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West Bengal Election 2021: भाजपा ने तैयार किया चुनावी प्लान तो कांग्रेस बंगाल में अभी तक नहीं हो पा रही एकजुट

Bengal Assembly Election 2021

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जहां एक ओर भाजपा आलाकमान अपने हाईटेक प्रचार को लेकर रणनीति तैयार कर ली है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में न तो अंदरूनी कलह खत्म हो पा रही है न चुनावी रैलियों के लिए अभी तक कोई रणनीति बनती नहीं दिख रही । इसकी सबसे बड़ी वजह है कि पार्टी से असंतुष्ट नेताओं का विद्रोह हर दिन खुलकर सामने आ रहा है । पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान इन राज्यों में अपने नेताओं को प्रचार में उतारने के लिए अभी तक नाम तय नहीं कर पा रहा है । अभी फिलहाल राहुल गांधी ही इन राज्यों में चुनाव की बागडोर संभाले हुए हैं । आज हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर । बंगाल चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है । यही एक ऐसा राज्य है जहां भाजपा सबसे ज्यादा जोर लगाए हुए है । बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आज भाजपा केंद्रीय आलाकमान ने अपने नेताओं की जनसभाओं को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया । यह हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में 20 और असम में 6 रैली करेंगे, जबकि गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का बंगाल में करीब 50-50 चुनावी जनसभाएं करने की तैयारी कर रहे हैं । भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 मार्च को करेंगे । मालूम हो कि प्रधानमंत्री अब तक तीन बार बंगाल दौरा कर चुके हैं । इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह तीन और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा चार बार दौरे कर चुके हैं । बता दें कि पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान निर्वाचन आयोग ने पिछले शुक्रवार को किया था तभी से भाजपा अपनी तैयारियों में जुट गई है ।

बंगाल में कांग्रेस के गठबंधन को लेकर पार्टी के नेताओं में ही मचा घमासान—

जहां भारतीय जनता पार्टी बंगाल में सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी तरह से सियासी दांव आजमा रही है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं में अभी तक एक राय नहीं बन पा रही है । पांच राज्यों में चुनाव को लेकर राजनीति गरम है। वहीं कांग्रेस में मतभेद खुलकर सामने आने लगा है । बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर विवाद की शुरुआत हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने बंगाल में पार्टी द्वारा इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ गठबंधन किए जाने पर सवाल खड़ा किया है, उन्होंने कहा है कि सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस पार्टी चयनात्मक नहीं हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि आईएसएफ जैसे दलों के साथ गठबंधन कांग्रेस पार्टी की मूल विचारधारा के खिलाफ है। आनंद शर्मा के सवाल उठाए जाने पर बंगाल कांग्रेस प्रभारी अधीर रंजन चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली में पार्टी लीडरशिप के हस्ताक्षर के बिना कोई भी फैसला व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया । अधीर रंजन ने कहा कि हम एक राज्य के प्रभारी हैं और व्यक्तिगत रूप से कोई फैसला नहीं लेते हैं । उन्होंने कहा कि बंगाल में कांग्रेस की लड़ाई ममता बनर्जी और बीजेपी के खिलाफ है, यहां कांग्रेस को लेफ्ट का साथ मिला है, जबकि ममता बनर्जी को कांग्रेस-वाम गठबंधन के साथ बीजेपी और अन्य पार्टियों से भी मुकाबला करना है। बता दें कि आनंद शर्मा वहीं है जो गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी आदि के साथ असंतुष्ट नेताओं मैं शामिल हैं ।

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