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उत्तराखंड की राजनीति में सियासी हलचल, सीएम रावत की कुर्सी अधर में

उत्तराखंड में राजनीति इन दिनों काफी जोर पर है। प्रदेश के विधान सभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। प्रदेश में त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ जारी असंतोष को लेकर भाजपा नेतृत्व बेहद गंभीर है और हालात संभालने के लिए तीन से चार दिन के अंदर विधायक दल की बैठक बुलाए जाने की भी चर्चा है।
सूत्रों का कहना है कि अगर विधायक दल की बैठक हुई तो इसका सीधा अर्थ है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन निश्चित है। हालांकि चुनाव नजदीक होने के कारण नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति नहीं आने देने का प्रयास भी कर सकता है। हालात ऐसे हो गए कि आनन-फानन में भाजपा के द्वारा उत्तराखंड में पर्यवेक्षक रमन और प्रभारी दुष्यंत गौतम को भेजा गया जिनकी उपस्थिति में पार्टी कोरग्रुप की बैठक हुए, जहाँ कई सांसदों, विधायकों और मंत्रियों ने सीएम के खिलाफ मोर्चा खोला और मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के समर्थन में बहुत कम लोग दिखे।

गौरतलब है कि अपनी कार्यशैली के कारण रावत संघ परिवार के भी निशाने पर हैं। संघ परिवार मंदिरों के सरकारीकरण से बेहद नाखुश है। इसके अलावा धार्मिक नगरी हरिद्वार में शराब बॉटलिंग प्लांट खोले जाने और बूचड़खाना खोलने की इजाजत देने पर भी संघ परिवार ने नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में राज्य सरकार ने बूचड़खाना खोलने के आदेश को वापस ले लिया था। संघ परिवार कुंभ मेले में व्यवस्था को लेकर भी काफी नाराज है।
बता दें की सीएम पद की रेस में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सतपाल महाराज और सांसद अनिल बलूनी के नाम सबसे ऊपर हैं।

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