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लालू प्रसाद यादव की कुर्ता फाड़ होली देशभर में खूब सुर्खियों में रहती थी—

अब बात करेंगे राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव की । जब-जब यह रंगो का त्योहार आता है तब लालू की भी याद आती है । इसके लिए हम आपको 90 के दशक में लिए चलते हैं । लालू प्रसाद यादव उन दिनों बड़े नेता बन चुके थे । लेकिन होली खेलने का अंदाज ‘ठेठ गांव’ जैसा ही था । बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी वे ‘जमकर’ होली खेलते थे । पटना में उनके निवास स्थान पर हर साल सभी पार्टी और विपक्ष के नेता होली खेलने आते थे । उनके घर पर खेली जाने वाली ‘कुर्ता फाड़’ होली सबके आकर्षण का केंद्र होती थी। होली के दिन सुबह से ही नेताओं, मंत्रियों और विधायकों का मेला लगा रहता था। लालू के घर होली खेलने सुबह से ही आने लगते थे । सुबह 9 बजे होली शुरू हो जाती थी जो पूरे दिन जारी रहती थी । लालू होली खेलने में सबसे आगे रहते थे, वह एक-एक को पकड़कर रंग लगाए बिना नहीं मानते थे। राबड़ी देवी भी लालू यादव और अन्य नेताओं के साथ होली खेलतीं थीं। दोपहर तक एक-दूसरे को रंगने के बाद कुर्ता फाड़ होली शुरू होती थी। कुर्ता फाड़ होली में यह नहीं देखा जाता था कि किसका कद कितना बड़ा है। जो जिसके पकड़ में आए उसका कुर्ता फाड़ने में लग जाता था। कई विधायक और मंत्री मिलकर लालू का कुर्ता फाड़ देते थे। लालू भी दूसरों का कुर्ता फाड़ने में पीछे नहीं रहते थे। कुछ देर कुर्ता फाड़ होली खेलने के बाद फिर से एक-दूसरे के शरीर पर रंग डाला जाता था। लालू प्रसाद यादव होली के दिन खुद ढोल-मजीरा बजाते फाग गाते थे । लालू के निवास पर सभी आम और खास लोगों का जमावड़ा रहता । लालू प्रसाद यादव के होली मनाने का अंदाज 2010 तक ऐसे ही चलता रहा । उसके बाद सत्ता से बेदखल और बढ़ती आयु में बीमारी के शिकार के साथ-साथ चारा घोटाले में सजायाफ्ता के बाद लालू की होली बंद होती चली गई । लेकिन आज बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के नेताओं को होली पर लालू की मस्ती जरूर याद आती है ।

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