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Remembering Classical singer Rajan Mishra

नहीं रहे बनारस घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक राजन मिश्र, अकेले रह गए छोटे भाई साजन

रविवार को कोरोना महामारी ने बनारस घराने के शास्त्री गायन और मिश्र बंधुओं की जोड़ी को हमेशा के लिए अलग कर दिया । राजन मिश्र ने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें गंभीर हालत में दिल्ली के सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, उन्हें बचाया नहीं जा सका । उनका जाना संगीत जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी। दुनिया भर में मौजूद तमाम प्रशंसक इस समय शोक में डूब गए हैं । बता दें कि राजन मिश्र और साजन मिश्र दोनों भाइयों ने शास्त्री जगत में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में अपनी पहचान बनाई। राजन मिश्रा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मशहूर गायिका लता मंगेशकर जी ने गहरा दुख प्रकट किया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि शास्त्रीय गायन की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले पंडित राजन मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। बनारस घराने से जुड़े मिश्र जी का जाना कला और संगीत जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। बता दें कि साल 1951 में पंडित राजन मिश्र का जन्म बनारस के शास्त्रीय संगीत घराने में हुआ था। उन्होंने शुरुआती जीवन में पंडित हनुमान प्रसाद मिश्र से तालीम हासिल की थी। उनका अपने छोटे भाई पंडित साजन मिश्र के साथ अटूट रिश्ता रहा है और दोनों ने आपसी तालमेल से जुगलबंदी का ऐसा समां बांधा की दुनिया भर में इनका नाम हो गया। इसके बाद वे 1977 में दिल्ली चले गए। उन्होंने अपने भाई साजन मिश्र के साथ 400 साल पुराने बनारस घराने की परंपरा को आगे बढ़ाया।

राजन मिश्रा और साजन मिश्र का संगीत के साथ आपस में आत्मीयता का भी रिश्ता था—

यहां हम आपको बता दें कि राजन मिश्र और साजन मिश्र दोनों का बहुत ही आत्मीयता का रिश्ता था । दोनों जब स्टेज पर गायन करते थे तब आपस में प्यार भी झलकता था । पंडित राजन मिश्र का अपने छोटे भाई पंडित साजन मिश्र के साथ एक खूबसूरत रिश्ता रहा है। ये एक ऐसा रिश्ता है जहां पर दोनों ने न सिर्फ साथ में संगीत जगत को काफी कुछ दिया बल्कि हर दुख-सुख में साथ भी खड़े रहे । लेकिन कोरोना की इस महामारी ने इस जोड़ी को हमेशा के लिए तोड़ दिया और अब पंडित साजन मिश्र अकेले रह गए । मिश्र बंधुओं ने जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया कई बार अपने शास्त्रीय गायन के कार्यक्रम किए । दुनिया के कई देशों में मिश्र बंधुओं की गायकी के लोग दीवाने हुए। 45 साल से अधिक दोनों भाइयों ने एक साथ स्टेज पर गायन किया । राजन मिश्र और साजन मिश्र ख्याल शैली में गायन के लिए मशहूर थे। मिश्र बंधुओं को गायन केेे क्षेत्र 1994-95 में गंधर्व सम्मान, 1998 में संगीत नाटक अकादमी और 2007 में पद्म भूषण से नवाजा गया। 14 दिसंबर 2012 को राष्ट्रीय तानसेन सम्मान दिया गया था। कोरोना महामारी ने दोनों भाइयोंं को हमेशा के लिए अलग कर दिया ।

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