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तृणमूल कांग्रेस के घोषणापत्र में किए वादों को पीछे छोड़ने के लिए भाजपा ने की तैयारी-

बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं । पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा सीधे ही ममता बनर्जी की सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए कमर कसे हुए हैं । वहीं दूसरी ओर दीदी भी अकेले ही भाजपा से टक्कर ले रही हैं । अब दोनों दलों की मंच से दिखने वाली लड़ाई घोषणा पत्र पर आकर टिक गई है। मुख्यमंत्री ममता ने तृणमूल कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र जनता के सामने बता दिया है । ममता ने 146 पन्नों के अपने मेनिफेस्टो में जहां पिछले 10 साल की उपलब्धियां गिनाईं तो कई वादे भी किए। नौकरी, स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ साथ किसानों और गरीबों के लिए कई विकास योजनाओं का बखान किया । रविवार शाम को कोलकाता में भाजपा का घोषणा पत्र पेश करने जा रहे हैं अमित शाह का पूरा फोकस इस पर है कि भाजपा के विकास और वादे तृणमूल कांग्रेस से बेहतर हो । भाजपा के घोषणापत्र पर ममता बनर्जी समेत सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। कहा जा रहा है कि बंगाल के लोगों का दिल जीतने के लिए भाजपा ने कई रणनीति तैयार की है। अमित शाह घोषणापत्र में कई और बड़ा एलान कर सकते हैं। इसके साथ भाजपा के मेनिफेस्टो में रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार प्रदान पर फोकस होगा। बांग्लादेश से आने वाले हिंदुओं को नागरिकता देने के लिए सीएए लागू करने का एलान भी बीजेपी कर सकती है। घोषणापत्र में आयुष्मान भारत योजना को बंगाल में लागू करने का वादा हो सकता है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का वादा हो सकता है। अपने संकल्प पत्र में भारतीय जनता पार्टी बंगाल की जनता को ये यकीन दिलवाने की कोशिश करेगी कि ‘डबल इंजन’ वाली सरकार के दौर में बंगाल विकास की उड़ान भरेगा। बता दें कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने बंगाल के लोगों की राय पर ही अपना घोषणा पत्र तैयार किया था । जिसका असर भाजपा को लोकसभा चुनाव में दिखाई दिया था । पार्टी के 18 सांसद जीत कर आए थे। गौरतलब है कि बंगाल में आठ चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 27 मार्च को पहले चरण का मतदान है।

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