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Farmers’ Protest: Farmer from Haryana commits suicide

कृषि कानून के खिलाफ आज फिर तीन किसानों की मौत, एक किसान ने सुसाइड नोट में लिखा- सरकार खून मांगती है

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को 102 दिन हो चुके हैं।लेकिन अभी भी ना सरकार किसानों की बातों को सुनने को तैयार है और ना किसान सरकार की बातों को मानने के लिए तैयार हैं।
वहीं आज हरियाणा में एक बार फिर इस कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे तीन किसानों की मौत हो गई है। इनमें से एक किसान कुंडली बॉर्डर पर अपनी ट्रैक्टर-ट्राली में मृत पाया गया, दूसरा टीकरी बॉर्डर पर बुजुर्ग किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत गई है। तीसरे किसान ने टीकरी बॉर्डर पर फांसी लगा जान दे दी।
वहीं बहादुरगढ़ में किसान ने कसार के निकट सर्विस रोड के पास पेड़ से फंदा लगाकर जान दी है। मृतक किसान की पहचान हरियाणा के हिसार जिले के सिसाय गांव के रहने वाले राजबीर (47) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि किसान राजबीर काफी दिनों से किसान आंदोलन में लंगर सेवा में जुटा था। राजबीर ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है।
किसान ने नोट में तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी आखिरी इच्छा सरकार से जताई है। वहीं उसने किसानों से आखिरी अपील भी की और लिखा कि कानूनों को रद्द करवाने के बाद ही घर जाना। भगत सिंह ने देश के लिए जान दी थी और मैं किसान भाइयों के लिए जान दे दी।
राजवीर ने आगे नोट में लिखा है कि ये सरकार किसानों का खून मांगती है और खून मैं देता हूं। किसान ने नोट में अपने आपको रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा और महम विधायक बलराज कुंडू का फैन बताया है। बता दें कि टीकरी बॉर्डर पर अब तक चार किसान खुदकुशी कर चुके हैं। वहीं टीकरी बॉर्डर पर दिल का दौरा पड़ने से जान गंवाने वाले बुजुर्ग किसान की पहचान जनक सिंह (70) के रूप में हुई है। वह पंजाब के सुनाम के गांव गडूआं के रहने वाले थे।


कुंडली बॉर्डर पर भी किसान की मौत
उधर, कुंडली बॉर्डर पर करनाल के किसान रविंद्र की मौत हो गई है। 30 वर्षीय रविंद्र सिंह असंध के ठरी गांव के रहने वाले थे। वह अपने ट्राली में मृत मिले। पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी है। 

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