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Kangana Ranaut Sanjay Raut Controversy: मुंबई की ‘अस्मिता के सवाल’ पर अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut ) ने शिवसेना और भाजपा में करा दी जंग (डिजिटल वूमेन विशेष)

Kangana Ranaut Sanjay Raut Controversy
Kangana Ranaut Sanjay Raut Controversy

वर्ष 1984 में राजकुमार कोहली निर्देशित एक फिल्म आई थी ‘राज तिलक’ । इस फिल्म में एक्टर कमल हासन के द्वारा बोला गया एक संवाद (डायलॉग) था ‘बात यहां खत्म हो जाती तो कुछ और बात थी’ । इस फिल्म के संवाद को यहां लिखना इसलिए जरूरी हो जाता है कि आज हम चर्चा मायानगरी, मुंबई की करेंगे । पिछले कुछ महीनों से फिल्म इंडस्ट्रीज ‘अशांत’ है । इसका कारण है कि युवा और ऊर्जावान अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत । इस मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच सियासी बयानबाजी भी काफी समय से जारी है । वहीं फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकार सुशांत सिंह की सुसाइड के बाद सहमे हुए हैं । लेकिन एक अभिनेत्री ऐसी है जो सुशांत की मौत के बाद लगातार और ‘डंके की चोट’ पर फिल्म इंडस्ट्रीज पर ‘सवाल पर सवाल’ उठाए जा रही है । यह बॉलीवुड अभिनेत्री रियल लाइफ में अपने बेबाक बयानों से ‘मणिकर्णिका’ यानी झांसी की रानी बन चुकी है । जी हां हम बात कर रहे हैं तेज तर्रार फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की । अभी तक कंगना फिल्म इंडस्ट्रीज के कलाकारों पर कई तरह के गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाती चली आ रही थी । कंगना के इन बेबाक बयानों पर देश की राजनीतिक दल लगभग ‘चुप्पी’ साधे हुए थे । ‘यहां तक कंगना अपनी जुबान को लगाम देती तो कुछ और बात थी’ लेकिन कंगना एक ऐसी ‘करारी चोट’ दी कि जिसमें भाजपा, शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना में ‘दंगल’ शुरू हो गया है । बता दें कि कंगना रनौत ने जब से मुंबई की पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) से तुलना की तो पूरी शिवसेना ही उनके पीछे पड़ गई है । लेकिन कंगना न डरी हैं और न ही अपने बयानों से पीछे हट रही हैं, वे अभी भी लगातार ट्वीट कर अपने विरोधियों पर निशाना साध रही हैं । दूसरी ओर महाराष्ट्र भाजपा राज्य इकाई भी कंगना के बयान पर दो गुटों में बंटी नजर आ रही है ।

‘मुझे मुंबई पुलिस से डर लगता है’ कंगना के इस ट्वीट के बाद शुरू हुआ सियासी घमासान—-

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पिछले दिनों कंगना ने कहा था कि ‘मुझे मुंबई पुलिस से डर लगता है’ । इसी बात पर शिवसेना के राज्य सभा सांसद संजय राउत से रहा नहीं गया और अभिनेत्री के बयान पर तीखी निंदा की । इसके बाद कंगना और संजय रावत के बीच ‘जुबानी जंग’ शुरू हो गई । अभिनेत्री के मुंबई पुलिस को लेकर दिए बयान के बाद राउत ने कहा कि अगर उन्हें मुंबई में डर लगता है तो वापस नहीं आना चाहिए । जिस पर कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की ओर से ट्वीट कर लिखा कि शिवसेना नेता संजय राउत ने मुझे खुली धमकी दी है और कहा है कि मैं मुंबई वापस न आऊं । पहले मुंबई की सड़कों में आजादी के नारे लगे और अब खुली धमकी मिल रही है । रनौत ने आगे कहा कि ये मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की तरह क्यों लग रहा है । अभिनेत्री के इसी बयान के बाद देश की सियासत एक बार फिर गर्म है ।

शिवसेना सांसद राउत (Sanjay Raut) ने ‘मुंबई मराठी मानुष के बाप की है’ बयान देकर दिया कंगना को जवाब—

शुक्रवार का दिन अभिनेत्री कंगना रनौत और शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) के बीच सुबह से लेकर शाम तक घमासान चलता रहा । समाचार पत्रों और चैनलों में इन दोनों केे बीच ‘वार-पलटवार’ सुर्खियों मेंं छाया हुआ है । राउत का कंगना को जवाब देते हुए कहा कि ‘मुंबई मराठी मानुष के बाप की है’, संजय ने कहा कि शिवसेना महाराष्ट्र के ऐसे दुश्मनों को खत्म किए बिना नहीं रुकेगी । दरअसल, कंगना रनौत ने शुक्रवार को कहा कि वह 9 सितंबर को मुंबई पहुंच रही हैं, किसी के बाप में हिम्मत है तो रोक ले । उसकेे बाद शिवसेना नेता अनिल परब ने भी कंगना रनौत पर हमला किया है । उन्होंने कहा कि सुशांत मामले की जांच करने के लिए सीबीआई मुंबई आई, कंगना ने जांच एजेंसी को अब तक कोई भी जानकारी नहीं दीं, वो सिर्फ ट्वीट कर रही हैं । दूसरी ओर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी शिवसेना और अभिनेत्री कंगना के बीच जुबानी जंग में कूद गई गई । एमएनएस ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के साथ मुंबई की तुलना करने पर अवैध के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए ।

कंगना ने अपने आपको ‘मराठा’ बताकर शिवसेना को ललकारा–

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शिवसेना और मनसे के हमले के बाद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने खुद को ‘मराठा’ बताते हुए सांसद संजय राउत को ललकारा । अभिनेत्री ने ट्वीट कर कहा कि ‘किसी के बाप का नहीं है महाराष्ट्र’ । महाराष्ट्र उसी का है जिसमें मराठी गौरव को निश्चित किया है और मैं कहती हूं ‘हां मैं मराठा हूं, उखाड़ो मेरा क्या उखाड़ोगे’ । एक्ट्रेस कंगना रनौत द्वारा मुंबई की तुलना पीओके से करने पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि कंगना अगर मुंबई की तुलना हमारे दुश्मन द्वारा अधिग्रहीत पीओके से करती हैं तो उन्हें मुंबई लौटने का कोई हक नहीं है। दूसरी ओर करीना के मुंबई पुलिस पर दिए गए बयान के बाद अभिनेत्री रेणुका शहाणे और उर्मिला मातोंडकर में कड़े शब्दों में निंदा की है । ऐसे ही बॉलीवुड के कई कलाकारों ने इस मामलेे में रनौत का साथ नहीं दिया । दूसरी ओर रेसलर बबीता फोगाट ने एक्ट्रेस कंगना केेे समर्थन में कहा कि ‘शेरनी’ मुंबई में आ रही है, किसी की हिम्मत हो तो रोक लो ।

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अभिनेत्री को लेकर महाराष्ट्र के भाजपा नेता दो गुटों में बंट गए—

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई पुलिस और पीओके की तुलना करने पर महाराष्ट्र भाजपा के नेता दो गुटों में दिखाई दिए । एक नेता अभिनेत्री के समर्थन में तो दूसरा विरोध में उतर आए । बीजेपी विधायक आशीष शेलार ने कहा कि हम मुंबई पर कंगना रनौत के बयान का समर्थन नहीं करते हैं । शेलार ने कहा कि कंगना रनौत को मुंबई, महाराष्ट्र और यहां के लोगों को आजमाना नहीं चाहिए । दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता राम कदम ने एक्ट्रेस रनौत के समर्थन में आ गए । राम कदम ने कहा कि शिवसेना के नेता अभिनेत्री पर दबाव बना रहे हैं । भाजपा नेता कदम ने कहा कि कंगना रनौत वास्तव में ‘झांसी की रानी’ है, जो शिवसेना की धमकियों से नहीं डरती है । उसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने रनौत पर राज्य सरकार और मुंबई पुलिस को बदनाम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया है । सावंत ने कहा कि मुंबई की तुलना पीओके से करके अभिनेत्री ने 13 करोड़ महाराष्ट्र वासियों का अपमान किया है।


AK
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बिहार विधानसभा से पहले सीएम नीतीश कुमार ने खेला चुनावी खेल, दलित कार्ड पर चुनाव जीतने की तैयारी

Bihar Election 2020
Eyeing Bihar election, CM Nitish Kumar plays Dalit card

सत्ता का सुख पाने के लिए हमारे नेता कितने प्रकार के हथकंडे अपनाते हैं कि अभी तक ‘आम वोटर’ भ्रमित होता रहा है । नेताओं के लंबे-चौड़े वायदों का जनता आकलन नहीं कर पाती है । ‌राजनीतिक पार्टियों और नेताओं में चुनाव के दौरान सत्ता पर काबिज होने के लिए ‘सियासी दांव’ चलने की होड़ लगी रहती है । आज बात होगी बिहार की । इन दिनों राज्य में ‘राजनीति गर्म’ है । पिछले दिनों जब चुनाव आयोग ने बिहार के विधान सभा चुनाव 29 नवंबर से पहले कराने की घोषणा की तभी से भाजपा, जेडीयू, राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी में लोकलुभावन, प्रलोभन, आश्वासन और जातिगत समीकरण समेत तमाम मुद्दे खंगाले जा रहे हैं । मौजूदा समय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं । वे पिछले 15 वर्षों से राज्य की सत्ता संभाले हुए हैं ।‌ अब नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए नया दांव ‘दलित कार्ड’ खेला है । सीएम नीतीश की जब इस सियासी हथकंडे की गूंज उत्तर प्रदेश तक पहुंची तब दलितों की ‘राजनीतिक ठेकेदार’ बसपा प्रमुख मायावती आग बबूला हो गईं हैं । हम बात को आगे बढ़ाएं उससे पहले बता दें कि लगभग आठ वर्षों से बसपा प्रमुख खाली बैठी हुईं हैं । मायावती न तो उत्तर प्रदेश न केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो पा रही हैं । अब उन्होंने सोचा बिहार विधानसभा चुनाव में क्यों न पार्टी की ‘किस्मत आजमाई जाए । यहां हम आपको बता दें कि मायावती की अभी तक की राजनीति ‘दलितों के इर्द-गिर्द’ ही घूमती रही है । अब आगे चर्चा करते हैं । जब नीतीश कुमार ने दलित वर्ग को रिझाने के लिए चुनावी हथकंडा अपनाया तब मायावती से रहा नहीं गया । बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश से ही मुख्यमंत्री नीतीश पर ताबड़तोड़ हमले कर डालें । मायावती ने बिहार के दलितों को नीतीश कुमार से बचने के लिए आगाह भी कर डाला । आइए आपको बताते हैं नीतीश कुमार ने बिहार के दलितों को लेकर क्या घोषणा की है ।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बिहार में चुनावी दलित कार्ड यह है—

राज्य विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलित कार्ड खेल दिया है । सीएम नीतीश ने नए आदेश में कहा है अगर राज्य के किसी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से आने वाले लोगों की हत्या हो जाती है तो उसके परिवार के एक सदस्य को ‘सरकारी नौकरी’ हम देंगे । सियासत के जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार यह नया आदेश चुनाव से पहले दलित आदिवासी समुदाय को लुभाने के लिए किया गया चुनावी हथकंडा है । दूसरी ओर रामविलास पासवान और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी दलितों के ऊपर सियासत करती आई है । अब देखना होगा नितीश कुमार का यह नया दांव बहुजन समाजवादी पार्टी पर कितना भारी पड़ता है ।https://platform.twitter.com/embed/index.html?creatorScreenName=digitalwomen2&dnt=false&embedId=twitter-widget-1&frame=false&hideCard=false&hideThread=false&id=1301911125739466754&lang=hi&origin=https%3A%2F%2Fdigitalwomen.news%2F2020%2F09%2F05%2Fbihar-election-2020-eyeing-bihar-election-cm-nitish-kumar-plays-dalit-card%2F&siteScreenName=digitalwomen2&theme=light&widgetsVersion=219d021%3A1598982042171&width=550pxhttps://platform.twitter.com/widgets.js

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी समुदाय से आते हैं । अब मुख्यमंत्री को नया सियासी हथकंडा बनाए रखना आसान नहीं होगा क्योंकि राज्य में लोजपा भी दलितों के मुद्दे पर मुखर है । दूसरी ओर मायावती पूरा प्रयास करेंगी कि राज्य में दलित वोट उनसे बिखरने न पाए । इसके साथ ही नीतीश कुमार को पिछड़ा वर्ग को भी साधने की चुनौती कम नहीं होगी ।

मायावती का चुनावी जंग, दलित वर्ग नीतीश कुमार के बहकावे में नहीं आएंगे—

दलितों को प्रलोभन दिए जाने के बाद मायावती ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है । बसपा प्रमुख ने कहा कि बिहार की सरकार प्रलोभन देकर दलित और आदिवासी वोट के जुगाड़ में लगी हुई है । मायावती ने कहा कि अगर बिहार की नीतीश सरकार को इन वर्गों के हितों की इतनी ही चिंता थी तो उनकी सरकार अब तक ‘क्यों सोई रही’ । उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को इस मामले में यूपी की बसपा सरकार से बहुत कुछ ‘सीखना’ चाहिए था । बसपा प्रमुख ने कहा कि बिहार के दलित मुख्यमंत्री के बहकावे में नहीं आएंगे ।‌ उन्होंने कहा कि बिहार में हुए दलितों पर अत्याचार पर अभी तक नीतीश कुमार खामोश बैठे रहे हैं, जब चुनाव का समय है तब वह इस पर राजनीति कर रहे हैं । मायावती ने कहा कि बिहार सरकार अपने मंसूबे में कभी कामयाब नहीं होगी । बता दें कि मायावती ने बिहार चुनाव में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया है। हालांकि उत्तर प्रदेश में चार बार सत्ता पाने वाली बसपा बिहार में अभी तक अपनी जड़ें जमाने में कामयाब नहीं रही है। बसपा बिहार में कभी भी दो अंकों में सीटें नहीं जीत सकी जबकि यहां 16 फीसदी दलित मतदाता हैं । दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी की बिहार में ‘राह इतनी आसान नहीं होगी’ । क्योंकि उसे लोक जनशक्ति पार्टी जो कि दलित पहचान के रूप में भी जानी जाती है, उससे टक्कर लेनी होगी ।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

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