किसी तैयारी के एक मई से सभी के लिए वैक्सीनेशन का कार्यक्रम क्यों शुरू किया गया? बता दें कि करीब आधा दर्जन राज्यों ने अपने यहां वैक्सीनेशन शुरू करने से इनकार कर दिया है, लेकिन 18 साल से अधिक उम्र वालों के लिए जैसे ही रजिस्ट्रेशन ओपन हुआ, वैसे ही कोविन पॉर्टल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी । पहले दिन करीब सवा करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए, दूसरे दिन भी करीब एक करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए हैं। अभी लोग रजिस्ट्रेशन ही कर पा रहे हैं, वैक्सीन कब और कहां लगेगी, इसका कुछ पता नहीं है। जब राज्यों ने टीके की मांग को लेकर केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है तो कुछ प्रदेशों का दावा है कि उनके पास कुछ दिनों का ही वैक्सीन का स्टॉक बचा है। राज्यों के इस रुख के बाद एक मई से 18 साल से ऊपर लोगों को टीक लग पाएगा या नहीं, इस पर संदेह है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि देश में टीके का पर्याप्त डोज है। उन्होंने राज्यों से ‘भय न फैलाने’ का अनुरोध किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास कोविड-19 टीके की एक करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध हैं और उन्हें अगले तीन दिनों में 20 लाख खुराक और मिलेंगी। देश में कोरोना वायरस के ऐसे माहौल में यदि मोदी सरकार के कोरोना टीकाकरण अभियान को झटका लगता है तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं कई अलग-अलग अध्ययनों में बताया गया है कि देश में 1 मई से कोरोना वायरस की दूसरी लहर अपनी पीक पर होगी। बता दें कि अभी देश में सिर्फ दो ही वैक्सीन उपलब्ध है । सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, ऐसे में यही कंपनियां सभी राज्यों को वैक्सीन दे रही हैं। रूस की स्पुतनिक को भी मंजूरी मिल गई है, एक मई को उसके भारत पहुंचने के भी आसार हैं। लेकिन वो राज्यों को कब तक मिलेगी और लोगों को कब तक लगेगी, ये साफ नहीं है।

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