सामग्री पर जाएं

Sariska National Park – A Versatile Tourist Destination

सरिस्का : एक अनोखा पर्यटक केंद्र

इस लॉकडाउन के अगर आप घर बैठे बैठे बोर हो गए हों और आप प्रकृति के करीब रहने वाले व्यक्ति हैं तो, आप इस खूबसूरत मौसम का मज़ा सरिस्का(Sariska) अभ्यारण जा कर ले सकते हैं। यहाँ की हरी भरी वादियां आपके मन को जरूर भाएंगी।

राजस्थान(Rajsthan) के अलवर(Alwar) जिले में स्थित अरावली पहाड़ियों के बीच लगभग 866 वर्ग किलोमीटर में फैला सरिस्का बाघ अभ्यारण भारत की सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।


अलवर जिले का यह क्षेत्र पहले राजस्थान में राज करने वाले राजा महाराजों के शिकार के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन राजशाही खत्म होने के बाद इसे 1955 में वन्यजीव के लिए आरक्षित भूमि घोषित कर दिया गया और फिर 1978 में इसे बाघ परियोजना योजना रिजर्व(National Tiger Protection Act) का दर्जा दिया गया। अभ्यारण बनाए जाने के बाद सबसे पहले यहां 1 जोड़े बाघ(Tiger) को लाकर बसाया गया और फिर धीरे धीरे इसे यह अभ्यारण बाघों के लिए जाना जानें लगा। लेकिन इसके बाद ऐसी भी स्थिति आई जब इस अभ्यारण में एक भी बाघ नहीं बचे जिसके बाद यहां दुबारा बाघ को लाकर बसाया गया ,फिलहाल सरिस्का में 27 बाघ मौजूद हैं।


सरिस्का अभयारण जयपुर(Jaipur) से 107 किमी और दिल्ली(Delhi) से लगभग 200 किमी दूरी पर है। 1979 में इस अभ्यारण को एक राष्ट्रीय पार्क(National Park) का दर्जा हासिल हुआ। यह अभ्यारण दुनिया भर से पर्यटकों को पूरे साल तक आकर्षित करती है।
सरिस्का अभ्यारण घूमने के लिए यहां सफारी(Safari) सबसे ज्यादा खाश होती है लेकिन सफारी जीप के साथ आप यहां हाथी की सवारी भी कर सकते हैं।


सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में एक पहाड़ी की चोटी पर एक 17 वीं सदी का महल भी मौजूद है। उद्यान में क्षेत्र में जंगलों के साथ साथ 10 वीं और 11 वीं सदी के गढ़ – राजौर के मध्ययुगीन मंदिरों के काफी अवशेष भी मौजूद हैं। सरिस्का अभ्यारण के चारो तरफ की हरियाली आपके मन को पूरी तरह से मोह लेगी। सफारी के सवारी में कहीं मोर की पीहू पीहू की आवाज ,तो कहीं पत्तों की में सरसराहट की आवाजें आपको चारों तरह नजरें घुमानें के लिए मजबूर कर देगी।


यहां आपको कई किस्म के वन्यजीव जैसे तेंदुआ, चीतल, नीलगाय, लंगूर, लकड़बग्घा, सांभर डियर और सियार सफारी के दौरान देखने के लिए मिल जाएंगे ,साथ ही अन्य जीव जैसे बाघ, कोबरा, जंगली छिपकली जैसे जीव भी दिख सकते हैं।
सरिस्का अभ्यारण का कुछ हिस्सा किंगफिशर, सैंड ग्राउस, गोल्डन बैक, और कठफोड़वा समेत बड़ी संख्या में पक्षियों को आकर्षित करता है अगर आप पक्षियों के प्रेमी हैं तो आप की नजरें इन जगहों पर आकर जरूर ठहर जाएगी। यहां पेड़ों पर रहने वाले रंग बिरंगे पक्षी आपको काफी आकर्षित करेंगे। सफारी में लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगेगा ,जिसमें आपको कई तरह के जानवरों के साथ साथ कई क़िले और राजाओं के शिकार के स्थान दिखेंगे जो काफी पुराने और अनोखे होंगे।

सफारी की सवारी :


सरिस्का घूमने के लिए सबसे अच्छा साधन सफारी की सवारी है। सफारी के दौरान आपको काफी अच्छे गाइड्स मिलेंगे जो सरिस्का अभ्यारण घूमने मेे और इसके बारे में जानने में आपकी काफी मदद करेंगे। प्रति दिन यह अभियान सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुली होती है।
यहां भ्रमण के लिए प्रतिदिन दिन में दो बार लगभग 20 सफारी की सवारी निकलती है, जिसमें एक बार में 4 या 6 लोग सवारी कर सकते हैं। जप्सी सफारी की सवारी प्रतेक व्यक्ति 800 से 1000 रुपए तक होती है। सफारी के अलावा आप यहां हाथी और ऊंट की सवारी भी कर सकते हैं।

सरिस्का भ्रमण का सही समय :


सरिस्का अभ्यारण घूमने के लिए सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च तक होता है क्यों कि इस समय चारो तरफ हरियाली नजर आएगी साथ ही इस समय यहां मौसम शांत होता है। बाकी के दिनों में राजस्थान में होने वाली गर्मी से यहां लोग काफी परेशान होते हैं।

कैसे पहुंचें सरिस्का:


सरिस्का जाने के लिए सबसे अच्छा सड़क मार्ग है। सड़कों का एक अच्छा नेटवर्क राजस्थान के अन्य सभी शहरों से सरिस्का को जोड़ता है। दिल्ली से सरिस्का 200 किमी और जयपुर से 110 किमी की दूरी पर स्थित हैं यहां के लिए काफी बसें उपलब्ध हैं।
110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जयपुर का सांगानेर हवाई अड्डा निकटतम एयरबेस है। इसके अलावा, पर्यटक गंतव्य से 36 किमी की दूरी पर स्थित अलवर रेलवे स्टेशन से भी सरिस्का पहुँच सकते हैं।

कहां ठहरें:


सरिस्का अभ्यारण के सबसे नजदीक जगह अलवर(Alwar) है जहां आपको कई अच्छे होटल्स और रेस्ट,गेस्ट हाउस अच्छे और सस्ते दामों में भी मिल जाएंगे।

एक बार जरूर चखें:

राजस्थान में आपने दाल बाटी चूरमा , सेव टमाटर की सब्जी और गट्टे की सब्जी जरूर खाई होगी, लेकिन इस बार अगर आप अलवर गए हों तो राजस्थान की दाल टिक्कड़ जरूर खाए। इस टिक्कड़ की खासियत यह है कि इसे 8 तरह की अनाजों को साथ मिलाकर चूल्हे पर बनाया जाता है। इस टिक्कड़ को लहसुन की देशी चटनी ,दाल और छांछ से साथ जरूर चखें।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: