शुक्रवार, अगस्त 19Digitalwomen.news

Prime Minister Modi will flag off the ‘Padyatra’ from Sabarmati Ashram, Ahmedabad, today.

बापू के ‘दांडी मार्च’ को रवाना कर पीएम मोदी आजादी की सुनहरी यादें ताजा करेंगे

Gandhi ji at Dandi March

आज 12 मार्च है । यह तारीख इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है । आजादी से पहले महात्मा गांधी (बापू) ने एक ऐसे मार्च (यात्रा) पर निकले थे जिसने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया था । कहा जाता है इतिहास अपने आप को दोहराता है भले ही परिस्थितियां, समयकाल, हालात और लोग बदल जाते हैं, लेकिन अतीत याद आता है । अतीत के सहारे ही एक बार फिर इतिहास अपने पुराने दौर में लौट रहा है । महात्मा गांधी के ऐतिहासिक ‘नमक सत्याग्रह’ की 91वीं वर्षगांठ पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की उस याद को ताजा करने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम पहुंचे हैं । बात को आगे बढ़ाएं उससे पहले जान लेते हैं महात्मा गांधी का यह मार्च क्या था, जो आज भी हमें आजादी के उन शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। जी हां हम बात कर रहे हैं बापू के ‘दांडी मार्च’ की । इसके लिए हम आपको 91 वर्ष पहले लिए चलते हैं । महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 12 मार्च, 1930 को 78 सत्याग्रहियों के साथ नवसारी जिले के समुद्रतटीय गांव दांडी के लिए कूच किया था, आगे चलकर इस दांडी मार्च में दो सत्याग्रही और शामिल हो गए थे। अंग्रेजों के नमक कानून के विरोध में गांधीजी ने 366 किलोमीटर पैदल दांडी मार्च कर 6 अप्रैल 1930 को सांकेतिक रूप से नमक बनाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा था, जिसके बाद उन्हें सत्याग्रहियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह के लिए दांडी यात्रा शुरू कर अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था । यह सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इस मार्च के जरिए बापू ने अंग्रेजों के बनाए नमक कानून को तोड़कर उनके साम्राज्य को चुनौती दी थी। आज 12 मार्च शुक्रवार पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से दांडी मार्च को झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत कर रहे हैं । प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा के नेता भी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं । भारत की स्वतंत्रता के अगले वर्ष पूरे होने वाले 75 वर्ष उपलक्ष्य पर आज मोदी सरकार ‘अमृत महोत्सव’ की शुरुआत कर रही है । दूसरी ओर कांग्रेस भी अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से पालडी में कोचरब आश्रम तक पैदल मार्च निकालेगी। यही नहीं कांग्रेसी नेता 80 ट्रैक्‍टरों के साथ किसान सत्‍याग्रह यात्रा भी शुरू करने का एलान किया है।

आजादी की अगले वर्ष होने वाली 75वीं वर्षगांठ के ‘अमृत महोत्सव’ की आज से होगी शुरुआत—

Sabarmati Ashram, Ahmedabad

अहमदाबाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दांडी मार्च को रवाना करने के साथ ही देश की आजादी के अगले वर्ष होने वाले 75वीं वर्षगांठ उत्सव की भी शुरुआत हो जाएगी, जिसे भाजपा की केंद्र सरकार ने आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ नाम दिया है । बता दें कि भारत सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की यह एक श्रृंखला है । यह जश्न-ए-अमृत महोत्सव देश के 75 स्थानों पर मनाया जाएगा। साबरमती आश्रम से आज शुरू होने वाले मार्च में शामिल लोग 386 किलोमीटर की पदयात्रा कर पांच अप्रैल को दांडी पहुंचेंगे। इस दौरान गांधीजी व स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों, पोरबंदर, राजकोट, वडोदरा, बारडोली, मांडवी व दांडी में विविध कार्यक्रम होंगे और युवा पीढ़ी को 1857 से 1947 के बीच चले स्वतंत्रता संग्राम की जानकारी दी जाएगी। महोत्सव को जन-उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, जो 75 सप्ताह तक जारी रहेगा और अगले वर्ष 15 अगस्त 2022 को इस अमृत महोत्सव का समापन होगा । यहां हम आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने इस जश्न के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली 259 सदस्यीय उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति गठित की थी । समिति के सदस्यों में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, 28 मुख्यमंत्री, गायिका लता मंगेशकर, संगीतकार ए आर रहमान, नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, लगभग सभी केंद्रीय मंत्री और कई राज्यपाल शामिल हैं । यह समिति भारत की आजादी के 75 साल होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की रूपरेखा के लिए नीति निर्देशन और मार्गदर्शन का काम करेगी। पिछले दिनों डिजिटल माध्यम से आयोजित हुई उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘आजादी का यह पर्व एक ऐसा होना चाहिए जिसमें स्वाधीनता संग्राम की भावना और उसका त्याग साक्षात अनुभव हो सके और 130 करोड़ देशवासियों की जनभागीदारी को लेकर यह आजादी का जश्न मनाया जाए’।

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