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विपक्षी सांसदों के ‘सवालों पर फिरा पानी’ पीएम मोदी संसद में भाषण देकर चलते बने

कई दिनों से कांग्रेस समेत विपक्षी सांसद कृषि कानून और किसानों के आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री से बजट सत्र में जवाब मांगने की तैयारी कर रहे थे ।इसके लिए उन्होंने बाकायदा रणनीति भी तैयार की थी । विपक्ष की ओर से मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए गए । आखिरकार आज संसद के राज्यसभा में पीएम मोदी के 70 मिनट संबोधन के दौरान विपक्ष के सांसदों को मानो सांप सूंघ गया हो, प्रधानमंत्री ने विरोधी सांसदों की कमजोर नब्ज पकड़ कर उन पर ही ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए । पीएम ने विपक्ष के एक-एक सवालों के जवाब देते हुए उन पर करारा हमला बोला । जबकि आमतौर पर देखा गया है कि संसद सत्र के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगता है लेकिन आज पीएम मोदी अपने पूरे फॉर्म में नजर आए और वह खुद ही कांग्रेस समेत कई सांसदों पर तंज कसते हुए वार पर वार किए जा रहे थे । इस दौरान विपक्ष प्रधानमंत्री की ओर टकटकी लगाए देखता रह गया । प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कृषि कानूनों को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए गए सभी चिंताओं और सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने कृषि कानूनों, चीन सीमा, अर्थव्यवस्था और कोरोना काल को लेकर बात की और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा । प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन से लेकर कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा हर किसी पर तंज कसे । सही मायने में कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों के सांसदों के सवालों पर पानी फेरते हुए पीएम मोदी ने राज्यसभा में विपक्षी नेताओं की क्लास लगा दी। पीएम मोदी ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता, ‘अवसर तेरे लिए खड़ा है, फिर भी तू चुपचाप पड़ा है’ भी सदन में पढ़ी । पीएम ने कहा कि 21वीं सदी में वो जरूर लिखते कि अरे भारत, आत्मनिर्भरता के पथ पर दौड। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मजाकिया अंदाज में विपक्ष पर तंज कसते हुए उनकी तुलना किसी शादी में नाराज हुई फूफी से कर दी। प्रधानमंत्री ने कोरोना का जिक्र करते हुए विपक्ष की खिंचाई की । उन्होंने कहा कोरोना के कारण आप लोग फंसे रहते होंगे, लेकिन आपने सारा गुस्सा मेरे ऊपर निकाल दिया तो आपका मन भी हल्का हुआ। मैं आपके लिए काम आया, ये मेरा सौभाग्य मानूंगा। ये आनंद आप लगातार लेते रहिए और मोदी है तो मौका लीजिए ।‌

राजनीति और राष्ट्रनीति में से किसी एक को हमें चुनना होगा—-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एनसीपी चीफ शरद पवार सहित कई कांग्रेस के नेताओं ने भी कृषि सुधारों की बात की है । शरद पवार ने कृषि सुधारों का विरोध नहीं किया, हमें जो अच्छा लगा वो किया आगे भी सुधार करते रहेंगे। पीएम ने कहा कि आज वो विपक्ष अपनी बात से यू-टर्न कर रहा है। उन्होंने सदन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक कोट भी पढ़ा जिसमें लिखा था, ‘हमारी सोच है कि बड़ी मार्केट को लाने में जो अड़चने हैं, हमारी कोशिश है कि किसान को उपज बेचने की इजाजत हो’। पीएम मोदी ने कहा कि जो मनमोहन सिंह ने कहा वो मोदी को करना पड़ रहा है । ‘प्रधानमंत्री ने विपक्ष को इशारा करते हुए कहा कि राजनीति और राष्ट्रनीति दोनों में से हमें किसी एक को चुनना होगा’। उन्होंने आगे कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई, जो भी बताया गया वो आंदोलन को लेकर बताया गया लेकिन मूल बात पर चर्चा नहीं हुई कि आखिर ये किसान आंदोलन हो क्यों रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से इस देश में ‘आंदोलनजीवियों की एक नई जमात पैदा हुई है जो विरोध प्रदर्शनों के बिना जी नहीं सकती’। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल संसद में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं जबकि अपने राज्यों में उन्‍होंने इनके किसी न किसी प्रावधान को लागू भी किया है । राज्यसभा में पीएम मोदी ने इस बात को दोहराया कि ‘एमएसपी’ जारी रहेगी। इसके बाद प्रधानमंत्री संसद में भाषण देकर चले गए उसके बाद कांग्रेस नेताओं की चुप्पी टूटी ।

प्रधानमंत्री के भाषण के बाद एमएसपी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार से किए सवाल–

संसद में प्रधानमंत्री के एमएसपी वाले बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार से सवाल किया । उन्होंने पूछा कि किसानों को इसकी लिखित में गारंटी क्यों नहीं दी जा रही है । खड़गे ने कहा कि किसान चाहते हैं कि एमएसपी की गांरटी एक्ट में हो। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और कमेटी के अध्यक्ष थे उस वक्त उन्होंने ही लिखित में कहा था कि किसानों को एमएसपी लिखित में मिलनी चाहिए आज वे क्यों नहीं दे रहे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी सुनना नहीं चाहते हैं, वे सिर्फ अपनी बात बोलते हैं और दूसरों की नहीं सुनते । उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों का क्यों विरोध हो रहा है ये बात साफ तौर पर सरकार को बता दी गई है लेकिन सुनने के लिए वे तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। राहुल ने ट्वीट किया है कि बजट में सैनिकों की पेंशन में कटौती। न जवान न किसान, मोदी सरकार के लिए उद्योगपति मित्र ही भगवान। उधर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि एमएसपी पर कानून बने यह किसानों के लिए फायदेमंद होगा। टिकट ने कहा कि देश में भूख से व्यापार करने वालों को बाहर निकाला जाएगा।

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