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West Bengal Elections 2021:Trinamool Congress (TMC) and BJP Fights in West Bengal for Vivekananda’s legacy on his 155th birth anniversary

जयंती पर राजनीतिक दलों में स्वामी विवेकानंद को अपना बनाने की छिड़ी लड़ाई

चुनाव में वोट पाने के लिए कुछ भी करेगा । वह सभी सियासी दांव चलेगा जिससे मतदाताओं को अपना बनाया जा सके । जी हां ऐसा ही पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली तक सुनाई दे रहा है । कुछ समय से ‘राजनीतिक दलों में देश के महापुरुषों को अपना बनाने को लेकर खूब सियासी लड़ाई छिड़ी हुई है’ । चलिए अब बात को आगे बढ़ाते हैं, आज 12 जनवरी है । इस दिन विश्व प्रसिद्ध महान दार्शनिक और विचारक स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाती है । आज के दिन देश में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ भी मनाया जाता है । इस मौके पर युवा वर्ग अपने प्रेरणा स्रोत विवेकानंद को याद करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करते हैं । लेकिन इस बार ‘स्वामी विवेकानंद की जयंती पूरी तरह सियासत का रंग चढ़ा हुआ है’ । आपको बता दें कि कुछ ही महीनों बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं । कई दिनों से स्वामी विवेकानंद की जयंती को लेकर भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस यानी ममता बनर्जी के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है । दिल्ली से भाजपा केंद्रीय आलाकमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विवेकानंद की जयंती को लेकर ललकार रहे हैं । ‘बंगाल की धरती पर जन्मे विवेकानंद पर तृणमूल कांग्रेस सबसे पहले अपना हक जता रही है, दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि विवेकानंद की विचारधाराओं से हमारी पार्टी प्रेरित है’ । भाजपाई इस बार ममता के गढ़ में विवेकानंद की जयंती पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं । बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी और भाजपा विवेकानंद को अपने साथ खड़ा करना चाहती है, क्योंकि आज भी बंगाल का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिस पर विवेकानंद के विचारों और आध्यात्म का बहुत प्रभाव है । अच्छा होता आज विवेकानंद की जयंती पर तृणमूल और भाजपा के नेता उनके विचारों को वास्तविक रूप से अमल में लाते हैं और एक स्वस्थ राजनीति और राष्ट्रवाद का नारा देते । अब बात करेंगे उत्तर प्रदेश की ।

विवेकानंद की जयंती के बहाने समाजवादी पार्टी भी बीजेपी के हिंदू वोट पर डोरे डालने में जुटी–

Swami Vivekananda

हम बात करते हैं उत्तर प्रदेश की, जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं । भारतीय जनता पार्टी के सामने सत्ता में बने रहने की चुनौती है। तो समाजवादी पार्टी फिर से सरकार में वापसी के लिए जी जान से जुटी है। ‘ऐसे में सपा को विवेकानंद की जयंती पर उनकी याद आ गई’ । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से प्रदेश के हर जिलों में ‘घेरा बनाकर नौजवानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का आह्वान किया’ । अखिलेश ने कहा कि युवा घेरा कार्यक्रम में महंगी होती शिक्षा, बेरोजगारी, युवाओं पर फर्जी केस तथा निर्दोषों पर लगी एनएसए, पूंजीनिवेश का अभाव और फैक्ट्रियों में बंदी के साथ छंटनी, सरकारी भर्तियों में धांधली आदि मुद्दों पर सपा कार्यकर्ता युवाओं के साथ योगी सरकार को घेरेंगे । सपा अध्यक्ष नेे बताया योगी सरकार ने प्रदेश के युवाओंं को बेरोजगार कर दिया है, अब उनकी पार्टी स्वामी विवेकानंद जयंती पर युवाओं को जगाना चाहती है । ‘बता दें कि आमतौर पर समाजवादी पार्टी राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण जैसे नेताओं की ही जयंती मनाती रही है, लेकिन अब विवेकानंद के राष्ट्रवाद के बहाने उसकी कोशिश बीजेपी के हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने की है’ । दूसरी और प्रदेश में योगी सरकार हर साल की तरह विवेकानंद जयंती धूमधाम से मनाने के लिए तैयार है, भाजपा ने इसकी जिम्मेदारी युवा मोर्चा को दे रखी है । दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के विवेकानंद जयंती मनाए जाने पर भाजपा ने तंज कसते हुए कहा है कि समाजवादी पार्टी को विवेकानंद की जयंती मनाना अच्छी बात है, लेकिन उनके पार्टी के नेता विवेकानंद के विचारों पर कहां चलते हैं, समाजवादी पार्टी की तो प्रतीकों महापुरुषों के बहाने राजनीति करने की पुरानी आदत रही है ।‌ वहीं विवेकानंद जयंती पर कांग्रेस उधेड़बुन में है, पार्टी के नेताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि वह इस मौके पर क्या स्टैंड लें ।

आज देश भर में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है—

आइए अब स्वामी विवेकानंद के बारे में जानते हैं । महान विचारक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था । उनका वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। बाद में आध्यात्म के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों को देख देश-विदेश के युवाओं का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ। भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्वामी विवेकानंद के जन्‍मदिवस को युवा दिवस के रूप में काफी धूमधाम से मनाया जाता है । विवेकानंद का संपूर्ण जीवन, उनके संघर्ष और उनकी विचारधारा लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं क्योंकि उनके विचारों पर चलकर ही लाखों-करोड़ों युवाओं ने अपने जीवन में सही बदलाव कर उसे सार्थक बनाया । वर्ष 1893 में विवेकानंद को अमेरिका के शिकागो में आयोजित किए गए विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था । इसके बाद विवकानंद को संपूर्ण विश्व भर में आध्यात्मिक गुरु की पहचान मिली । विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे । बता दें कि विवेकानंद ने 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन और 1898 को गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की। अपने गिरते स्वास्थ्य की वजह से विवेकानंद अपने आखिरी दिनों में बेलूर मठ में ही रहने लगे थे ।‌ आखिरकार 39 वर्ष की आयुु में 4 जुलाई 1902 को महानपुरुष स्वामी विवेकानंंद की मृत्यु हो गई । मृत्यु के बाद उनका दाह संस्कार बेलूर में ही उसी गंगा घाट पर किया गया जहां उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का किया गया था

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