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महामारी से जूझते सीएम केजरीवाल की शक्तियां केंद्र ने छीनी, अब दिल्ली पर एलजी का अधिकार

पिछले कई दिनों से आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र सरकार के लागू किए गए एनसीटी बिल का विरोध करती ही रह गई और मोदी सरकार ने दिल्ली में कोरोना कहर के बीच में ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को झटका देते हुए उनके ‘अधिकार’ छीन लिए । गृह मंत्रालय ने इसका आदेश जारी कर दिया है । इस आदेश के बाद दिल्ली के प्रशासक उपराज्यपाल (एलजी) होंगे । सही मायने में आम आदमी पार्टी की सरकार और केजरीवाल नाम मात्र के मुख्यमंत्री बन गए हैं । यानी अब दिल्ली की हर महत्वपूर्ण फैसले, आदेश और अधिकारों को जानने के लिए केंद्र सरकार सीधे उपराज्यपाल अनिल बैजल से बात करेगी । बता दें कि मौजूदा समय में राजधानी में कोरोना का जबरदस्त संकटकाल छाया हुआ है । ऐसे में केजरीवाल बेकाबू होती महामारी से कई दिनों से जूझ रहे हैं । ऐसी परिस्थितियों में उनके अधिकारों को खत्म करना उनके लिए और मुसीबत बढ़ा गया है । नोटिफिकेशन के बाद 27 अप्रैल से या कानून प्रभावी हो गया है। इस बिल के कानून बनने के बाद अब उप-राज्यपाल अनिल बैजल के पास दिल्ली की आम आदमी सरकार से ज्यादा शक्तियां होंगी।कानून में कहा गया है कि उपराज्यपाल को आवश्यक रूप से संविधान के अनुच्छेद 239क के खंड 4 के अधीन सौंपी गई शक्ति का उपयोग करने का अवसर मामलों में चयनित प्रवर्ग में दिया जा सके। कानून के उद्देश्यों में कहा गया है कि उक्त कानून विधान मंडल और कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का संवर्द्धन करेगा तथा निर्वाचित सरकार एवं उपराज्यपालों के उत्तरदायित्वों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के शासन की संवैधानिक योजना के अनुरूप परिभाषित करेगा। एनसीटी बिल मंगलवार से प्रभाव में आ गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। लोकसभा में ये संशोधन बिल 22 मार्च और राज्यसभा में 24 मार्च को पास किया गया। 28 मार्च को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। बता दें कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार इस समय संकट काल से गुजर रही है। कोरोना का कहर दिल्ली पर लगातार टूट रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मंगलवार को सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सरकार को फेल करार देते हुए कहा था कि अगर केजरीवाल सरकार चीजों को नियंत्रित नहीं कर पाती तो उसे केंद्र से दखल देने के लिए कहना होगा। दिल्ली सीएम अपने उस फैसले के लिए भी विवादों के घेरे में आ गए जिसमें उन्होंने 5 स्टार अशोका होटल के 100 कमरे न्यायपालिका के लिए रिजर्व करा दिए। आम लोगों में इस बात के लिए गुस्सा देखा गया कि एक तरफ लोग दवाओं, ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों के बाहर दम तोड़ रहे हैं। बीमार को बेड मिलने में दिक्कत हो रही है, लेकिन केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट को खुश करने के लिए जनता के पैसे को लुटा रहे हैं। आम लोगों के लिए जरूरी चीजें उपलब्ध नहीं है और वीआईपीज के लिए पांच सितारा होटलों में जनता के टैक्स से कमरे बुक कराए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया है। उसका कहना है कि दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने वाले इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। बीजेपी चुनाव में दिल्ली के लोगों के दिल नहीं जीत सकी तो बैकडोर से जनता की चुनी हुई सरकार को नाकारा बना रही है। बता दें कि आम आदमी पार्टी भी चुप नहीं बैठने वाली है, हो सकता है आने वाले दिनों में इस मुद्देेे जोर-शोर से उठा सकती है । फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार राजधानी दिल्ली में बेकाबू होती जा रही महामारी को नियंत्रित करने में जूझ रही है ।

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