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अब पीएम मोदी के रवींद्र नाथ टैगोर का गुजरात से रिश्ता निकालने पर ‘दीदी का मूड फिर ऑफ’

पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच आए दिन विवाद सुर्खियों में छाया रहता है । अभी पिछले दिनों ही गृहमंत्री अमित शाह दो दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंच कर सियासत को गर्म कर आए थे । ‘आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और भावनात्मक सियासी चोट दे दी’ । आइए आपको बताते हैं प्रधानमंत्री ने आज ऐसा क्या कहा जिस पर तृणमूल कांग्रेस फिर गुस्सा गई है और ‘दीदी का मूड ऑफ’ हो गया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति के साथ जीवन की हर विधा में ‘मास्टर’ बनना चाहते हैं । कोरोना महामारी के दौरान पिछले कुछ महीनों से पीएम मोदी विभिन्न रूपों में सामने आ रहे हैं । बता दें कि उन्होंने जो नया भेष धारण किया है वह एक ‘धर्मगुरु’ के रूप में सामने आया है । आज इसी कड़ी में मोदी ने राजधानी दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से पश्चिम बंगाल के विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षा-दीक्षा का अर्थ समझाया । ‘अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने रवींद्र नाथ टैगोर को गुजरात से भी जोड़कर पश्चिम बंगाल की राजनीति फिर गरमा दी है’ । प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी को उग्र कर दिया । यही नहीं प्रधानमंत्री ने आज गुरुदेव टैगोर की खूब खुलकर प्रशंसा भी की । पीएम ने कहा कि आजादी के आंदोलन में विश्वभारती यूनिवर्सिटी का योगदान है, जिसने हमेशा राष्ट्रवाद की प्रेरणा दी। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव कहते थे कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अकेला चलना हो, तो चल पड़िए। जब आजादी का आंदोलन चरम पर था, तब बंगाल उसे दिशा दे रहा था। मोदी ने कहा कि हमारा विकास वैश्विक होता है, गुरुदेव का संदेश ही आत्मनिर्भर भारत का आधार है। पीएम कहा कि गुरुदेव ने राष्ट्रवाद की तस्वीर भी सामने रखी। ‘इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बंगाल के दो और महापुरुष रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद को भी याद किया’ । मोदी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस के कारण देश को स्वामी विवेकानंद मिले, स्वामी जी भक्ति-ज्ञान और कर्म को अपने में समाए हुए थे। भक्ति आंदोलन के बाद कर्म आंदोलन आगे बढ़ा। पीएम मोदी कहा कि वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद में मुखर थी। बता दें कि साल 1921 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती देश की सबसे पुरानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। मई 1951 में इसे एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और इंस्टीट्यूशन ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस घोषित किया गया था। आज इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश से हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं । अब आपको बताते हैं प्रधानमंत्री ने टैगोर का गुजरात से रिश्ता कैसे निकाला ।

विश्व भारती के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए पीएम ने बंगाल को रिझाया—

‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने राजनीति में मझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं उतना ही लोगों से जुड़ने के लिए नए-नए प्रयोग ढूंढ कर लाते हैं’ । मोदी की खासियत यही है चाहे वह किसी भी प्रदेश या विदेश के दौरे पर जाएं वहां कुछ ऐसी बातें कहते हैं जिससे लोग उनका मुरीद बन जाते हैं । आपको बता दें कि रवींद्र नाथ टैगोर, रामकृष्ण और विवेकानंद को बंगाल में बहुत ही आदर सम्मान के साथ नाम लिया जाता है । बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय में आज भी प्रधानमंत्री ने वैसा ही किया । बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए नरेंद्र मोदी गुरुवार को जब अपना संबोधन कर रहे थे, उस वक्त पूरी तैयारी करके आए थे । मोदी ने कहा कि गुरुदेव के बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर की नियुक्ति गुजरात में हुई थी। तब रवींद्र नाथ टैगोर उनसे मिलने अहमदाबाद में आते थे, वहां पर ही उन्होंने अपनी दो कविताओं को लिखा था। गुजरात की बेटी भी गुरुदेव के घर बहू बनकर आई थी। सत्येंद्र नाथ टैगोर की पत्नी ‘ज्ञानेंद्री देवी’ जब अहमदाबाद में रहती थीं, तब उन्होंने देखा कि वहां महिलाएं साड़ी का पल्लू दाईं ओर रखती थीं, तब उन्होंने बाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू रखने की सलाह दी जो अब तक जारी है। ‘बता दें कि मोदी का यह टैगोर गुजरात कनेक्शन बंगाल की मुख्यमंत्री ममता को पसंद नहीं आया, क्योंकि दीदी नरेंद्र मोदी को बाहरी बताने में लगी हुईं हैं । लेकिन पीएम मोदी पश्चिम बंगाल में जब तक विधानसभा चुनाव न हो वहीं का लिबास ओढ़े रहना चाहते हैं’ । इधर विश्वभारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वहीं ममता के समारोह में शामिल नहीं होने पर भाजपा ने इस पर सवाल उठाए हैं ।

टैगोर को गुजरात से जोड़ने पर मोदी के बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने की तल्ख टिप्पणी–

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को गुजरात से जोड़ने के बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने तल्ख टिप्पणी की है । ‘बंगाल सरकार के मंत्री ने पीएम के संबोधन में उच्चारण और तथ्यात्मक त्रुटियों पर भी उनकी आलोचना की’ । ममता बनर्जी सरकार में मंत्री ब्रत्य बोस ने कहा कि मोदी के टैगोर और गुजरात को जोड़ने की कोशिश अक्षम्य थी। मंत्री बोस ने कहा कि टैगोर के भाई जो गुजरात में पदस्थापित थे, उनके सबसे बड़े भाई नहीं थे। उनकी पत्नी का नाम ज्ञाननंदनी था, न कि जो पीएम ने कहा। ब्रत्य बोस कहा कि ज्ञाननंदनी और साड़ी के पल्लू की कहानी एक मिथक है, सच नहीं है । तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीएम ने टैगोर के राष्ट्रवाद की बात की, जबकि टैगोर ने राष्ट्रवाद को सबसे विभाजनकारी चीज कहा था । धर्म को विभाजित करने के लिए इस शब्द के उपयोग की टैगोर ने वकालत नहीं की थी। आपको बताते हैं कौन हैं ज्ञाननंदनी देवी । टैगोर परिवार की बहू ज्ञाननंदनी देवी रवींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर की पत्नी थीं। वह 1863 में भारतीय सिविल सर्विस में जाने वाली पहली भारतीय थीं। दरअसल ज्ञाननंदनी देवी ने अपनी इंग्लैंड और बॉम्बे की यात्राओं के अनुभवों और पारसी गारा पहनने के तरीकों को मिलाकर साड़ी पहनने का तरीका निकाला जो आज भी भारत में प्रचलन में है। बताते हैं कि सबसे पहले इसे ब्रह्मसमाज की औरतों ने अपनाया था इसलिए इसे ब्रह्मिका साड़ी कहा गया।

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