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कोरोना की बंदिशों ने भले रंग में भंग डाल दिया हो लेकिन होली खेलने के लिए मन तो मचलेगा

होली पर्व हमारे देश में एक ऐसा त्योहार है जिससे देशवासियों की बचपन, युवा और जवानी की खूबसूरत यादें जुड़ी हुईं होती हैं । इस रंगों के पर्व को मनाने के लिए हमेशा से ‘मन मचलता’ रहा है । देश में यही एक ऐसा त्योहार है जिसमें उमंग, उल्लास, मस्ती और अल्हड़पन दिखाई देता है । होली की खुमारी बचपन से लेकर बुढ़ापे तक लोगों को ‘जवां’ भी रखती है । यह रंग उत्सव लोगों में रोमांच भी लाता है । होली के दिन पूरे देशवासी रंगों में सराबोर हो जाते हैं । रंगों का यह पर्व देश में उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है । अभी कुछ दिनों पहले तक होली मनाने को लेकर लोगों ने खूब जोर-शोर से तैयारियां भी शुरू कर दी थी । लेकिन कोरोना के बढ़ते केस को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों ने एक बार फिर पाबंदियां लगा दी हैं । जिससे होली खेलने वाले लोगों में कुछ मायूसी जरूर है। लेकिन होली के रंग में भीगने के लिए सुरूर कम नहीं हुआ है । इस त्योहार का नाम सुनते ही लोग अपने आप को रोक नहीं पाते हैं । होली के दिन गाए जाने वाले ‘फाग’ के गीत कई सालों से चले आ रहे हैं। गाने-बजाने का ये कार्यक्रम होलिका दहन के बाद से ही शुरू हो जाता है। यहां हम आपको बता दें कि देश भर में 28-29 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा । रंगों के इस खूबसूरत त्योहार का लोग काफी इंतजार करते नजर आते हैं। खुशियों और उमंग से भरा होली त्योहार सभी के लिए खास होता है। इस दिन चारों तरफ रंग ही रंग दिखाई देते हैं। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। होली का ये खूबसूरत त्योहार नाच-गाकर लोग मनाते हैं। होली सारे गिले शिकवे दूर करने का भी पावन पर्व माना गया है। कोरोना के चलते भले ही होली पर असर देखने को मिलेगा पर अगर सावधानी बरती जाए तो त्योहार को बेहद आनंदपूर्वक मनाया जा सकता है।

भारत में होली खेलने के लिए दुनिया के कई देशों से लोग आते हैं—

हमारे देश में विविध ढंग से होली मनाई और खेली जाती है । विदेशों में भारत की होली भी प्रसिद्ध है । होली खेलने के लिए दुनिया के तमाम देशों से लोग हर साल भारत आते हैं । कई देशों में भी होली धूमधाम के साथ मनाई जाती है। अब बात करेंगे अपने देश में मनाई जाने वाली होली की। उत्तराखंड की कुमाऊं की बैठकी होली, पश्चिम बंगाल की दोल-जात्रा, महाराष्ट्र की रंगपंचमी, गोवा का शिमगो और हरियाणा के धुलंडी में भाभियों द्वारा देवरों की फजीहत, पंजाब का होला-मोहल्ला, तमिलनाडु का कमन पोडिगई, मणिपुर का याओसांग, एमपी मालवा के आदिवासियों का भगोरिया आदि प्रसिद्ध है। ऐसे ही राजस्थान में जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों का आयोजन किया जाता है। यहां बेहद ही खूबसूरत तरीके से होली खेली जाती है। छत्तीसगढ़ में होली को ‘होरी’ कहा जाता है। यहां पर होली पारंपारिक तरीके से मनाई जाती है। जहां गली-गली में नगाड़े की थाप पर लोकगीत गाए जाते हैं। लेकिन ब्रजभूमि की होली पूरे दुनिया भर में प्रसिद्ध है । यहां पर होली खेलने के लिए देश-विदेश से हर साल हजारों लोग आते रहे हैं । होली की बात हो और गुझिया की बात न हो यह त्योहार पूरा नहीं होता है । इस दिन गुझिया खाने की पूरे देश भर में परंपरा है । हर घर में यह बनाई जाती है । सही मायने में होली की मिठास गुझियों से ही पूरी होती है । लेकिन यह भी सच है बदलते समय के साथ होली के मनाने में भी बदलाव आया है । अभी कुछ वर्षों पहले तक जहां होली पूरे दिन भर खेली जाती थी इसके साथ गांव में तो कई दिनों तक सुरूर छाया रहता था। लेकिन अब चंद घंटों में ही इस त्योहार का समापन हो जाता है ।

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