सामग्री पर जाएं

भारत और नॉर्वे ने लक्षद्वीप तथा पुदुचेरी में समुद्री स्थानिक योजना का संचालन करने पर जताई सहमति

भारत सरकार के 2030 न्यू इंडिया विजन के तहत विकास के दस आयामों में नीली अर्थव्यवस्था को एक प्रमुख आयाम माना गया है। इस के तहत भारत और नॉर्वे देश के बीच हुई मंत्रणा में दोनो देशों ने अगले पांच वर्षों के लिए समुद्री स्थानिक योजना के क्षेत्र में संयुक्त रूप से काम करने के लिए सहमति जताई है। इस संबंध में पहली परियोजना संचालन समिति की बैठक हाल ही में सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दौरान दोनों देशों के द्वारा एक योजना तैयार की गयी है,जिससे ऊर्जा, परिवहन, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, पर्यटन आदि क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां कुशल, सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से संचालित की जा सकें। यह बैठक वर्ष 2019 में दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत भारत-नॉर्वे एकीकृत महासागर पहल का हिस्सा है। परियोजना के लिए पायलट स्थलों के रूप में लक्षद्वीप और पुदुचेरी की पहचान की गई है।

इस दौरान दोनों देशों ने तटीय क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग हेतु समर्थन देने का भी फैसला किया है। समुद्री स्थानिक योजना यानी एमएसपी के नाम से जानी जाने वाली इस पहल को भारत में राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा लागू किया जाएगा।
शुरुआत में, एनसीसीआर पुडुचेरी और लक्षद्वीप के लिए समुद्री स्थानिक योजना की रूपरेखा तैयार करेगा। इस क्षेत्र में कई क्षेत्रों जैसे उद्योग, मत्स्य पालन और पर्यटन के विकास के लिए उपलब्ध अवसरों को देखते हुए इन स्थलों को पायलट परियोजना के लिए चुना गया है। अनुमान है कि अध्ययन और योजना निर्माण में भारत सरकार का प्रारंभिक निवेशलगभग 8-10 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगा। भविष्य में, इन दो पर्यावरणीय महत्वपूर्ण क्षेत्रों के समुद्री स्थानिक योजना की रूपरेखा को देश के अन्य तटीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने एमएसपी के संचालन में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को समर्थन देने में रुचि व्यक्त की है। यह पहल, भारत के तटीय क्षेत्रों के लिए सामाजिक स्तर पर लाभकारी सिद्ध होगी।

कई क्षेत्रों में होगा लाभलारी:
एमएसपी के इस पहल को विदेश मंत्रालय, नॉर्वे के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और नार्वे की पर्यावरण एजेंसी द्वारा लागू किया जाएगा। इससे पहले, एनसीसीआर ने चेन्नई, गोवा और कच्छ की खाड़ी के लिए तटीय प्रबंधन योजना विकसित की थी, जो बहुत सफल साबित हुई थी। अब, एमएसपी पहल देश के और अधिक तटीय क्षेत्रों में विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के विकास में सहायता प्रदान करेगी।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

<span>%d</span> bloggers like this: