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April Fools’ Day: Origins and History

मजाक और मस्ती के साथ दुनिया भर के लोगों की शरारतों की पहचान है ‘फर्स्ट अप्रैल’

आज एक ऐसी तारीख है जिसे याद करते ही जेहन में हंसी, मजाक और मस्ती की याद आ जाती है। इस तारीख को लोग पूरे दिन मस्ती के मूड में रहते हैं और बिना झिझक अपने मित्रों और परिजनों के साथ हल्के-फुल्के मजाक करते हैं। इस दिन आप लोगों ने सुना भी होगा ‘उल्लू बनाया बड़ा मजा आया’ । जी हां हम बात कर रहे हैं 1 अप्रैल यानी ‘अप्रैल फूल’ की । यह दुनिया भर में ‘मूर्ख दिवस’ के रूप में मनाया जाता है । यह दिन उन लोगों के लिए खूब साथ देता है जो हर दिन जिंदगी को एंजॉय और मस्ती के साथ जीते हैं । यानी एक दूसरे से हंसी-मजाक करना और मूर्ख बनाना उनकी आदतों में शुमार है । बता दें कि अप्रैल फूल डे भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाता है। कई देशों में इस दिन छुट्टी भी होती है। इस दिन लोग एक-दूसरे से मजाक करते हैं । कुछ वर्षों से लोग सोशल मीडिया के माध्यम से फर्स्ट अप्रैल की याद दिलाते हैं । फिर चाहे वो मैसेज भेजकर, प्रैंक करने के अलावा और भी कई तरीकों से लोग एक दूसरे के साथ मजाक करते हैं। कुछ स्थानों पर इसे ‘ऑल फूल्स डे’ के नाम से भी जाना जाता हैै। सबसे खास बात यह हैै कि इन मजाकों का लोग बुरा नहीं मानते हैं बल्कि इसको एंजाय करते हैं। यहां हम आपको बता दें कि अलग-अलग तरीकों से देशों में यह मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और ब्रिटेन में अप्रैल फूल डे सिर्फ दोपहर तक मनाया जाता है, जबकि कुछ देशोंं जापान, रूस, आयरलैंड, इटली और ब्राजील में पूरे दिन फूल डे मनाया जाता है । इसके अलावा बेल्जियम और फ्रांस में इस दिन लोग एक-दूसरे की पीठ पर कागज की बनी हुई मछली चिपका देते हैं, जिसकी वजह से इसे ये लोग अप्रैल फिश भी कहते हैं। लोग इस तरीके को किसी को बेवकूफ बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

अप्रैल फूल मनाने की परंपरा कुछ इस प्रकार शुरू हुई थी—

एक अप्रैल को हम अप्रैल फूल के रूप में क्यों मनाते आए हैं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। ये अब भी एक रहस्य है। लेकिन दुनियाभर में इसे लेकर अलग-अलग कहानियां और कारण बताए जाते हैं, वह इस प्रकार हैं । अप्रैल फूल मनाने की परंपरा फ्रांस में राजा के एक अजीबोगरीब फैसले से शुरू हुई थी। साल 1582 में यूरोप के राजा पॉप ग्रेगरी 13 ने जनता को​ आदेश दिया कि यूरोपियन देश को जूलियन कैलेंडर को छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार चलेगा। इससे बहुत बड़ा फेरबदल हो गया। जनता ही नहीं राजा और प्रशासन के लिए भी नया साल पूरे तीन माह देर से आने लगा। जनता को एक जनवरी को ही नया साल मनाने की आदत थी और इसके चलते जनता के बीच विरोध प्रदर्शन हुआ और जनता के एक दूसरे के बीच ही राजा का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। लोग एक दूसरे को राजा बताकर उसके साथ प्रैंक करते, और इससे ही अप्रैल फूल मनाने की परंपरा शुरू हो गई। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय की एनी से सगाई के कारण अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। सगाई की तारीख 32 मार्च, 1381 को होने की घोषणा होती है। इस खबर को सुनकर कस्बे के लोग सही मानकर मूर्ख बन जाते हैं। इस पूरे वाकये का जिक्र ज्यॉफ्री सॉसर्स ने अपनी किताब केंटरबरी टेल्स में किया है। जिसे कई लोगों ने मानने से इंकार कर दिया, लेकिन नया साल एक अप्रैल को मनाया जाने लगा। फर्स्ट अप्रैल भारत में भी काफी लोकप्रिय है । स्कूल, कॉलेजों और ऑफिसों में लोग एक दूसरे के साथ मजाक और शरारतें करते हैं ।

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